उनकी बातों पर न जाओ, क्या कहते हैं, उनके कदमों को देखो किधर जाते हैं ?

मंत्री अकील ने साधा केन्द्र सरकार पर निशाना, बोले, संसद में कुछ कहते हैं, मंचों पर कुछ और!
नगर प्रतिनिधि

भोपाल, 23 दिसंबर। एनआरसी और सीएए को लेकर केन्द्र सरकार के मुखिया और उनके मंत्री संसद में कुछ और कहते हैं और मंचों पर आकर घडिय़ाली आंसू बहाकर कुछ और बयानबाजियां करते हैं। इनकी कथनी और करनी का अंतर इस हद तक गहरा गया है कि संसद में एक कौम विशेष को लेकर कानून बनाने के अगुवा बन जाते हैं और बाहर आकर लोगों को कहते हैं कि किसी को डरने की कोई जरूरत नहीं है। इनमें इतनी हिम्मत है तो जो बात वे लोगों के बीच जाकर मंचों पर कह रहे हैं, वही बात सदन का विशेष सत्र बुलाकर वहां कहें।
प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील ने केन्द्र सरकार के बयानों की भिन्नता को लेकर भाजपा को जमकर लताड़ा। एक खास मुलाकात में उन्होंने एक शेर के जरिए अपनी बात शुरू की, बोले, उनकी बातों पर न जाओ क्या कहते हैं, उनके कदमों को देखो किधर जाते हैं….! उन्होंने कहा कि देश में इस समय जो हालात बने हैं, वह भाजपा की दोहरी बातों का ही नतीजा है। उन्होंने कहा कि किसी बात की, किसी भी शख्स की बर्दाश्त की एक सीमा होती है, इससे आगे जाने के बाद विरोध और आंदोलन ही सामने आता है। तीन तलाक, धारा 370 से लेकर बाबरी मस्जिद मामले तक देश की अवाम का सब्र परखा गया। जब इन सारे हालात में भी देश ने अपने धैर्य का सुबूत दे दिया तो केन्द्र की भाजपा सरकार अब उनके पैरों के नीचे का गृहमंत्री संसद में नागरिकता को लेकर कानून पारित करता है, बाहर आकर यह भी धमकाता है कि इस कानून को देश के हर राज्य को मानना ही पड़ेगा, साथ ही यह भी दोहराता है कि एक कौम खास के लोगों को इसमें परेशानियां उठाना पड़ सकती हैं। इसके विपरीत इन्हीं की पार्टी का प्रधानमंत्री मंच पर आकर इस बात को झुठलाता है कि नए कानून और कानून के संशोधन से देश के किसी नागरिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, किसी भी कौम के व्यक्ति के साथ उसके धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। अकील ने प्रधानमंत्री को चेतावनी दी कि अगर उनकी बात में सच्चाई है तो इसके लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाएं और अपनी बात स्पष्ट करें कि कानून बनाने का औचित्य क्या है और इससे किसको नफा-नुकसान होने वाला है।
कांग्रेस कर रही मुल्क और संविधान बचाने का काम
मंत्री अकील ने कहा कि प्रधानमंत्री सार्वजनिक इस बात को कहते घूम रहे हैं कि देश में जो हालात बने हैं, उसके लिए कांगे्रस जिम्मेदार है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने कानून की गलत व्याख्या कर लोगों को उकसाया है और देश की शांति व्यवस्था को दांव पर लगा दिया है। लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। कांग्रेस ने संविधान और मुल्क की संस्कृति को बचाने की मुहिम को आगे बढ़ाया है। कांग्रेस इस काम में अकेले नहीं खड़ी है, बल्कि हर वह पार्टी, हर वह धर्म, सम्प्रदाय, जाति, वर्ग और व्यक्ति उसके साथ खड़ा है, जो इस मुल्क से मुहब्बत करता है।
शांति मार्च के बाद होगी बैठक, जुटेंगे कांग्रेसी
25 दिसंबर को राजधानी में होने वाली एनआरसी और सीएए विरोधी रैली के बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक बैठक आयोजित की जाएगी। कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट मुजीब कुरैशी ने बताया कि सुबह होने वाले शांति मार्च के बाद दोपहर 3.30 बजे कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की बैठक होगी। जिसमें प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नदीम जावेद भी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस मौके पर मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन देंगे। उन्होंने प्रदेश के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को इस बैठक में शामिल होने के लिए कहा है।

इस धरती पर पैदा हुए हैं यहीं दफन भी होंगे

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने…. किसी के बाप का हिंदुस्तां थोड़े ही है, को दोहराते हुए कहा कि हमारे पूर्वज इसी जमीं पर पैदा हुए हैं, हमने भी अपनी सांसें इसी आब-ओ-हवा में ली हैं और हमारी औलादें भी इस जमीन पर पैदा हुई हैं। हमें किसी को अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत नहीं है। हम इसी धरती पर पैदा हुए हैं और यहीं दफन भी होंगे, कोई भी कानून हमसे यह अधिकार नहीं छीन सकता।

अमन चाहने वाले साथ आएं

25 दिसंबर को राजधानी के रोशनपुरा से शुरू होने वाले पैदल मार्च को लेकर आरिफ अकील ने कहा कि देश के हर उस शख्स को इसका हिस्सा बनना चाहिए, जो अमन, सुकून, भाईचारे की पैरवी करता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद इस मार्च का झंडा उठाकर चलने वाले हैं। यह मार्च किसी पार्टी, जाति या वर्ग का नहीं है, इसमें सभी को शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजधानी भोपाल ने देशभर के हालात के विपरीत संदेश देते हुए अमन और सुकून का पैगाम दिया है। बिना किसी हिंसा के अब तक यहां प्रदर्शन और विरोध हुए हैं, धारा 144 लागू होने की वजह से जो लोग अपनी आवाज बुलंद करने से रह गए हैं, वे 25 दिसंबर को आएं और अपनी बात रखें, शांतिपूर्ण तरीके से होने वाले इस आंदोलन में सभी का स्वागत है।