‘फिजियोथेरेपी कौंसिल” का गठन कब होगा…?

ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार
मो.09425002527

देश के अन्य राज्यों में जिस तरह से फिजियोथेरेपी कौंसिल का गठन होने के बाद से फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में विकास हुआ है। मेडिकल कॉलेज, सरकारी नौकरियों में फिजियोथेरेपी का कोर्स करने वालों की संख्या बड़ी है। बिना डिग्री के फिजियोथेरेपी करने वालों पर बड़ी मात्रा में रोक लगने के साथ ही पढ़ाई का भी स्टैंटर्ड बड़ा है। इससे यह बात साफ होती है कि फिजियोथेरेपी कौंसिल के गठन का फैसला राज्य सरकारों के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वाश सारंग को भी इस दिशा में निर्णय लेते हुए जल्दी फिजियोथेरेपी कौंसिल का गठन करना चाहिए। जानकारी के अनुसार लंबे समय से प्रदेश का भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ सरकार से फिजियोथेरेपी की पृथक और स्वतंत्र कौंसिल के गठन की मांग कर रहा है। ताकि इन लोगों को भी अन्य राज्यों की तरह लाभ मिल सकें। लेकिन सरकार का इस और अभी तक ध्यान नहीं गया हैं। जबकि 2019 के जुलाई माह के विधानसभा सत्र में फिजियोथेरेपी कौंसिल के गठन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो चुका हैं। वर्तमान में फिजियोथेरेपी को सह चिकित्सीय परिषद् में रखा है, जो नियमों के विपरीत है। जबकि फिजियोथेरेपी चिकित्सक स्वतंत्र रूप से चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए अधिकृत है न कि किसी अन्य चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक की देख-रेख में। बताया जा रहा है कि प्रतिवर्ष 800 से अधिक विद्यार्थी फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में पंजीयन करते है, जिन्हें कौंसिल के गठन नहीं होने के कारण लाभ मिल नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री को इस विषय में निर्णय लेकर ऐसे हजारों विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाना चाहिए। देश के करीब 8 राज्य ऐसे है जहां पर फिजियोथेरेपी कौंसिल का गठन हो चुका हैं। इन राज्यों में फिजियोथेरेपी स्वतंत्र वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति के रूप में काम रही हैं। जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, हरियाणा, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, दिल्ली सहित तमिलनाडू राज्य शामिल हैं। इन 8 राज्यों में फिजियोथेरेपी कौंसिल के गठन हो चुका है। जिसके बाद फिजियोथेरेपी चिकित्सा पद्धति और इसकी सेवाओं में उन्नयन हुआ है।