सिंधिया की हरी झंडी का इंतजार बदले जायेंगे आधा दर्जन कलेक्टर

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास
मो.9617565371

मध्यप्रदेश में सत्ता का विकेन्द्रीय करण हो चुका है। जब कमलनाथ के 15 महीनों की सरकार का तख्ता पलट करके ग्वालियर चंबल के महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का दामन थामा था तो राजनितिक पर्यवेक्षक यह मानने को तैयार नहीं होते है कि सिंधिया एक सर्वशक्तिमान नेता के रूप में भाजपा में आने के बाद उभर जायेंगे। परंतु परिस्थितियों का विश्लेषण बताता है कि ‘महाराज-शिवराजÓ की जोड़ी चरम पर है। अब जो शिवराज चाहे वैसा महाराज सहमत हो जाते है, और जो महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया चाहे वैसा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान निर्णय करने लगे है। इसका ताजा तरीन उदाहरण है ग्वालियर-चंबल में 38000 सिंधिया समर्थक कार्यकर्ताओं की सदस्यता अभियान में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में भाजपा सदस्यता ग्रहण कराई गई। केवल सदस्यता तक ही शिवराज महाराज की जोड़ी रूकी नहीं परन्तु इसके साथ ग्वालियर चंबल संभाग के उन कामों को 15 दिन के भीतर अंजाम दिया गया जिसे कमलनाथ की 15 महीने की सरकार में ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं करा पाये थे। इसलिए यह लिखना गैरवाजिब नही होगा कि मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था भी ‘शिवराज-महाराजÓ की आपसी सहमति से ही तय हो रही है। अब महाराजा का 40 प्रतिशत और शिवराज भाजपा का 60 प्रतिशत वाला अनुपात नही रहा, अब तो सिंधिया ने जिस जिले में उंगली रख दी वही के कलेक्टर-एस.पी. बदल जायेंगे। सूत्रों के अनुसार ग्वालियर, इंदौर, होशंगाबाद, नीमच, मंदसौर और छतरपुर के जिला कलेक्टर बदले जायेंगे। जहां तक सवाल है ग्वालियर के कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम का इन्हें इंदौर भेजा जा सकता है और इंदौर के कलेक्टर मनीष सिंह को मुख्यमंत्री अपने सचिवालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के साथ भोपाल बुला सकते हैं। 2012 बैच के नरेन्द्र सूर्यवंशी तथा स्वरूचिस सोमवंशी को होशंगाबाद एवं छतरपुर में पदस्थ करने की संभावनाओं पर चर्चा के लिए फाइल तैयार है। गाड़ी इस बात पर अटकी है कि होशंगाबाद कलेक्टर को कहां पदस्थ किया जाये। उन्हें सरकार किसी ना किसी जिले में कलेक्टर जरूर बनायेगी क्योंकि होशंगाबाद कलेक्टर धंजय सिंह भदौरिया पूर्व सांसद डॉ. राम लखन सिंह के दामाद है। इसी तरह खनिज निगम के कार्यपालिक निदेशक 2008 बैच को ग्वालियर कलेक्टर बनाये जाने की खबर है। और यदि ग्वालियर कलेक्टर तथा इंदौरा कलेक्टर में कोई बदलाव मुख्य सचिव की पसंद के कारण नही हो पाया तो 2008 के दिलिप कुमार को मालवा के ही किसी जिले में पदस्थ किया जा सकता है। उपरोक्त खबरों से संबंधित विशेष रिपोर्ट का लब्बो लुआब यह है कि कमलनाथ की सरकार में उपेक्षित उपरोक्त आय.ए.एस. अधिकारियों को जिलों में शीघ्र ही कलेक्टर बनाया जा सकता है।

विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।