भगवान राम को मिला मालिकाना हक


सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

राम मंदिर बनाऐगी सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीन का बंटवारा नहीं होगा, विवादित जमीन रामलला को दी जाएगी, मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में किसी अन्य खास जगह पर पांच एकड़ जमीन मस्जिद निर्माण के लिए दी जाएगी।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या केस में ऐतिहासिक फैसला सर्वसम्मति यानी 5-0 से सुनाया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर बनेगा। विवादित जमीन रामलला को दी जाएगी। मुस्लिम पक्ष अपने साक्ष्यों से यह सिद्ध नहीं कर पाए कि विवादित भूमि पर उनका ही एकाधिकार था। मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में किसी अन्य जगह मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन दी जाएगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जमीन के बंटवारा का आदेश गलत था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार 3 महीने के भीतर एक स्कीम बनाकर एक ट्रस्ट का गठन करेगी जो मंदिर बनवायेगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि इससे जुड़ी जो बाकी याचिकाएं हैं, वो खारिज की जाती हैं। ष्टछ्वढ्ढ ने रामलला के वकील के पराशरण और सी एस वैद्यनाथन, हरिशंकर जैन की सराहना की।
कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज कर दी। चीफ जस्टिस ने कहा कि मीर बाकी ने बाबर के वक्त बाबरी मस्जिद बनवाई थी। 1949 में दो मूर्तियां रखी गईं। बाबरी मस्जिद को गैर-इस्लामिक ढांचे पर बनाया गया। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। पुरातत्व विभाग (्रस्ढ्ढ) की रिपोर्ट से साबित होता है कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। ्रस्ढ्ढ की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता। खुदाई में इस्लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले। अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरे की पूजा हिंदू करते थे। कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं की ये आस्था कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ है, इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि 1885 से पहले राम चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार था। अहाते और चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार साबित होता है। 18वीं सदी तक नमाज पढ़े जाने के सबूत नहीं हैं। सीता रसोई की भी पूजा अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू करते थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का जो फैसला दिया वो तार्किक नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़े का सूट मेनटेबल नहीं है। यह सेवियत राइट के खिलाफ है। उन्हें शेबेट के अधिकार प्राप्त नहीं हैं। देवता न्यायिक व्यक्ति होता है। मूर्ति भी न्यायिक व्यक्ति होती है। मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि दोनों पक्ष पूजा करते थे। सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित क्षेत्र पर अपना मालिकाना हक और प्रतिकूल कब्जा साबित करने में नाकाम रहा है।
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की क्या थीं दलीलें
मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई
हिंदू पक्ष ने नक्शों, तस्वीरों और पुरातात्विक सबूतों के जरिये ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा बनने से पहले वहां भव्य मन्दिर था। मन्दिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया गया था। कोर्ट में पेश किए फोटोग्राफ के जरिये कहा गया था कि विवादित इमारत हिंदू मंदिर के 14 खंभों पर बनी थी। इन खंभों में तांडव मुद्रा में शिव, हनुमान कमल और शेरों के साथ बैठे गरुड़ की आकृतियां हैं।

  • विवादित जगह पर दो हजार साल पहले भी मन्दिर
    हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि विवादित स्थान पर आज से 2 हजार साल पहले भी भव्य राम मंदिर था। मंदिर के ढांचे के ऊपर ही विवादित इमारत को बनाया गया था। प्राचीन मंदिर के खंभों और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल भी विवादित ढांचे के निर्माण में किया गया।
  • श्रीराम जन्मस्थान को लेकर अटूट आस्था
    हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि जिस जगह का यहां मुकदमा चल रहा है। करोड़ों लोगों की आस्था है कि वही भगवान राम का जन्म स्थान है। सैकड़ों साल से यहां पूजा-परिक्रमा की परंपरा रही है। करोड़ों लोगों की इस आस्था को पहचानना और उसे मान्यता देना कोर्ट की जिम्मेदारी है।
  • रामलला की मूर्ति रखे जाने से बहुत पहले से श्रीराम की पूजा
    विवादित ढांचे के मूर्ति रखे जाने बहुत पहले से ही राम की पूजा होती रही है। किसी जगह को मंदिर के तौर पर मानने के लिए वहां मूर्ति होना ज़रूरी नहीं है। हिन्दू महज किसी एक रूप में ईश्वर की आराधना नहीं करते। केदारनाथ मंदिर में शिला की पूजा होती है। पहाड़ों की भी देवरूप में पूजा होती है। चित्रकूट में होने वाली परिक्रमा का उदाहरण दिया गया था।
  • इस्लामिक सिद्धान्तों के मुताबिक भी विवादित ढांचा वैध मस्जिद नहीं
    हिंदू पक्ष ने इस्लामिक नियमों का हवाला देकर ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा मस्जिद नहीं हो सकती। कहा गया था कि किसी धार्मिक स्थान के ऊपर जबरन बनाई गई। इमारत शरीयत के हिसाब से भी मजिस्द नहीं मानी जा सकती। उस इमारत में मस्जिद के लिए ज़रूरी तत्व भी नहीं थे। इस्लामिक विद्वान इमाम अबु हनीफा का कहना था कि अगर किसी जगह पर दिन में कम से कम दो बार नमाज पढऩे के अजान नहीं होती तो वो जगह मस्जिद नहीं हो सकती। विवादित इमारत में 70 साल से नमाज नहीं पढ़ी गई है। उससे पहले भी वहां सिर्फ शुक्रवार को नमाज हो रही थी।
    -रामलला विराजमान और श्रीरामजन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा
    हिंदू पक्ष ने श्रीरामजन्मस्थान को भी न्यायिक व्यक्ति होने के समर्थन में दलीलें रखीं थी। कहा था कि पूरा रामजन्मस्थान ही हिंदुओं के लिए देवता की तरह पूजनीय है। किसी जगह को मन्दिर साबित करने के लिए मूर्ति की मौजूदगी जरूरी नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास ही किसी जगह को मन्दिर बनाते हैं। श्रीरामजन्मस्थान को लेकर तो लोगों की आस्था सदियों से अटूट रही है। मंदिर में विराजमान रामलला कानूनी तौर पर नाबालिग का दर्जा रखते हैं। नाबालिग की संपत्ति किसी को देने या बंटवारा करने का फैसला नहीं हो सकता।
    -पुरातत्व सबूतों, धार्मिक ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के लेख का हवाला
    हिंदू पक्षकारों की ओर मन्दिर की मौजूदगी को साबित करने के लिए पुरातत्व सबूतों, धार्मिक ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के लेख और पुरातात्विक सबूतों, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड का हवाला दिया गया था। इसके अलावा हिंदू पक्ष ने विवादित जगह पर मन्दिर की मौजूदगी को साबित करने के लिए अयोध्या जाने वाले विदेशी यात्रियों जोसेफ टाइफेनथेलर, मोंटगोमरी मार्टिन के यात्रा संस्मरणों, डच इतिहासकर हंस बेकर और ब्रिटिश टूरिस्ट विलियम फिंच की पुस्तकों का भी हवाला दिया था।
    -12वीं सदी का शिलालेख
    सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अहम सबूत के तौर पर 12वीं सदी के शिलालेख का हवाला दिया था। हिन्दू पक्ष की ओर से पेश वकील ने कहा कि पत्थर की जिस पट्टी पर संस्कृत का ये लेख लिखा है। उसे विवादित ढांचा विध्वंस के समय एक पत्रकार ने गिरते हुए देखा था। इसमें साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम है। साथ ही लिखा है कि ये विष्णु मंदिर में लगी थी।
  • आठवीं सदी के ग्रंथ स्कंद पुराण का हवाला
    हिंदू पक्ष ने अपनी दलील के समर्थन में आठवीं सदी के ग्रंथ स्कंद पुराण का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि बाबरी मस्जिद के 1528 में वजूद में आने से बहुत पहले स्कंद पुराण लिखा गया था। इस पुराण में भी अयोध्या का श्रीरामजन्मस्थान के रूप में जिक्र है और हिंदुओं का ये अगाध विश्वास रहा है कि यहां दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • विवादित ढांचे के नीचे ईदगाह नहीं
    हिंदू पक्ष ने विवादित ढांचे के नीचे ईदगाह होने की मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरो?ा की दलीलों को खारिज कर दिया था। हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि जिसे मुस्लिम पक्ष ईदगाह की दीवार बता रहा है, उसके ऊपर छत होने के भी सबूत मिले है।ईदगाह पर छत नही होती। वहां सिर्फ एक दीवार नहीं, बल्कि हॉलनुमा ढांचा था।
  • बाबर जैसे आक्रमणकारी को गौरवशाली इतिहास खत्म करने की इजाजत नहीं
    बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारी को हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास को खत्म करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अयोध्या में राम मंदिर को विध्वंस कर मस्जिद का निर्माण एक ऐतिहासिक गलती थी,जिसे सुप्रीम कोर्ट को अब ठीक करना चाहिए। अकेले अयोध्या में ही 50-60 मस्जिद हैं, मुसलमान किसी और मस्जिद में भी इबादत कर सकते हैं, पर हिन्दुओं के लिए तो ये जगह उनके आराध्य श्रीराम का जन्मस्थान है, हम ये जगह नहीं बदल सकते।
  • सुन्नी वक्फ बोर्ड को दावा करने का हक नहीं
    मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि 1949 में विवादित इमारत में रामलला की मूर्ति पाए जाने के बाद 12 साल तक दूसरा पक्ष निष्क्रिय बैठा रहा। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 1961 में जाकर मुकदमा दायर किया। ऐसे में केस दायर करने की समयसीमा पार करने के चलते उन्हें कानूनन दावा करने का हक नहीं।
  • अंग्रेजों के आने के बाद मुस्लिमों को शह मिली
    हिंदू महासभा की ओर से विष्णु शंकर जैन ने कहा था कि 1528 से लेकर 1855 तक वहां मस्जिद की मौजूदगी को लेकर कोई मौखिक /दस्तावेजी सबूत नहीं। अंग्रेजों के आने के बाद से विवाद की शुरुआत हुई। हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीन गया, मुसलमानों को विवादित ज़मीन पर शह मिली।
  • मुस्लिम गवाहों के बयान का हवाला
    हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश कई मुस्लिम गवाहों के बयान के हिस्सों का भी हवाला दिया था।रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा था कि इन मुस्लिम गवाहों ने खुद माना है कि जिस जगह को मुस्लिम लोग बाबरी मस्जिद कहते हैं वो हिन्दुओं द्वारा जन्मभूमि के तौर पर जानी जाती है और यहां सदियों से पूजा- परिक्रमा की भी परंपरा रही है।

आज का दिन ऐतिहासिक, अब देश निर्माण की बारी : नरेन्द्र मोदी

नई दिल्ली। अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा, आज सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे महत्वपूर्ण मामले पर फैसला सुनाया है, जिसके पीछे सैकड़ों वर्षों का इतिहास है। कुछ लोगों की इच्छा थी कि रोजाना सुनवाई हो, वैसा हुआ। आज फैसला आया है। दशकों चली न्याय प्रक्रिया का समापन हुआ है। अब हमें आगे ही आगे बढ़ते जाना है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है, अब देश के हर नागरिक पर देश निर्माण का दायित्व बढ़ गया है। पीएम ने आज के दिन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आज के दिन ही बर्लिन की दीवार गिराकर दो विचारधाराएं एक रास्ते पर आ गईं थीं। उन्होंने साथ ही कहा कि आज ही के दिन करतारपुर कॉरिडोर का भी उद्घाटन हुआ। पीएम ने देश के लोगों से कहा अब हर नागरिक पर न्यू इंडिया के निर्माण की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

फैसला सर्वसम्मति से आना खुशी की बात…
उन्होंने कहा कि भारत के न्यायपालिका के इतिहास में भी आज का दिन स्वर्णिम अध्याय की तरह है। इस विषय पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सबको सुना और बहुत धैर्य से सुना। पूरे देश के लिए खुशी की बात है कि यह फैसला सर्वसम्मति से आया है। एक नागरिक के नाते हम सब जानते हैं कि परिवार में छोटा मसला सुलझाने के लिए भी दिक्कत होती है, ये कार्य सरल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के पीछे दृढ़ इच्छा शक्ति के दर्शन कराए हैं। देश के न्यायधीश, न्यायालय और हमारी न्याय प्रणाली आज विशेष रूप से अभिनंदन के अधिकारी हैं।

पीएम ने कहा, आज 9 नवंबर है। आज के दिन बर्लिन की दीवार गिरी थी। दो विपरीत धाराओं ने एकजुट होकर नया संकल्प लिया था। आज 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत हुई है। इसमें भारत और पाकिस्तान का भी सहयोग रहा है। आज अयोध्या पर फैसले के साथ ही 9 नवंबर की यह तारीख हमें साथ रहकर आगे बढऩे की सीख भी दे रही है। आज के दिन का संदेश जोडऩे, जुडऩे और मिलकर साथ चलने का है। किसी के मन में कोई कटुता रही हो तो यह उसे खत्म करने का भी दिन है। नए भारत में भय, कटुता और नकारात्मका का कोई स्थान नहीं है।

अब न्यू इंडिया की जिम्मेदारी बढ़ी
पीएम ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला नया सवेरा लेकर आया है। इस विवाद का भले ही कई पीडयि़ों पर असर पड़ा हो, लेकिन इस फैसले के बाद हमें संकल्प करना होगा कि अब नई पीढ़ी अब नए सिरे से न्यू इंडिया के निर्माण में जुटेगी। आइए, अब एक नई शुरुआत करते हैं। नए भारत का निर्माण करते हैं। हमें अपने विकास इस बात से तय करना है कि मेरे साथ चलने वाला कहीं मुझसे पीछे तो नहीं छूट रहा है। हमें सबको साथ लेकर, सबका विकास करते हुए और सबका विश्वास हासिल करते हुए आगे ही बढ़ते जाना है। पीएम मोदी ने कहा, राम मंदिर के निर्माण का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। अब देश के हर नागरिक पर राष्ट्र निर्माण का जिम्मेदारी बढ़ गई है। एक नागरिक के तौर पर हम सभी के लिए देश की न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना, नियमों का सम्मान करना, ये दायित्व भी पहले से अधिक बढ़ गया है। अब समाज के नाते हर भारतीय को अपने कर्तव्य को, अपने दायित्व को पूरा करना होगा।

चुनौती देने का कोई विचार नहीं

अयोध्या फैसले का यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने किया स्वागत कहा-

यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के पक्षकार रहे यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने कहा कि वह इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगा। बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूकी ने कहा कि वह न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हैं और बोर्ड का इस फैसले को चुनौती देने का कोई विचार नहीं है। फारूकी ने कहा कि 5 एकड़ जमीन लेने को लेकर बोर्ड के मेंबर के साथ बातचीत के बाद फैसला लिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा, हमें सुप्रीम कोर्ट का फैसला मान्य है। फैसले से पहले सभी का कहना था कि कोर्ट का फैसला मान्य होगा। इसलिए अब अगर कोई रिव्यु पेटिशन की बात करता है तो यह गलत होगा। दिल्ली में जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा, हम हमेशा से कहते रहे हैं कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करेंगे। मुझे विश्वास है कि देश अब विकास की ओर बढ़ेगा। जहां तक रिव्यू पिटिशन दाखिल करने की बात है तो मैं इससे सहमत नहीं हूं। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, हम विनम्रतापूर्वक सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करते हैं, मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुसलमानों ने और बड़े लोगों ने इस फैसले को स्वीकार किया और विवाद अब समाप्त हो गया है।

चुनौती देने का..
हालांकि फैसले पर रिव्यु पेटिशन उनका (मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड) अधिकार है, मुझे लगता है कि मामला अब खत्म होना चाहिए।
कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
आपको बता दें कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से ऐतिहासिक फैसला सुनाया। निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही पक्षकार माना। टॉप कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को अतार्किक करार दिया। आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया।
सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन दे सरकार : कोर्ट
कोर्ट ने साथ में यह भी आदेश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ जमीन दी जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाए। इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को भी प्रतिनिधित्व देने को कहा है।

फैसले को हर पंथ ने खुले दिल से स्वीकारा
करीब 11 मिनट के अपने संबोधन में पीएम ने कहा, पूरी दुनिया मानती है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, आज दुनिया ने ये भी जान लिया है कि भारत का लोकतंत्र कितना जीवंत और मजबूत है। फैसला आने के बाद जिस तरह हर वर्ग, हर समुदाय, हर पंथ और पूरे देश ने खुले दिल से इसे स्वीकार किया है, वह भारत की पुरातन संस्कृति, परंपराओं और सद्भाव की भावना को दिखाता है। पीएम ने कहा, भारत जिसके लिए जाना जाता है, और हम गर्व से उल्लेख भी करते हैं, वह है विविधता में एकता। विविधता में एकता का मंत्र अपने पूर्णता के साथ खिला हुआ नजर आता है। हजारों साल बाद भी किसी को विविधता में एकता भारत के इस प्राण तत्व को समझना हो तो वह आज के दिन का जरूर उल्लेख करेगा। घटना इतिहास के पन्नों से उठाई हुई नहीं है। सवा सौकरोड़ लोग खुद इतिहास रच रहे हैं।

आंदोलन से जुडऩा सौभाग्यपूर्ण : आडवाणी
लाल कृष्ण आडवाणी ने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बेहद खुशी जाहिर की है। उन्होंने ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच द्वारा अयोध्या मामले पर दिए गए फैसले का स्वागत करने में मैं भी देशवासियों के साथ हूं। उन्होंने कहा, मैं अपने आप को धन्य महसूस करता हूं। उन्होंने आगे कहा कि अब क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है, तो ऐसे में अब समय आ गया है कि हम सब सभी विवादों और कटुता को पीछे छोड़ दें। सद्भाव और शांति को गले लगाएं।
हिंदू-मुस्लिम को साथ लेकर बढ़ रहा है संघ
रामजन्म भूमि के फैसले को लेकर जिस तरह कई दिनों पहले से राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोगों की मीटिंग आयोजित की उससे यह साफ संदेश जा रहा है कि संघ हिंदू-मुस्लिम को साथ लाकर अपने हिंदू राष्ट्र के सपने की तरफ बढ़़ रहा है। इसके साथ ही संघ इस कोशिश में है कि वह मुस्लिम समुदाय में नई लीडरशिप को उभारे जो उदार हो। इस कोशिश में संघ नेताओं ने कई मुस्लिम लीडर्स से मुलाकात भी की। साथ ही संघ ने अपने परिवार के भीतर गरम तेवर वाले माने जाने वाले संगठनों को भी कंट्रोल में रखा है। संघ के सीनियर नेता ने कहा कि इसे संघ के सॉफ्ट टच रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत कई मौकों पर कह चुके हैं कि भारत के मुस्लिमों के बिना हिंदू राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती।
जुनूनी जश्न के हाहाकार से बचें :नकवी
नकवी ने एक बयान में कहा, ‘दशकों पुराने अयोध्या मामले के निपटारे के लिए सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है। हम सभी को इसे तहेदिल से स्वीकार और इसका सम्मान करना चाहिए। अपने मुल्क की एकता, भाईचारे की ताकत को मजबूत करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।Ó
सद्भावना बनाए रखें : राहुल गांधी
नितिन गडकरी ने कहा कि लोगों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का शांति और अनुशासन के साथ आदर करना चाहिए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आपसी सद्भावना बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सद्भावना बनाए रखने की सराहना करते हुए बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि उनकी पार्टी उनसभी लोगों को सलाम करती है, जिसने देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक तानेबाने को एकजुट होकर संरक्षित रखा।
फैसले का स्वागत : योगी
शीर्ष अदालत ने शनिवार को अपने फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने एवं सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या के वैकल्पिक लेकिन किसी प्रमुख स्थान पर मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ भूमि आवंटित करने का आदेश दिया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए शनिवार को कहा कि देश की एकता और सद्भावना बनाए रखने में सभी सहयोग करें। उन्होंने ट्वीट किया, ‘माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत है, देश की एकता एवं सद्भाव बनाए रखने में सभी सहयोग करें। उत्तर प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सद्भाव का वातावरण बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।Ó
न्यायपूर्ण -संतुलित फैसला : जावड़ेकर
केंद्रीय मत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा जय श्री राम।Ó जावड़ेकर ने ट्वीट कर कहा, ‘अयोध्या मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय का फैसला ऐतिहासिक, न्यायपूर्ण और संतुलित फैसला है। मुझे पूरा विश्वास है कि सभी लोग इसका स्वागत करेंगे।Ó केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला दिया है, जो भारत की न्यायपालिका की गरिमा को बढ़ाने वाला है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘आज भारत की जीत हुई है।
नीतीश कुमार ने भी की अपील
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक ने लोगों से अपील की है कि वे इस मामले में और कोई विवाद पैदा नहीं करें। लोगों से शांति एवं सद्भाव बनाए रखने की अपील करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वर्षों पुराना विवाद आज समाप्त हो गया।