कैसे कुछ लोग मोटिवेशन का कारण बन जाते हैं


परीक्षा पे चर्चा: मोदी ने द्रविड़, कुंबले और लक्ष्मण का उदाहरण देते हुए बताया-
नई दिल्ली, 20 जनवरी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोोमवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ‘परीक्षा पे चर्चा 2020Ó कार्यक्रम में शामिल हुए। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से उन्होंने एक घंटा 52 मिनट बात की। देशभर के स्कूल छात्रों ने मोदी से परीक्षा, लक्ष्य, जीवन की चुनौतियों को लेकर सवाल किए। प्रधानमंत्री ने चंद्रयान-2 की नाकामी का जिक्र करते हुए कहा कि विफलता दिखाती है कि आप सफलता की ओर बढ़ गए। मोदी ने राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और अनिल कुंबले के उदाहरण से समझाया कि कैसे उनके खेल ने बाकी खिलाडिय़ों को मोटिवेट कर दिया। 2020 केवल नया साल नहीं, बल्कि नए दशक की शुरुआत है। इस दशक में देश जो भी करेगा, उसमें 10वीं-12वीं के छात्रों का सबसे ज्यादा योगदान होगा। देश नई ऊंचाइयों को पाने वाला बने, नई सिद्धियों के साथ आगे बढ़े। यह सब इस पीढ़ी पर निर्भर करता है। अगर कोई मुझे कहे कि सारे इतने कार्यक्रमों के बीच कौन सा कार्यक्रम दिल के करीब है, तो वह है परीक्षा पर चर्चा। मुझे अच्छा लगता है कि जब इसकी तैयारी होती है, तब युवा क्या सोच रहा है, इस बात को मैं महसूस कर सकता हूं।
असफलता के आगे ही सफलता
जीवन में शायद ही कोई व्यक्ति हो, जिन्हें नाकामी से गुजरना न पड़ता हो। चंद्रयान-2 के लिए हम रातभर जागे। आपका उसमें कोई कॉन्ट्रीब्यूशन नहीं था, लेकिन जब वह मिशन असफल हुआ तो आप सब डिमोटिवेट हो गए। कभी-कभी विफलता आपको परेशान कर देती है। कई लोगों ने मुझसे कहा था कि आपको उस कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए। आप जाएंगे और फेल हो गया तो क्या कहेंगे। मैंने कहा- इसलिए तो मुझे जाना चाहिए। जब आखिरी कुछ मिनट थे, तो मुझे दिखा कि वैज्ञानिकों के चेहरे पर तनाव है, परेशान हैं। मुझे लगा कि कुछ अनहोनी हो गई। थोड़ी देर बाद उन्होंने बताया तो मैंने कहा- ट्राई कीजिए। मैं बैठा हूं। मैंने वहां साइंटिस्टों के साथ बातें कीं। कुछ देर बाद होटल चला गया। मेरा सोने का मन नहीं किया। पीएमओ की टीम अपने कमरों में चली गई। आधा पौने घंटे बाद मैंने सबको बुलाया। कहा- सुबह हम इसरो थोड़ी देर से जाएंगे। सुबह मैं साइंटिस्टों से मिला। मैंने उनके परिश्रम की जितनी सराहना की जा सकती थी, की। देखा कि सिर्फ वैज्ञानिकों का नहीं, पूरे हिंदुस्तान का माहौल बदल गया। हर प्रयास में हम उत्साह भर सकते हैं। किसी चीज में विफल हुए हैं तो इसका मतलब यह है कि अब आप सफलता की ओर चल पड़े हैं।
सोच ही जीत दिलाती है
प्रधानमंत्री ने क्रिकेट मैच का उदाहरण देते हुए समझाया, 2001 में भारत-ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट मैच था। सारा माहौल डिमोटिवेशन का था। लेकिन राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण ने ऐसा खेले कि परिस्थिति को उलट दिया। उन्होंने मैच जीत लिया। जूझ जाएं तो नतीजा बदल सकता है। 2002 में वेस्टइंडीज के साथ मैच में अनिल कुंबले को जबड़े में गेंद लग गई। हम सोच रहे थे कि अनिल बॉलिंग कर पाएंगे या नहीं। अगर वे न भी खेलते तो देश उन्हें दोष न देता, लेकिन वे पट्टी लगाकर मैदान पर उतरे। उस समय ब्रायन लारा का विकेट लेना बड़ा काम माना जाता था। उन्होंने लारा का विकेट लेकर पूरा मैच पलट दिया। यानी एक व्यक्ति की हिम्मत से परिस्थितियां कैसे बदल सकती हैं। एक आदमी का संकल्प कइयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।