निवेशकों को आकर्षित करने मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला


उद्योग के लिए मिली भूमि के 5 एकड़ तक हिस्से में बन सकेगी आवासीय बिल्डिंग

विजय कुमार दास
भोपाल, 13 अक्टूबर।
मध्यप्रदेश में मैग्नीफिसेंट एमपी मतलब देश भर के उद्योगपतियों को रेड कारपेट में स्वागत करने के लिए कमलनाथ सरकार ने बड़ा एवं ऐतिहासिक फैसला लिया है जो 70 वर्ष की आजादी के बाद पहली बार मध्यप्रदेश में निवेश करने वाले लोगों के लिए खुश खबर है।
सूत्रों की माने तो मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती और प्रमुख सचिव उद्योग विभाग राजेश राजौरा की दूरदृष्टि का ही नतिजा है कि मुख्यमंत्री ने आद्योगिक विस्तार के लिए नीतिगत फैसले ने यह अब तय कर दिया है कि औद्योगिक भूखण्ड में 5 एकड़ तक का आवासीय परिसर निर्माण करने की अनुमति हर उस कंपनी को मिलेगा जो 200 करोड़ से अधिक का पंूजी निवेश करने का संकल्प लेकर राज्य सरकार के समक्ष केवल प्रस्ताव ही नहीं रखेगा, बल्कि अपने उद्योग को एक वर्ष के भीतर ही धरातल पर उतारेगा। इस विषय में राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने जब प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि उद्योगों के हिसाब से मप्र राज्य औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम में बड़े बदलाव कर दिए गए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि इनसे निवेशकों को सीधे तौर पर लाभ होगा। नए प्रावधान में तय किया है कि उद्योग के लिए मिली जमीन की दस साल की लीज यदि कोई एकमुश्त जमा कराता है तो उसे 20 साल तक कोई पैसा नहीं देना पड़ेगा। इसी तरह उद्योगपतियों को यह छूट भी रहेगी कि वे पूरी जमीन के 3 फीसदी हिस्से जो अधिकतम 5 एकड़ तक होगी, पर अपने कर्मचारी व तकनीकी स्टाफ के लिए आवासीय बिल्डिंग बना सकेंगे। मैग्निफिसेंट एमपी से ठीक पहले बदले गए प्रावधानों की सरकार ब्रांडिंग भी करेगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को मप्र पर भरोसा बने। डॉ. राजेश राजौरा ने यह भी बताया कि आईटी सेक्टर की डिमांड को देखते हुए इंदौर के 25 एकड़ वाले क्रिस्टल आईटी कैंपस में ही तीसरा आईटी पार्क बनाने की मंजूरी हो गई। मुख्यमंत्री कमलनाथ 17 अक्टूबर को इसका भूमि-पूजन करेंगे। यह पार्क 150 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा। पहला पार्क 5 लाख वर्गफीट, दूसरा 2 लाख वर्गफीट और तीसरा 4 लाख वर्गफीट पर बनेगा। अभी आईटी पार्क में 4 हजार लोग काम कर रहे हैं। यह संख्या आने वाले समय में बढ़ेगी। यह भी प्रयास चल रहे हैं कि जो सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन जबलपुर, ग्वालियर अथवा भोपाल के आईटी पार्क हैं, उन्हें भी उद्योग विभाग को दे दिया जाए। हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ।
नियम बदले
जमीन की दस साल की लीज का एकमुश्त पैसा देने पर 20 साल तक कोई राशि नहीं लगेगी, इंदौर में बनेगा तीसरा आईटी पार्क, लाउंड्री, स्टीम और नेचुरल गैस से जुड़ी इंडस्ट्री को भी किया जा सकेगा भूमि का आवंटन।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने वालों की मदद 25 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ की। लेबोरेटरी स्थापित करने पर भी निवेश पर 25 फीसदी या अधिकतम 50 लाख रुपए तक की मदद होगी। फार्मास्यूटिकल लाइसेंस लेने में अब दो साल तक का वक्त (स्लेग पीरियड) और बढ़ाया। एंटरटेनमेंट और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए निवेश पर 10 से 15 फीसदी तक प्रोत्साहन राशि, जो अधिकतम 5 करोड़ रुपए तक होगी। इसमें जमीन की लागत शामिल नहीं रहेगी। संचालक मंडल को बदले बिना यदि कंपनी का नाम परिवर्तित होता है तो इसके लिए अब सिर्फ 10 हजार रुपए देने होंगे। पहले जमीन के बाजार मूल्य की 10 फीसदी राशि लगती थी। डॉ. राजेश राजौरा ने यह भी बताया कि
भोपाल-देवास मार्ग पर इंडस्ट्रियल पार्क
भोपाल-देवास फोरलेन मार्ग पर इंडस्ट्रियल पार्क की प्रस्तावित जगह को भी जल्द फाइनल करने की तैयारी है, इसके लिए कंसलटेंट की नियुक्ति हो गई है। जल्द ही जगह बताई जाएगी, ताकि समिट में उसका जिक्र किया जा सके। इसी मार्ग पर एंटरटेनमेंट जोन भी बन सकता है। अभी साउथ के राज्यों में 10 लाख रुपए की आबादी पर 18 मल्टीप्लेक्स हैं, जबकि मप्र में एक। इसे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।
उन्होने कहा कि हम नई योजना बनाने की तैयारी में है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफेक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के लिए अलग से नीति बनाई जाएगी। इससे एंटरटेनमेंट के साथ मेडिकल डिवाइस और टेलीविजन ट्यूब की कंपनियों को लाभ होगा। इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल के उत्पादन के लिए भी पॉलिसी आएगी। उद्योगों को यह राहत भी मिलेगी कि वे अपनी भूमि के सामने सड़क से 20 फीट तक पौधरोपण कर सकेंगे। पीथमपुर में सेक्टर 5 व 6 के निर्माण के लिए करीब 8 हजार एकड़ जगह और लेने की तैयारी है। यह लैंडपूल नीति के तहत ली जाएगी, जिसमें जमीन देने वालों को कुछ हिस्से में दूसरे निर्माण का अधिकार मिलेगा।