सुनील कुजूर का आदेश लटका, मोहंती को नहीं चाहिए सेवावृद्धि


छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव की 6 महीने की सेवावृद्धि वाली फाइल को मिली हरी झंडी, लेकिन

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती (1982) और छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव सुनील कुजूर (1986) को 6-6 महीने की सेवावृद्धि दी जा सकती है, इस मुद्दे को लेकर नई दिल्ली में भारत सरकार के कार्मिक विभाग में (डीओपीटी) मंथन का दौर चल रहा है। छत्तीसगढ़ के नए राज्य बनने के बाद 18 साल में पहली बार कोई पहला मुख्य सचिव सुनील कुजूर एक ऐसे नौकरशाह हैं, जिनके बारे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्य सचिव बनाते समय ही राय जाहिर कर दी थी कि उन्हें 6 महीने की सेवावृद्धि के लिए तैयार रहना होगा। सूत्र बताते हैं कि सुनील कुजूर ने अपनी ओर से यह कभी नहीं कहा कि उन्हें 6 महीने की सेवावृद्धि दी जाए, लेकिन आदिवासी एवं पिछड़ी जाति के बाहुल्य वाले राज्य छत्तीसगढ़ में पहली बार आदिवासी मुख्य सचिव की उपस्थिति से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महसूस किया कि जितना अधिक समय सुनील कुजूर को काम करने के लिए मिलेगा, उतना आदिवासी-पिछड़ा वर्ग की आबादी का संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सकेगा। इसी के अवधारणा के चलते सुनील कुजूर के सेवानिवृत्त होने के 6 महीने पहले ही छत्तीसगढ़ सरकार ने डीओपीटी नई दिल्ली को पत्र लिखकर अनुरोध कर दिया था कि छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को 6 महीने की अतिरिक्त सेवावृद्धि दे दी जाए। सूत्रों का मानना है कि कुजूर की फाइल को कार्मिक विभाग ने हरी झंडी तो दे दी है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव ने यह टीप लगाकर कि चूंकि छत्तीसगढ़ राज्य में किसी तरह का चुनाव वर्तमान में प्रचलित नहीं है, इसलिए सेवावृद्धि के औचित्य पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। यदि मुख्यमंत्री के अनुरोध को प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया तो यह बात तय है कि कुजूर को 6 महीने की सेवावृद्धि अवश्य मिलेगी। खबर लिखने तक किसी भी तरह के आदेश की पुष्टि नहीं हुई है। बताया जाता है कि आगामी 31 अक्टूबर को सेवावृद्धि नहीं मिलने की स्थिति में कुजूर सेवानिवृत्त हो जाएंगे, इसलिए नए मुख्य सचिव के रूप में 1987 बैच के अतिरिक्त मुख्य सचिव आरपी मंडल और अतिरिक्त मुख्य सचिव सीके खेतान दोनों के मामले में एक तराजूनुमा विश्लेषण का दौर आज चालू कर दिया गया है।
सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री स्वयं जब छत्तीसगढ़ के नए मुख्य सचिव की चर्चा अपने सलाहकारों से करते हैं तो कभी मंडल का हिस्सा झुका ज्यादा रहता है तो कभी खेतान का पलड़ा झुक जाता है। यदि कुजूर की सलाह पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के नए मुख्य सचिव का फैसला किया तो छत्तीसगढिय़ा मानसिकता को प्राथमिकता मिलेगी, ऐसा लिखने में संदेह नहीं है। दूसरी ओर जहां तक सवाल है मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव का, सुधिरंजन मोहंती ऐसे मुख्य सचिव हैं, जिन्होंने मध्यप्रदेश में अपने सेवाकाल की सबसे लंबी पारी खेली है। बालाघाट, सतना और बाद में इंदौर कलेक्टर के रूप में तत्कालीन मुख्य सचिव एनएस सेठी के चहेते बनकर रोगी कल्याण समिति का मॉडल प्रस्तुत किया और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजे गए। उसके बाद आयुक्त जनसंपर्क और औद्योगिक विकास निगम मध्यप्रदेश के प्रबंंध संचालक के रूप में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के चहेते नौकरशाहों में नंबर वन साबित हुए। सेंट स्टीफन नई दिल्ली से अर्थशास्त्र में स्नातक और अहमदाबाद आईआईएम से एमबीए करने के बाद 1983 में छत्तीसगढ़ अंचल के ही सरगुजा जिले में सहायक कलेक्टर बने, मोहंती ने संपूर्ण जटिलताओं और संघर्ष के बाद मुख्य सचिव की कुर्सी तक अपना सफर तय किया है। भारतीय जनता पार्टी की 15 सालों की सरकार में सबसे ज्यादा तकलीफ उठाने वाले मोहंती ने कभी सोचा नहीं था कि उन्हें मुख्य सचिव की कुर्सी से नवाजा जाएगा, लेकिन इकबाल बुलंद हो, तकदीर का ताला खुल जाए तो सुधिरंजन मोहंती ने मुख्य सचिव बनकर लंबे समय से मुख्य सचिव की कुर्सी की दौड़ में शामिल 1985 बैच के कई नौकरशाहों के इकबाल बुझा दिए। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने एक दिन सुधिरंजन मोहंती से सवाल पूछा कि क्या वे भी 6 महीने की अतिरिक्त सेवावृद्धि के पक्ष में हैं तो मोहंती ने दो-टूक शब्दों में स्पष्ट किया 36 साल की नौकरी के बाद अब मन नहीं करता कि मुझे कुछ और शासकीय सेवा में रहना है। उनका मत था कि जो योग्य नौकरशाह लाइन में खड़े हैं, उन्हें मौका मिलना चाहिए, मुझे सेवावृद्धि नहीं चाहिए। उन्होंने आगे जोड़ा परिवार एवं बच्चों के साथ देश-विदेश घूमेंगे, फोटो-शोटो खिंचवाएंगे और जिंदगी नए अंदाज में जीएंगे। जब मोहंती से यह पूछा गया कि आपके बाद क्या गोपाल रेड्डी का नंबर है तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा यह सवाल मुख्यमंत्री जी से पूछिए।
विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।