मंत्री जी सम्हल कर बोलिए, हाथ जोडि़ए वरना कुर्सी चली जाएगी…

कड़वी खबर
विजय कुमार दास
मो.9617565371

मध्यप्रदेश में 28 विधानसभा सीटों के उप चुनावों में 14 मंत्री भाजपा में ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने 2018 के आम चुनाव में जनता के सामने हाथ जोड़-जोड़ कर, घुटनों के बल झुक-झुक कर कांग्रेस के लिए वोट मांगे थे, उन्हें यह पता नहीं था ‘महाराजाÓ ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोडऩे के फैसले में सेनापति की भूमिका निभानी पड़ेगी, परन्तु पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ ये सभी 14 मंत्रियों ने अपने ‘महाराजाÓ के आदेशों का नहीं, बल्कि उनके तेवरों का भी पूरा साथ दिया। परिणाम स्वरूप 15 महीने में ही विजन की सरकार चलाने वाले कमलनाथ की सरकार को सत्ता से बेदखल होना पड़ा। ‘महाराजाÓ सिंधिया ने अपने स्वयं के अपमान से ज्यादा अपने समर्थक उन विधायकों के अपमान को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया, जिन्हें उन्होंने कमलनाथ सरकार में डंके की चोट पर मंत्री बनवाया था, इसलिए राजनीति में प्रतिष्ठा से क्या-क्या होता है, महाराज के लिए निर्णायक हो ही गया और उनके दम पर भाजपा की सरकार शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्रित्व में चौथी बार स्थापित हो गयी है। आज की इस कड़वी खबर के कालम में पहली खबर है- अब शिवराज सिंह चौहान भी महाराजा सिंधिया के कोटे से मुख्यमंत्री इसलिए बने हैं, क्योंकि महाराजा को ग्वालियर-चंबल से कोई उनके अलावा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे, शायद उचित प्रतीत नहीं हुआ, वरना केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर और डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नामों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा नहीं की होगी, ऐसा संभव नहीं है। स्मरण होगा इसलिए सरकार बनने के आगाज के साथ पहली दावत सिंधिया ने शिवराज सिंह चौहान के निवास पर ही स्वीकार की, बाद में वे डॉ. नरोत्तम मिश्रा के यहां भी लंच पर पहुंच गए, ताकि नरोत्तम जी निराश ना रहें। खैर यह तो राजनीति का सबसे बुरा दौर कांग्रेस के बुजुर्ग नेता कमलनाथ के लिए था, जब उन्हें सत्ता छोडऩी पड़ी और सबसे अच्छा दौर शिवराज सिंह चौहान के लिए रहा, जब वे महाराजा के सानिध्य में चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए। परन्तु अब एक नया दौर है, लेकिन सबसे कठिन, वह इस कोरोना काल में 28 विधानसभा के उप चुनावों में जरा रोचक भी इसलिए है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जिन्हें सरकार बनाने के लिए 28 सीटें चाहिए वे दावा कर रहे हैं सरकार उनकी वापस आ रही है, कमलनाथ जी यदि आपने यह संभव कर दिखाया तो राहुल गांधी आपको देश में प्रधानमंत्री का उम्मीदवार मोदी के सामने 2024 में बना देंगे, मान लीजिये या फिर मध्यप्रदेश में लंबे समय राजनीति आप नहीं कर पाएंगे, दिल्ली या छिंदवाड़ा दो में से एक आपका हेड क्वार्टर होगा, है ना कड़वी खबर। दूसरी बड़ी कड़वी खबर यह है कि 28 में से जिसमें 14 सिंधिया समर्थक मंत्री चुनाव मैदान में हैं, उनकी हालत संकट काल की तरह है। उनके पास सिंधिया का नाम ही सब कुछ है, परन्तु भाषणों में कांग्रेसी कमलनाथ वाला तेवर आज भी जिंदा है, कभी-कभी मंत्री जी लोग गुस्से में तब आ जाते हैं, जब उन्हें मतदाता कहते हैं 2018 में तो आपने कांग्रेस के लिए वोट मांगा, हमें कांग्रेसी बना दिया, अब आप बिना पूछे भाजपा में गए तो फिर आप ही जानो। बस इतना ही सुनते कई मंत्री के तेवर खौलते पानी की तरह तब तक जुबान पर रहते हैं, जब तक मतदाताओं को कोई भाजपा का बड़ा नेता समझाने नही आ जाए। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने इस तरह के 6 मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्र का जायजा लेने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि यदि मंत्रियों ने सम्हल-सम्हल कर हाथ जोड़-जोड़ कर वोट नही मांगे तो कुर्सी चली जाएगी। हालांकि कुछ मंत्री तो सम्पूर्ण रूप से भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं को साधने में सफल हो गए, जीत के नजदीक भी पहुंच गए, उनमें रायसेन जिले के सांची विधानसभा क्षेत्र के डॉ. प्रभुराम चौधरी का नाम सबसे ऊपर है। यहां सिंधिया के नाम पर, पूर्व मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार के पुत्र मुदित शेजवार के दम पर और पूर्व मंत्री रामपाल सिंह की बात पर डॉ. प्रभुराम चौधरी मतदाताओं से वोट मांग रहे हैं, खुश हैं। उधर सुरखी में राजस्व मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के तेवरों में बड़ा फर्क आया है तो मंदसौर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा घुटना टेककर जन वंदना करना तथा वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा की मार्मिक अपील ने दृश्य बदला है, वरना हरदीप की हालत पतली बतायी जा रही है। यही हालत ग्वालियर में मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की भी थी, जिन्होंने वोट मांगने की शैली में कुछ बदलाव किए हैं। रहा सवाल मंत्री ओ.पी.एस. भदौरिया का, उन्हें कहा गया है ब्राह्मणों के हाथ जोड़ो, पांव पखारो और जीतो, वे ऐसा करने भी लगे हैं। परन्तु जहां तक सवाल है मंत्री तुलसी सिलावट की सीट का तो यहां कांग्रेस उम्मीदवार नहले पर दहला है। कुछ भाजपा के नेताओं के जोशीले भाषण जैसे कोई तुलसी सिलावट को हरा कर बताए, या फिर सिलावट भाजपा के उम्मीदवार इतने मजबूत हैं कि प्रेमचंद गुड्डू की जमानत जप्त होना तय, इस तरह के भाषणों को जनता चुभने वाले शब्दों में ग्रहण कर रही है। परन्तु समझा जा रहा है कि तुलसी सिलावट अब ‘महाराजाÓ के निर्देश के बाद सबसे भिया-भिया ध्यान रखना, मैं तो आपका अपना हूं, इस लहजे में दोनों हाथ जोड़ें प्रचार करने लगे हैं, शायद ऐसा रहा तो माहौल के साथ-साथ कुर्सी बचने की संभावना प्रबल है, वरना…।

कड़वी खबर के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।