फसल बहा ले गया बाढ़ तो दुख नहीं, परंतु मिट्टी ही बह गया तो क्या करे किसान ?

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास
मो.9617565371
मध्यप्रदेश में बाढ़ के प्रकोप से लगभग सवा लाख किसान थर-थर कांप रहे है। जिनकी पूरी फसल नष्ट हो गयी वे अब सिर्फ सरकारी राहत कोष के भरोसे हैं। परंतु जरा कल्पना कीजिए आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे जब यह सुनेंगे फसल तो बाढ़ में नष्ट हो गया मलाल नहीं, बीमा कंपनी कुछ न कुछ दे ही देगी परंतु जिस खेत की मिट्टी ही बाढ़ में बह गयी है तो उसे किसान वापस कहां से लायेगा। यह रोंगटे खड़ा करने वाला प्रकोप तो पूरे प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग ढंग से प्रभावशाली है, परंतु होशंगाबाद और देवास जिले में बाढ़ के प्रकोप का वीभत्स रूप इसके पहले कभी देखा नहीं गया। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने जब देवास जिले के कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला से बाढ़ के प्रकोप और राहत की जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि लगभग 25 हजार हेक्टेयर सिंचित भूमि को भयंकर नुकसान हुआ है। गांव के गांव बह गये, किसानों की फसलें चौपट हुई है परंतु जिन किसानों के खेत की मिट्टी बाढ़ बहाकर ले गयी है उनकी समस्या जघन्य है। चंद्रमौली शुक्ला ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा राहत कार्यों को बखूबी अंजाम दिया गया है।
उन्होंने कहा कि 4000 से अधिक परिवारों को राहत शिविरों में सफलतापूर्वक पहुंचाया गया है, उल्लेखनीय है कि देवास जिले में कोई मानव की न तो जान गई है और न ही कोई बाढ़ में बहा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन पहले से ही सर्तक था लेकिन यदि केन्द्रीय दल की रिपोर्ट के बाद किसानों को राहत राशि शीघ्र उपलब्ध हो जाएगी तो ही किसान अपने इस संकट के दौर में चुनौतियों से पार पा सकेगा। इधर होशंगाबाद में अतिरिक्त जिला कलेक्टर जी.पी. माली ने बताया कि बाढ़ से हुई नुकसान को लेकर सतही रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी हे। जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार किसानों को घर पहुंच राहत सेवा के माध्यम से त्वरित राहत पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अतिवृष्टि से प्रभावित गांवों की संख्या 568 है जबकि अतिवृष्टि से प्रभावित खातेदारों की संख्या 62683 हो गई है। श्री माली के अनुसार अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों का रकबा 100230 हेक्टेयर है जबकि 6 लोगों के बाढ़ से मृत्यु भी हुई है। उन्होंने बताया कि 369 पशुओं की भी हानि हो गयी है। श्री माली के अनुसार 29 लाख मीटर की सड़कों को बाढ़ ने बर्बाद कर दिया है। जन हानि में 20 लाख की सहायता राशि तथा पशु हानि में 9240 की राशि का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का सर्वेदल घर-घर सर्वे कर रहा है, जिसकी रिपोर्ट आना अभी शेष है। इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया है कि मध्यप्रदेश में बाढ़ के प्रकोप से लगभग 9000 करोड़ का नुकसान हो गया है। केन्द्र सरकार ने मुख्यमंत्री के अनुरोध पर दल भी भेज दिया है और आंशिक रिपोर्ट के दिल्ली पहुंचने की खबर है।
सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक रूप से केन्द्र ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की मांग को स्वीकार कर लिया है और उम्मीद है किसानों को हुए बाढ़ के प्रकोप से नुकसान की भरपायी अवश्य होगी। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि फसलों के नष्ट होने का मुआवजा किसान को जरूर मिलेगा लेकिन जिस खेत से मिट्टी ही बह गयी है उस किसान को फिर से वैसी फसल योग्य मिट्टी तैयार करने में पैसा और वक्त भी लगेगा। इसलिए जितनी फसल बीमा राशि दी जाये उतनी ही बाढ़ के गिरफ्त में आये किसान को मिट्टी सहेजने के लिय भी मुआवजा दिया जायगा, तो ही किसान को सरकार के फैसलों पर भरोसा होगा कि सरकार कोरोनाकाल महामारी में भी किसानों के साथ इस बाढ़ के संकट से निजात दिलाने के लिए किसानों के प्रति संकल्पित है।

विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।