राम मंदिर अयोध्या में बनेगा, लेकिन देश में अमन-चैन का मंदिर टूटना नहीं चाहिए


मेरी यह संपादकीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री कमलनाथ को समर्पित है

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को मैं याद दिलाना चाहता हूं कि हिंदू कार सेवकों द्वारा १९९२ में ६ दिसंबर की तारीख को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत के लिए जो कुछ हुआ था, वह देश की जनता के दिल में हिंदू और मुसलमानों के बीच में नफरत पैदा करने का पर्याय बन गया था, जबकि सच यह है कि हिंदू अपनी जगह सही थे और मुसलमान अपनी जगह। लेकिन अयोध्या में मंदिर के निर्माण को लेकर महंतों के अखाड़ों ने धमाल मचा दिया और वही धमाल बेवजह १९९२ में उत्पात का कारण बना और मुसलमान भी पीछे नहीं रहे। जिसे याद करते हुए हिंदुस्तानी चाहे वह हिंदू या मुसलमान उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मंदिर निर्माण को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को मुस्लिम लॉ बोर्ड ने नहीं माना और मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। संभवत: शनिवार को प्रात: १०.३० बजे मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ में वह ऐतिहासिक फैसला आने वाला है, जिससे हो सकता है हिंदुओं के राम मंदिर बनाने का सपना पूरा हो जाए और मुसलमानों के अरमानों को कोई नुकसान न हो, क्योंकि भारत की सवा सौ करोड़ जनता इस मसले को लेकर ५ न्यायाधीशों के फैसले को पंच परमेश्वर का फैसला मानने को तैयार है। सवाल उठता है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की राजनीतिक और प्रशासनिक सूझ-बूझ जब-जब अग्नि परीक्षा के दौर से गुजरेगी, तब वे अपनी जुबान पर किन शब्दों का इस्तेमाल करेंगे, क्योंकि हम मध्यप्रदेश के पत्रकार हैं, मध्यप्रदेश के बारे में सबसे पहले सोचते हैं, इसलिए हमने इस संपादकीय में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को प्रमुखता से स्थान दिया है। पाठक चाहे तो मुख्यमंत्री कमलनाथ के चेहरे में भारत के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को देख सकते हैं और जिस तरह राजनीतिक परिपक्वता के आधार पर कमलनाथ सुलझे और सधे हुए शब्दों का उपयोग करते हैं, वैसा ही समय अब सभी मुख्यमंत्रियों के लिए आ गया है। सबको अपने-अपने राज्यों में इस बात की चिंता करनी होगी, गली-गली और गांव-गांव में भी मुहल्ले स्तर तक किसी भी असामाजिक तत्व द्वारा उत्पात फैलाने का संदेह हो तो उसे जेल में डाल दिया जाए। मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तो दुबई से लौटने के बाद सबसे पहले राज्य के मुख्य सचिव को यह निर्देश दिया कि किसी भी कीमत पर मप्र की जनता का अमन चैन कायम रहना चाहिए। इसी का परिणाम है कि मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती ने संपूर्ण सावधानी बरत ली है। एक संपादक होने के नाते मेरे मन में यह सवाल उठता है कि राम का मंदिर अयोध्या में ही बनेगा या फिर मस्जिद को लेकर मुसलमानों की जिद पूरी हो जाएगी तो क्या भारत यहीं रूक जाएगा? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी बार-बार कहते हैं, भारत विश्व गुरू बनने की ओर अग्रसर है, महाशक्ति के रूप में दुनिया का नम्बर-१ देश बनेगा तो फिर इस बात की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता कि अयोध्या में राम मंदिर बने, हमें खुशी होगी, लेकिन देश के सवा सौ करोड़ भारतवासियों के मन जो अमन चैन का मंदिर है, वह टूटना नहीं चाहिए, चाहे इसके लिए जो भी कदम उठाना पड़े, केन्द्र अपने स्तर पर उठाए और राज्यों को मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ की तरह उठाना ही पड़ेगा।

विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।