पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग कर रहा रिटायर्ड अधिकारियों को ‘जीएम’ बनाने की तैयारी

10 जीएम नहीं, 60 नये इंजीनियर करना चाहिए नियुक्त…!

विशेष रिपोर्ट
ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार
मो.09425002527

पूर्व प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव
इस मामले में पहले लगा चुके है रोक
प्रदेश की शिवराज सरकार में आज भी ब्यूरोक्रेसी किस तरह से हावी हैं, इसके वैसे तो कई उदाहरण अब तक सामने आ चुके हैं। कई मामलों में तो विभाग के मुखिया ने मंत्री तक को भनक नहीं लगने दी और जो काम करना था उसे करवा लिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल सदस्यों में कुछ ही गिने-चुने मंत्री होंगे जिनके सामने विभाग प्रमुख दाये-बाये नहीं होते हैं। संडे स्पेशल की हमारी पड़ताल में ऐसा ही एक मामला पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग का सामने आया हैं। जिसमें विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव एक ऐसा फैसला करने जा रहे है जिससे सरकार का भला कम नुकसान ज्यादा हो सकता है। आइए इस पूरे प्रकरण को विस्तृत रूप से समझने का प्रयास करते है…।
दरअसल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आवश्यकतानुसार 10 रिटायर्ड अफसरों को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के प्रोजेक्ट में शामिल पीआईयू में जीएम (जनरल मैनेजर) के पद पर रखने की तैयारी में हैं। जिस पर प्रतिमाह सरकार को वेतन सहित अन्य खर्चों पर लगभग 20 लाख रूपए व्यय करना पड़ेगा। जो ‘ढाक के तीन पातÓ साबित हो सकते है। ऐसा इसलिए कि रिटायर्ड अफसर की उम्र पहले से ही 62 वर्ष होगी और वे तरह-तरह की बिमारियों से लिप्त होंगे। ऐसे में क्या वे ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली सडकों का निरीक्षण कर गुणवत्ता का विशेष ध्यान रख पाएंगे। इससे अच्छा तो एसीएस मनोज श्रीवास्तव ने 10 रिटायर्ड अफसर की जगह एक बड़ा निर्णय लेते हुए इतने ही खर्चे में एमटेक करने वाले 60 लोगों को नये सबइंजीनियर के रूप में रख लेना चाहिए। क्योंकि साइड पर सबइंजीनियर का ही काम विशेष तौर पर रहता हैं। एसीएस के इस निर्णय से 60 पढ़े-लिखे लोगों को रोजगार भी मिल जायेगा और काम में भी तेजी आएंगी। रहा सवाल जिलों में खाली पड़ी पीआइयूओं का तो उसका विलय करके एक पीआईयू बनाकर जिले में एक जीएम बना देना चाहिए। क्योंकि अब जिलों में पहले की तरह ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का काम नहीं रहा है। एक जिले अगर 3 पीआईयू है तो उसके 3 जीएम सहित 3 ऑफिस और उतना ही स्टाफ है। जिसका अतिरिक्त खर्च सरकार पर पड़ रहा है।
यहां पर आज पूर्व प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग उमाकांत उमराव का जिक्र इसलिए कर रहे है क्योंकि इस तरह की एक फाइल पहले भी विभाग में चली थी जिस पर तत्काल उन्होंने रोक लगाई थी। कुल मिलाकर संडे स्पेशल स्टोरी का लब्बोलुबाब यह है कि एसीएस मनोज श्रीवास्तव को 10 रिटायर्ड अफसरों की जगह 60 एमटेक के लोगों को सबइंजीनियर के रूप में रखकर रोजगार देने जैसा ऐतिहासिक निर्णय लेना चाहिए।