कांग्रेस का सूरमा कौन…?


मध्यप्रदेश में कांग्रेस के एक बड़े नेता जो राज्यपाल भी रह चुके हैं, कांग्रेस की गुटबाजी को देखते हुए उन्होंने एक पत्र लिखा है। उस पत्र में उन्होंने कहा है कि कांग्रेस को गुटबाजी से बचना चाहिए, क्योंकि जब पार्टी का बुरा वक्त आता है, तब एकता की जरूरत होती है और पार्टी के साथ खड़े होने वाले नेताओं को शहीद कर दिया जाता है। जब पार्टी सत्ता में आती है तो लोग मलाई खाने आ जाते हैं। यह दुखड़ा व्यक्त करते हुए उपरोक्त बड़े नेता ने कहा है कि 1977 का समय याद करिए, जब इंदिरा गांधी को छोड़कर सारे सारे नेता इधर-उधर हो गए थे। मामला तो यहां तक पहुंचा कि इंदिरा गांधी का साथ देने वाले कोई सूरमा सामने नहीं आया। उक्त नेता ने अपने पत्र में लिखा है कि उस समय सिर्फ भोपाल का एक मात्र सूरमा इंदिरा गांधी के साथ सबसे पहले आकर खड़ा हुआ। आज हालात यह है कि नए-नए अवसरवादी नेता सत्ता की मलाई खा रहे हैं, जिन्होंने कभी कांग्रेस के लिए संघर्ष ही नहीं किया है। स्वाभाविक है कि उनका इशारा कुछ ऐसे मंत्रियों के लिए है, जो दिग्विजय सिंह जैसे नेता को ब्लैकमेलर कहने से नहीं चूकते। उल्लेखनीय है कि यह वाकया उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल अजीत कुरैशी को लेकर ही लिखा गया है।
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