सुप्रीम कोर्ट पहुंचा आरे में पेड़ों की कटाई का मामला, आज होगी सुनवाई

पेड़ कटाई का मामला : छात्रों के ज्ञापन पर देश की सर्वोच्च अदालत ने लिया संज्ञान
नई दिल्ली।
आरे कॉलोनी में पेड़ कटाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच चुका है. पेड़ों को काटने पर रोक लगाने के लिए लॉ स्टूडेंट की चि_ी पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। उच्चतम न्यायलय की स्पेशल बेंच में इस मामले की सुनवाई कल सुबह 10 बजे होगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पर्यावरण संबंधी मामलों के लिए यह स्पेशल बेंच बनाई गई है।
इस स्पेशल बेंच में जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं. वहीं इससे पहले मुंबई के एक सेशन कोर्ट ने आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए 29 प्रदर्शनकारियों को जमानत दे दी। प्रदर्शनकारियों पर पेड़ों की कटाई के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों के काम में बाधा डालने और उनपर हमला करने के आरोप लगाए गए हैं। सत्र न्यायाधीश एचसी शिंदे ने कुछ शर्तों के साथ प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का आदेश दिया। इन शर्तों में, सात हज़ार रुपये का निजी मुचलका और यह अश्वासन शामिल है कि वे प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे। आरे में पेड़ों की कटाई के मुद्दे पर बोले उद्धव ठाकरे- हत्यारों से सही ढंग से निपटेंगे, बहरहाल, प्रदर्शनकारियों के ठाणे जेल से रविवार को बाहर आने की संभावना नहीं है क्योंकि अभी कानूनी एवं अन्य औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई हैं. उत्तर मुंबई के आरे कॉलोनी में मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लि द्वारा पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई थी जिसके बाद शुक्रवार रात और शनिवार को ये गिरफ्तारियां हुई थीं. इन पेड़ों की कटाई मेट्रो शेड बनाने के लिए की गई है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मुंबई नगर निकाय के पेड़ों को काटने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था.
रात भर पेड़ों की हत्या होती रही, रात भर जागने वाली मुंबई सोती रही
पुलिस ने शनिवार को आरे कॉलोनी में सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी थी, जिसके तहत लोगों के जमा होने पर पाबंदी लगा दी. इसकी मियाद रविवार को भी बढ़ा दी है। 29 आवेदकों (इनमें अधिकतर छात्र हैं) की पैरवी कर रहे वकीलों ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें जमानत दी जाए क्योंकि उनमें से कई को सोमवार से शुरू हो रही परीक्षाएं देनी है. उन्होंने अदालत से कहा कि आवेदकों की और हिरासत की जरूरत नहीं है, क्योंकि बोरीवली की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें पहले ही न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। एक वकील आदित्य बमबुलकर ने बताया, चूंकि, कई आवेदक युवा छात्र हैं। इसलिए अदालत का विचार है उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ा जा सकता है।
आरे कॉलोनी मामला: मुंबई मेट्रो प्रमुख ने पेड़ों की कटाई को बताया जायज, कहा- विरोध करना एक प्रोपगेंडा का हिस्सा उन्होंने बताया कि अदालत ने प्रत्येक आवेदक उस थाने में सात हजार रुपये का निजी मुचलका देगा, जहां मामले दर्ज हैं. उन्होंने बताया कि अदालत ने आवेदकों को निर्देश दिया है कि वे 15 दिन में एक बार बुधवार को शाम छह से नौ बजे के बीच थाने में पेश होंगे. अदालत ने उनसे जांच अधिकारी के साथ सहयोग करने को भी कहा। कम से कम 38 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 332 और 143 के तहत मामला दर्ज किया है।