शाबास शिवराज फैसला बड़ा सवाल खड़ा

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास
मो.9617565371

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने प्रदेश को अग्रणी विकासशील राज्यों में सबसे उपर देखना चाहते हैं। जब भी एजेंडा या टास्क प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से राज्यों को जारी होता हैं तो हमने पाया है कि मध्यप्रदेश ही अव्वल रहा है। अव्वल आने की कला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान में ‘इनबिल्टÓ है मतलब स्वयं निर्मित हैं इसके लिए वे माता-पिता के आशीर्वाद के अलावा किसी को श्रेय भी नही देना चाहेंगे। याद आता है जब वे भोपाल में अपने मस्त मोला छात्र जीवन में एक ‘गांवÓ जैत से चलकर भोपाल आये थे तो अपने मित्र ‘शिव चौबेÓ से कहते थे ‘यार आये हैं तो कुछ करके ही जायेंगेÓ। तब यह किसी को पता नही था कि शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बनेंगे और स्कूल, कालेज की परिक्षाओं की तरह हर फैसलों में अव्वल आयेंगे, लेकिन वे जो आज एैसा कर गये या 15 वर्षों में करते आये है। वह इस बात का प्रमाण है कि शिवराज को हर क्षेत्र में अव्वल आने की जन्मजात ललक है। इसी ललक का प्रमाण आज उन्होंने अपने एक बड़े फैसले पर हस्ताक्षर करते हुए उस समय दिया जब वरिष्ठ आय.पी.एस अधिकारी विशेष पुलिस महानिदेशक पुरूषोत्तम शर्मा को इस बात पर कठोर सजा सुना दी कि पुरूषोत्तम शर्मा ने अपने बीबी की बेरहमी से पिटाई इसलिए कि क्योंकि उनकी पत्नी ने किसी अन्य महिला के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया। बस इतना ही आरोप शिवराज के लिए पर्याप्त था उन्होंने पुरूषोत्तम शर्मा को निलंबित कर दिया। हालांकि बकौल श्रीमती शर्मा डी.जी. साहब पकड़े जाने के बाद अकड़ भी दिखाई और कहा यह उनकी निजी जिन्दगी है, मतलब जिसमें झांकने का हक उसकी बीबी को भी नही है। यदि चरित्रहीनता की पराकाष्ठा एैसी हो जाये जहां एक वरिष्ठ आय.पी.एस. अधिकारी अपनी पत्नी को केवल इसलिए पीटे क्योंकि उसने किसी और महिला के साथ उसके उन रंगों को देखा रंगे हाथ पकड़ा, जिसका पर्दाफाश करने के लिए गत 3 वर्षों से वह पति पुलिस महानिदेशक पुरूषोत्तम शर्मा का पीछा कर रही थी। शायद रंगे हाथ पकडऩे का जिक्र केवल दूसरी महिला के साथ अपने पुलिस महानिदेशक पति को चाय-नास्ते के वक्त इसलिये किया क्योंकि वह मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को यह बताना चाहती थी कि इस तरह के चरित्रहीन बड़े अधिकारी चाहे मैरे पति ही क्यों ना हो मुख्यमंत्री को संज्ञान में लेकर सजा देनी चाहिये ताकि महिलाएं एैसे पति से पिटने से बचे और आने वाली नई युवा पीढ़ी को संदेश जाये कि चरित्रहीनता समाज में कैंसर की तरह है इससे बचकर रहना जरूरी हैं, वरना हष्र एैसा ही होगा जैसा कि सत्ता के शिखर पर बैठकर अय्याशी का सुख भोगने वाले उनके पति पुलिस महानिदेशक पुरूषोत्तम शर्मा के साथ हुआ है। सूत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सरकार में भी मध्यप्रदेश को कलंकित करने वाली ‘हनी टे्रपÓ कांड आया लेकिन तब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह कहकर इस कांड की परवाह नही कि क्या मुख्यमंत्री के पास ‘हनी ट्रेप कांडÓ के अलावा कोई और विषय फैसले के लिए महत्वपूर्ण नही है। कमलनाथ जी यदि ‘हनी ट्रेपÓ की तह पर जाकर जांच ही करवा लेते तो यह लिखने में आज संकोच नही है बड़े-बड़े नामचीन तथा कथित इंमानदार कुछ गिने-चुने ही होंगे नौकरशाह, सफैद पोशाक अपराधी और इसी महकमें के कुछ नाम और इस तरह नप जाते जैसे ‘बापू आशा रामÓ आज तक नप रहे है, घर का एक वक्त खाना खाने के लिए तरस हैं, उनकी यह तरस, यह पीड़ा और जेल के सलाखों के भीतर जिंदगी उन लोगों को सुख दे रही है जिन अबला नारियों के शोषण का आशाराम पर, उनके बेटे नारायण स्वामी पर संगीन आरोप है। मतलब यह भी है कि एक सरकार एैसी आई जिसके सामने चरित्र हीनता कोई मायने नही रखती थी और एक यह शिवराज की सरकार जिसने पूरे विश्व में यह कीर्ति अर्जित की है कि वह अपराधी कोई भी हो, कितना बड़ा भी क्यों ना हो उसे भी आम अपराधियों की तरह सजा मिलनी चाहिये। ‘शाबासÓ शिवराज आज हमारी इस संपादकीय का शीषर्क भी है और आपको बधाई भी है कि आपने फैसला बड़ा लिया है, एैतिहासिक है आप पुलिस महानिदेशक स्तर के वरिष्ठ आय.पी.एस. अधिकारी को भी दोषी होने पर सजा दे सकते हैं। इसलिये यह लिखा जाना आज अतिश्योक्ति नही होगा कि इस तरह के फैसले लेने वाले 74 वर्षों की आजादी के बाद आप पहले मुख्यमंत्री होंगे यंू कहा जाये कि आपके अव्वल आने की ललक 100 प्रतिशत आपको निर्णायक बनाती है। परन्तु हमें यह अपेक्षा करने में गुरेज नही है कि फैसला बड़ा है, सवाल खड़ा है वह यह कि ‘हनी टे्रपÓ कांड की तह पर कौन जायेगा और शिवराज सरकार गई तो कौन-कौन जायेगा। दूसरा यह कि राजनीति में जिस पार्टी में आप हैं वहां पर सुचिता पर उठने वाले सवालों का जवाब किसके पास है, उदाहरण के लिए हम इस विशेष संपादकीय में एक ही सवाल छोड़ते हैं पहला यह कि मुख्यमंत्री के पुत्रों को छोड़कर बाकी जितने भी भारी मंत्री है क्या उनके पुत्रों को सरकार चलाने का अधिकार भी आपने सौंप दिया है जो आज डंके की चोट पर हावी है, हर अधिकारी परेशान है, कैसे चलेगा गुड गर्वनेंस, दूसरा भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के लिये आपके पास कमलनाथ सरकार की तरह बाहरी खुफिया एजेंसी से फोन टेप कराने का जरिया है या दूरदृष्टि कुछ अलग है। हालांकि हमे पता है एैसी हरकतों पर आपकी सरकार को विश्वास नही जो ‘टेप कांड करे। यह सवाल बहुत बड़ा है कि भ्रष्टाचार जड़ से कैसे और कब मिटेगा, जनता के सामने तो आज भी खड़ा है परन्तु आपकी पार्टी के लिए भी बहुत बड़ा है।

विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।