आरबीआई का नारा -जल्द आयद, दुरुस्त आयद !

तीन माह बाद ईएमआई की अदायगी शुरू होगी

लेखक – डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

रिजर्व बैंक ने 1 मार्च से इसे लागू किया है तो लोन लेनेवालों को अब जून से ही ईएमआई देनी है। ध्यान देने की बात यह है कि ईएमआई माफ नहीं हुई है, बल्कि तीन महीने के लिए स्थगित की गई है। यदि आपका लोन 2021 में जनवरी में खत्म होने वाला था तो अब यह अप्रैल 2021 में खत्म होगा।
रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा तीन अप्रैल की जगह 27 मार्च को ही कर दी और उसमें लोन लेकर मकान खरीदनेवालों, लोन से कार खरीदनेवालों और पर्सनल लोन लेनेवालों को तीन महीने का मोरेटोरियम दे दिया यानी उनका कर्ज तीन महीने के लिए स्थगित कर दिया। क्रेडिट कार्ड वालों को यह सुविधा नहीं है। डय़ाँ रहे, यह कोई कर्ज माफी नहीं है, बल्कि कर्ज का स्थगन है। जो कर्ज लिया है, वह तो चुकाना ही होगा।
कहावत है की देर आयद, दुरुस्त आयद। मतलब देर से आए, लेकिन सही आए। भले पधारे। इसके ठीक विपरीत भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति की घोषणा पहले कर दी है। यह घोषणा तीन अप्रैल को होनी थी, लेकिन कोरोना वायरस के कारण लॉक डाउन को देखते हुए आरबीआई ने मौद्रिक नीति की घोषणा शुक्रवार, 27 मार्च को ही करने का फैसला किया। इसे कहा जा सकता है – जल्द आयद, दुरुस्त आयद। हुआ यह कि तीन सप्ताह के लॉक डाउन के कारण मध्यम वर्ग के लोगों की साँस रुक गई थी। लॉक डाउन का सीधा असर लोगों की आमदनी और कारोबार पर पड़ रहा है। ऐसे में लोगों को लोन चुकाने में दिक्कत स्वाभाविक है। रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कज़ऱ् लेनेवालों के लिए राहत की घोषणा की है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि सभी टर्म लोन पर 3 महीने का मोरेटोरियम होगा। मोरेटोरियम का अर्थ यह कि लोन लेकर मकान खरीदने वाले, कार खरीदने वाले, पर्सनल लोन लेने वाले या अन्य लेनदारों को तीन महीने तक ईएमआई चुकाने से राहत मिल गई है। इसका उनके सिबिल स्कोर पर भी कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने वालों को फिलहाल यह राहत नहीं मिल रही है। इसका मतलब है कि तीन महीने तक किसी के अकाउंट से ईएमआई नहीं कटेगी। तीन महीने के बाद ही दोबारा ईएमआई की अदायगी शुरू होगी। रिजर्व बैंक ने 1 मार्च से इसे लागू किया है तो लोन लेनेवालों को अब जून से ही ईएमआई देनी है। ध्यान देने की बात यह है कि ईएमआई माफ नहीं हुई है, बल्कि तीन महीने के लिए स्थगित की गई है। यदि आपका लोन 2021 में जनवरी में खत्म होने वाला था तो अब यह अप्रैल 2021 में खत्म होगा। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कार्यशील पूंजी पर ब्याज भुगतान को टाले जाने को चूक नहीं माना जाएगा, इससे कर्जदार की रेटिंग (क्रेडिट हिस्ट्री) पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश की बैंकिंग व्यवस्था मजबूत है। निजी बैंकों में जमा भी बिल्कुल सुरक्षित है। लोगों को घबराकर पैसा निकालना नहीं चाहिए। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ‘कोरोना वायरस से अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले प्रभाव से बचाने के लिए आज आरबीआई ने बड़े कदम उठाए हैं। घोषणाओं से तरलता में सुधार होगा, मध्यम वर्ग और व्यवसायों को मदद मिलेगी।Ó
आरबीआई के गवर्नर शशिकांत दास ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में कहा कि दुनिया भर में हर कहीं आर्थिक नरमी और सघन हो गई है। दास ने भारत के बारे में कहा, ‘वृद्धि दर और मुद्रास्फीति की गति कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रकोप, अवधि तथा इसके असर पर निर्भर करेगी।Ó रिजर्व बैंक ने रीपो रेट में 75 बीपीएस की कटौती का ऐलान किया। नई दर अब 4.4 प्रतिशत हो गई है। इससे बैंकों के लिए कर्ज सस्ते करने का रास्ता बनता है। बैंकों को अपने दैनिक कामकाज के लिए ऐसी बड़ी रकम की ज़ रूरत होती है जिनकी मियाद एक दिन से ज्यादा नहीं होती। इसके लिए बैंक जो रिजर्व बैंक से रात भर के लिए (ओवरनाइट) कर्ज लेते हैं। इस कर्ज पर रिजर्व बैंक को उन्हें जो ब्याज देना पड़ता है, उसे ही रीपो रेट कहते हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था अब किस तेजी से आगे जाएगी, कहा नहीं जा सकता क्योंकि उसकी प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले समय में कोरोना वारस का संक्रमण किस तरीके से और कब तक फैलता है तथा इसका कितना असर होता है। आर्थिक वृद्धि दर तथा खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रमुख वृहद आर्थिक मानक हैं। इनसे अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा के संकेत मिलते हैं। ध्यान रखें कि किस्त माफ नहीं की है, ईएमआई टाली गई है। लोन लिया है तो चुकाना तो होगा ही। अभी तीन महीने के लिए नही देना है लेकिन बाद मे देना होगा। फिल्मी गीत है – जो वादा किया तो निभाना पड़ेगा। कर्ज लेते वक्त लिखकर वादा किया जाता है कि किस्तों में मई ब्याज के चुकाया जाएगा। तो जो कर्जा लिया है, चुकाना पड़ेगा।