लोकतंत्र की हत्या करने वालों को जवाब जनता देगी : कमलनाथ

भोपाल, 29 सितम्बर। मध्य प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। सभी 28 सीटों पर 3 नवंबर को मतदान होंगे, जबकि 10 नवंबर को बिहार चुनाव के साथ नतीजे घोषित किए जाएंगे। तारीखों के ऐलान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट करके उपचुनाव को जनादेश का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि सौदेबाजी का जबाव जनता देगी। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर लिखा चुनाव आयोग द्वारा मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर 3 नवंबर को उपचुनाव की घोषणा का स्वागत है। कांग्रेस इन उपचुनावों को लेकर पूरी तरह से तैयार है। हमने अभी तक 24 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं, शेष नाम भी हम जल्दी घोषित किए जाएंगे। कांग्रेस का परचम इन सीटों पर निश्चित रूप से लहराएगा और हम भाजपा को इन सीटों पर परास्त करेंगे। कमलनाथ ने ट्वीट कर भाजपा को आड़े हाथों लिया है। भाजपा पर निशाना साधते हुए कमलनाथ ने कहा कि यह उप चुनाव जनादेश का अपमान, संवैधानिक मूल्यों व लोकतंत्र की हत्या करने वालों को कड़े जवाब के रूप में होगा। प्रदेश की जनता एक लोकप्रिय, चुनी हुई, विकास की सोच वाली सरकार को सौदा कर गिराने वालों को इन चुनावों में कड़ा जवाब देगी।
इन 28 सीटें पर होंगे उपचुनाव
मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हैं। इन 28 में 25 सीटें कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं जबकि 3 सीटें विधायकों के निधन के चलते रिक्त हुई हैं। सुमावली, मुरैना, दिमनी अंबाह, मेहगांव, गोहद, ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, डबरा, भांडेर, करेरा, पोहरी, बामोरी, अशोकनगर, मुंगावली, सुरखी, सांची, अनूपपुर, सांवेर, हाटपिपल्या, सुवासरा, बदनावर, आगर-मालवा, जौरा, नेपानगर, मलहारा, मंधाता और ब्यावरा में उपचुनाव हैं।

ग्वालियर-चंबल पर रहेगी सबकी नजर
28 सीटों में से 16 सीटें ग्वालियर चंबल से ही आती है। जिसमे कांग्रेस-बीजेपी व तीसरी पार्टी बसपा जिसे कम नहीं आंका जा सकता, वहां कोई कमी नहीं छोडऩा चाहेंगी। खास बात यह भी हैं कि शिवराज के नए मंत्रिमंडल में 11 मंत्री ग्वालियर चंबल बेल्ट से ही आते हैं जिसमें 8 मंत्री सिंधिया गुट के हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि भाजपा सिंधिया की हर पसंद को तव्वजो दे रहे हैं। जबकि भाजपा का नया राजनीतिक केंद्र अब ग्वालियर-चंबल को ही माना जा रहा है। क्योंकि यहीं से तय होगा कि सत्ता की कुर्सी पर कौन काबिज होगा?