कर्ज अदायगी को लेकर लोग परेशान न होंने पाए

जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर सच में दुनिया की हालत सुधारनी है तो हमें केवल आर्थिक पहलू पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय जनकल्याण पर फोकस करना चाहिए। सम्मेलन इस बार विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपन्न करना पड़ा। असाधारण परिस्थितियों में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन को इस बार विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपन्न करना पड़ा। आज जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है, इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता पहली बार संसार की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मंच जी-20 पर ही देखी गई। इस मंच पर सदस्य देशों ने जो संकल्प लिए हैं, उन्हें वे पूरा कर ले गए तो कोरोना के अभिशाप से निपटने में दुनिया को इससे काफी मदद मिलेगी। कोरोना वायरस के असर से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाली मार का मुकाबला करने के लिए जी-20 देशों ने पांच ट्रिलियन डॉलर खर्च करने का फैसला किया है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए सऊदी अरब के शाह सलमान ने जी-20 के नेताओं से अपील की कि वे वैश्विक महामारी से निपटने के लिए ‘कारगर एवं समन्वित कार्यवाहीÓ की ओर बढ़ें। उन्होंने जी-20 देशों से विकासशील देशों की मदद करने का भी आग्रह किया। इतने सारे राष्ट्राध्यक्षों के विडियो संवाद का यह पहला अवसर था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, जापान के पीएम शिंजो आबे और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व खाद्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर सच में दुनिया की हालत सुधारनी है तो हमें केवल आर्थिक पहलू पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय जनकल्याण पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें इस बहस में नहीं जाना चाहिए कि कोरोना वायरस का संक्रमण कहां से या कैसे शुरू हुआ। जी-20 के सदस्य देशों को मिलकर इस वैश्विक संक्रमण को दूर करने के उपायों पर बात करनी चाहिए। भारत इस महामारी के प्रभावों से निपटने के लिए कई नीतिगत उपाय कर रहा है। शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने मुख्य ब्याज दर रेपो रेट में 0.75 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट में 0.90 प्रतिशत की कटौती घोषित की, जो एक दिन में ब्याज दरों में अभी तक का सबसे बड़ा बदलाव है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इन कदमों से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए 3.74 लाख करोड़ रुपये के बराबर अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी। सभी वाणिज्यिक बैंकों और ऋणदाता संस्थानों को छूट दी गई है कि वे किसी भी कर्ज की किस्तें तीन महीने तक न जमा होने पर भी उसे बट्टे खाते में न डालें। उम्मीद करें कि तमाम देश अपने यहां ऐसे सभी उपाय करेंगे, जिनसे घर बैठने के बावजूद लोगों का जीवन चलता रहे, वे अपनी कर्ज अदायगी को लेकर परेशान न हों, और जैसे ही महामारी काबू में आनी शुरू हो, विश्व अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की शुरुआत भी हो जाए।