मैग्नीफिसेंट एमपी मतलब ‘मैगनेट कमलनाथ

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्य प्रदेश सरकार कुछ क्षेत्रों को निवेश संभावित क्षेत्र मानकर उन पर खास ध्यान दे रही है जैसे- एग्री-फूड प्रोसेसिंग, ऑटो, फार्मा, आई.टी. वेयरहाउस-लॉजिस्टिक्स, टैक्सटाइल और पर्यटन। यही वजह है कि 18 अक्टूबर को इंदौर में होने वाले मैग्नीफिसेंट एम.पी. इन्वेस्टर्स समिट के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी सरकार ने देशभर के उद्योगपतियों और व्यवसायियों को आमंत्रित किया है। अब तो यह लगने लगा है कि मैग्नीफिसेंट एमपी मतलब मुख्यमंत्री कमलनाथ मैगनेट बन गए हैं। मतलब कमलनाथ पहले मुख्यमंत्री हैं, जिनके चुंबकीय रिश्ते 18 अक्टूबर को इंदौर में दिखेंगे। खासतौर पर इस समय मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती, इकबाल सिंह बैंस अपर मुख्य सचिव उद्यानिकी एवं खाद्य एवं प्रसंस्करण, अनुराग जैन अपर मुख्य सचिव वित्त विभाग, मोहम्मद सुलेमान अपर मुख्य सचिव योजना आयोग ऊर्जा, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी एवं प्रवासी भारतीय विभाग, डॉ राजेश राजौरा प्रमुख सचिव उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग तथा अशोक बर्णवाल प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री (समन्वय) के साथ प्रदेश की कमलनाथ टीम पूरी तरह से इन्वेस्टमेंट समिट को सफल बनाने में जुटी दिख रही है। प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा के अनुसार नए निवेशकों को प्रदेश में लाने का ये एक बड़ा कदम है। ये समिट किसी एक सेक्टर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सभी उद्योग क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए आयोजित किया जा रहा है। दरअसल प्रदेश सरकार ने निवेश की रफ्तार तेज करने के लिए पिछले एक साल में कई नीतिगत सुधार किए हैं। ये समिट प्रदेश में नए निवेशकों को लाने की उसी कड़ी का हिस्सा है। मध्यप्रदेश में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों की निरंतरता, दो अहम कारक होंगे, प्रदेश में नए निवेश के लिए प्रदेश में ये दोनों ही कारण सकारात्मक नजर आ रहे हैं, खासकर तब, जब प्रदेश में बिजनस के लिए प्रदेश सरकार के पास अच्छा माहौल बनाने के लिए चार साल बाकी हैं। अगर नीतिगत फैसलों और सही वातावरण बनाने की यही दिशा बनी रहती है तो कोई भारत का दिल कहे जाने वाला मध्य प्रदेश, देश की प्रगति और विकास का ताकतवर इंजन भी जल्द ही बन जाएगा। इलाके के लिहाज से मध्य प्रदेश भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, जो देश के ठीक बीचों-बीच है, इसीलिए इसे देश का दिल भी कहा जाता है। मध्यप्रदेश की सीमाएं पांच और राज्यों से मिलती हैं। हालांकि प्रदेश समुद्री किनारे से दूर है पर अपनी कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहतर विकल्प देता है। मध्यप्रदेश का रेल नेटवर्क विस्तृत है और प्रदेश से 550 ट्रेनें रोज गुजरती हैं। राजौरा ने बताया यहां 2,30,000 किलोमीटर की सड़कें हैं, जो इसे देश के सभी महत्वपूर्ण व्यापारिक और वाणिज्यिक केंद्रों से बखूबी जोड़ती हैं। इसके अलावा 5 एयरपोर्ट, जिनमें से 1 अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट भी है, मध्यप्रदेश को शानदार तरीके से देश और दुनिया से जोड़े रखते हैं। ये भौगोलिक और ढांचागत फायदा प्रदेश को देश के 50 प्रतिशत हिस्से से जोडऩे का काम कर रहा है। मध्यप्रदेश निवेश के लिए एक आदर्श राज्य इसलिए भी है, क्योंकि ये एक शांत प्रदेश रहा है, जहां सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है। यहां की विकास दर भी ऊंची है, जो कि देश की विकास दर से काफी लंबे समय से ज्यादा रही है। पिछले दस साल की बात करें, तो राज्य की विकास दर का प्रतिशत 9 ठहरता है, जो काफी अच्छा कहा जाएगा। इसके अलावा राज्य में ढांचागत विकास भी अच्छा हुआ है, जो कि निवेश के लिए जरूरी है और बिजली भी यहां खपत से ज्यादा उपलब्ध है। शिक्षा और व्यवसायिक प्रशिक्षण के अच्छे विकल्प भी प्रदेश में मौजूद हैं जैसे- आई.आई.एम., आई.आई.टी., एम्स, इसके अलावा कई अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज और औद्योगिक ट्रेनिंग के सेंटर जो कुशल कारीगरों और अच्छे प्रोफेशनल्स की मौजूदगी पक्की कराते हैं। मध्यप्रदेश कृषि आधारित अर्थव्यवस्था रही है, जहां उपज का क्षेत्र 22.1 मिलियन हैक्टेयर है। प्रदेश सोयाबीन, चना, दाल और प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक है। धान और मटर के उत्पादन में भी प्रदेश में दूसरे नंबर पर है। बासमती चावल का जो निर्यात पूरे भारत से यू.एस. और कनाडा को होता है, उसका 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्यप्रदेश से ही जाता है। मध्यप्रदेश का 1.3 मिलियन हैक्टेयर का बड़ा इलाका हॉर्टीकल्चर के लिए इस्तेमाल होता है। इनमें फल, सब्जियां और मसाले शामिल हैं। औषधीय पौधों को उगाने में प्रदेश देश में पहले नंबर पर है। इसके अलावा फूलों, मसालों और सब्जियों की पैदावार में भी मध्यप्रदेश, देश में ऊंचा दर्जा रखता है। यहाँ ये बताना महत्वपूर्ण है कि प्रदेश में 4,000 कृषि को-ऑपरेटिव और 256 कृषि मंडियां एक स्थिर वातावरण और बाजार देने में मदद कर रही हैं। ऐसा लगता है कि प्रदेश की नई सरकार, कृषि-आधारित सेक्टर के महत्व को समझ रही है और कम समय में ही कृषि क्षेत्र में सहायता के कई नीतिगत फैसले ले चुकी है। ये फैसले बीज के सर्टिफिकेशन से लेकर उपज के बाजार में सहजता से पहुंचने तक कृषि क्षेत्र के हर पहलू पर लिए गए हैं। हालांकि कृषि-ऋण माफी से जुड़ी खबरों ने पिछले समय में ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, मगर कृषि के लिए आसान कर्ज मुहैया कराने जैसी नीतियों ने असल में ज्यादा बड़ा असर दिखाया है। नीतिगत सुधारों की पहल के तौर पर राज्य सरकार ने भूमि के इस्तेमाल के नियमों को भी सरल किया है। इन सुधारों का सबसे बड़ा फायदा, छोटे और हाशिए पर खड़े किसानों और जमीन मालिकों को मिला है। मौजूदा राज्य-सरकार का ध्यान प्रदेश में ऐसा माहौल बनाने का है, जहां व्यवसाय और उद्योग पनप सकें। पिछले एक साल में मंदीदीप, मालनपुर, बोरगांव और पीथमपुर इंडस्ट्रियल टाउनशिप को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। इसका नतीजा ये निकला है कि कई मसले जो लंबे समय से चले आ रहे थे अब सुलझ गए हैं, जैसे- व्यवसाय के लिए आवश्यक अनुमति और कागजी कार्यवाही की लंबी प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। सरकार ने चार ग्रीन-फील्ड टैक्सटाइल इंडस्ट्री एरिया बनाने की भी घोषणा की है और नॉन-लेदर और फार्मा पार्क भी, जो औद्योगिक इकाइयों के लिए जरूरी बनते जा रहे हैं। राज्य सरकार कई तरह के कामों के लिए तकनीकी मदद भी मुहैया करा रही है, उदाहरण के तौर पर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनसÓ योजना के तहत, सिंगल विंडो सिस्टम बनाया गया है, ताकि एक ही जगह से सभी जरूरी स्वीकृतियां प्राप्त की जा सकें। इन्वेस्ट एम.पी. पोर्टल ने इस प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है, जिससे समय की बचत भी हो रही है और जवाबदेही तय करने में भी मदद मिल रही है। मध्यप्रदेश सरकार ने कुछ सेक्टरों को संभावनाओं के आधार पर प्राथमिकता पर भी रखा है जैसे- टैक्सटाइल उद्योग -जो कि प्राथमिकता पर इसलिए रखा गया है ताकि नए निवेश से इस सेक्टर को और मजबूती मिल सके। मध्यप्रदेश प्रसिद्ध है अपने चंदेरी कॉटन, महेश्वरी सिल्क साडिय़ों और सिल्क टैक्सटाइल के लिए। प्रदेश में इस समय 60 बड़ी टैक्सटाइल मिलें हैं। इसके अलावा हजारों लूम और स्पिंडल भी यहां काम कर रहे हैं। ये सभी बड़े पैमाने पर युवाओं को रोजगार दे रहे हैं। प्रदेश सरकार ने टैक्सटाइल उद्योग को कई नए सहायता पैकेज देने की भी घोषणा की है, ये मदद उन घोषणाओं के अलावा है, जो कि दूसरे उद्योगों के लिए की गई हैं। बड़े सेक्टरों के अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने लघु और छोटी इकाइयों के लिए जमीन के इस्तेमाल के नियमों को भी सरल बनाया है और लालफीताशाही को कम किया है। छोटी जमीनों को सब-लीज करने और इस्तेमाल के लिए हस्तांतरण को अब सरल कर दिया गया है। जमीन के विवादों का जल्दी हल निकालने के लिए प्रदेश सरकार ने ‘माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज फेसिलीटेशन काउंसिलÓ भी स्थापित किया है।
राज्य सरकार ने ‘मध्यप्रदेश इन्क्यूबेशन और स्टार्टअप पॉलिसीÓ को शुरु किया, ताकि स्टार्टअप्स को प्रदेश में प्रोत्साहित किया जा सके। फंडिंग के अलावा दूसरी जरूरी मदद, इन्क्यूबेशन सेंटर भी ‘प्लग-एंड-प्लेÓ सेंटर के तौर पर काम करते हैं, ताकि स्टार्टअप बिना बड़े निवेश के अपनी अलग-अलग जरूरतों के बावजूद काम आसानी से शुरु कर सकें। इसके अलावा अब दो नए अत्याधुनिक, 200 सीटों वाले स्टार्टअप इन्क्यूबेटर बनाने की भी घोषणा की गई है। सरकार की योजना 60 इन्क्यूबेटर पार्टनर नेटवर्क बनाने की भी है, साथ ही 60 करोड़ रुपए का सीड-फंड और निवेश-फंड घोषित किया गया है, ताकि स्टार्टअप्स को आर्थिक मदद दी जा सके।
विशेष सत्रों का शेड्यूल जारी
भोपाल। राज्य शासन द्वारा इंदौर में आयोजित किये जा रहे मैग्नीफिसेंट एमपी-2019 के अंतर्गत 18 अक्टूबर के विशेष सत्रों का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। पहला सत्र दोपहर ढाई बजे से साढ़े तीन बजे तक तथा दूसरा सत्र शाम 4 से 5 बजे तक आयोजित किया जाएगा। मैग्नीफिसेंट एमपी में दोपहर ढाई से साढ़े तीन बजे तक ट्यूलिप हॉल में अर्बन मोबिलिटी एवं रियल एस्टेट, मेपल हॉल में एमपी एज ए लॉजिस्टिक हब, ऑर्चिड हॉल में इण्डस्ट्री 4.0 एमपी द इमर्जिंग इनोवेशन हब और लिलक हॉल में एमपी एज द इमर्जिंग फार्मास्युटिकल्स डेस्टिनेशन विषय पर विशेष सत्र होगा। ट्यूलिप हॉल के लिये श्रीनिवासन जैन, मेपल हॉल के लिये सुश्री स्मिता शर्मा, ऑर्चिड हॉल के लिये संजय पुगालिया तथा लिलक हॉल के लिये सुश्री रूचि भाटिया, मीडिया मॉडरेटर होंगे। इसी प्रकार ट्यूलिप हॉल के सत्र के लिये प्रमुख सचिव संजय दुबे, मेपल हॉल के लिये मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती, ऑर्चिड हॉल के लिये प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी तथा लिलक हॉल के सत्र के लिये प्रमुख सचिव सुश्री पल्लवी जैन गोविल समन्वयक रहेंगे।
सत्र के वक्ता इस प्रकार होंगे- ट्यूलिप हॉल में निरंजन हीरानंदानी एमडी हीरानंदानी ग्रुप, एन. श्रीनिवासन वॉइस चैयरमेन एवं मैनेजिंग डॉयरेक्टर इंडिया सीमेन्ट्स तथा अन्टोनी डिसा चैयरमेन रैरा। मेपल हॉल में सचिन भानुशाली सीईओ गेटवे डिस्ट्रीपार्क, गौरव तनेजा नेशनल लीडर अर्नेस्ट एंड यंग एलएलपी तथा प्रणव अडानी, एमडी अडानी विल्मर। आर्चिड हॉल में वक्ता इस प्रकार होंगे अमिताभ कांत सीईओ नीति आयोग, सुश्री देवजानी घोष प्रेसीडेंट नैस्कॉम एवं तेजबॉटला वीपी एवं हेड गवर्नमेंट बिजनेस, टीसीएस। लिलक हॉल में वक्ता निम्नानुसार होंगे- डॉ. मंदीप कुमार भण्डारी संयुक्त सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, डॉ. बंगारूराजन संयुक्त औषधि नियंत्रक एफडीए, दिलीप संघवी एमडी सन फार्मा, वरूण गैरा सीईओ मेसर्स हेल्थ एस्योर तथा परीक्षित सेठी डायरेक्टर मेसर्स हर्बल ड्रीम्स इंदौर।
रिन्यूएबल एनर्जी पर केन्द्रित सत्र शाम 4 से 5 बजे तक निम्नानुसार आयोजित होगा- ट्यूलिप हॉल में सुश्री निधि राजदान, मेपल हॉल में सुश्री शुतापा पॉल, आर्चिड हॉल में सुश्री निशा पोद्दार तथा लिलक हॉल में सुश्री स्वाति खण्डेलवाल मीडिया मॉडरेटर की भूमिका निभाएंगी। समन्वयक- ट्यूलिप हॉल में अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान, मेपल में प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव, ऑर्चिड हॉल में अपर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस तथा लिलक हॉल में सचिव फैज अहमद किदवई। सत्र में वक्ता निम्नानुसार होंगे- ट्यूलिप हॉल में राजेन्द्र गुप्ता चैयरमेन ट्राईडेन्ट, श्रेयस्कर चौधरी एमडी प्रतिभा सिन्टेक्स, शिवा गनपति एमडी गोकलदास एक्सपोर्ट्स तथा सुधीर धींगरा एमडी ओरियन्ट क्राफ्ट।
मेपल हॉल में डॉ. रमेश कीमाल सीमेन्स गमेसा, सुमन्त सिन्हा एमडी रिन्यु पॉवर और सुनील जैन सीईओ हीरो फ्यूचर इनर्जीज वक्ता होंगे। इसी प्रकार ऑर्चिड हॉल में चितरंजन डार सीईओ आईटीसी फूड डिवीजन, अशोक शर्मा एमडी एवं सीईओ महिन्द्रा एग्री तथा रोहित भाटला एमडी कगोम फूड्स इंडिया लिमिटेड वक्ता रहेंगे। लिलक हॉल में अरूण नंदा चैयरमेन महिन्द्रा हॉलिडेज तथा नकुल आनंद एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर आईटीसी होटल्स वक्ता होंगे।
18 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे तक विशेष सत्र आयोजित होंगे। इनमें टेक्सटाईल एंड गारमेंट, स्टिचिंग फॉर यंग इंडिया, एमपी रिपॉवरिंग द कन्ट्री, अपारच्युनिटीज इन न्यू एण्ड, रिन्यूऐबल एनर्जी, फीडिंग इंडिया, अपारच्युनिटीज इन फूड प्रोसेसिंग तथा टूरिज्म अपारच्युनिटीज इन एमपी इनमें शामिल हैं।
विषय की भूमिका के लिये 5 मिनिट, एसीएस/पीएस द्वारा प्रदेश में सेक्टरवाइस संभावनाओं के प्रस्तुतीकरण के लिये 10 मिनिट, वक्ताओं के लिये 35 मिनिट और प्रश्नोत्तर के लिये 10 मिनिट का समय निर्धारित किया गया है। विशेष सत्र समाप्त होने के बाद हाईटी का आयोजन किया जायेगा। तत्पश्चात शाम 7 से रात 9.30 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।