ब्यावरा में कांटे की टक्कर शिवराज-दिग्विजय आमने-सामने


ब्यावरा से खास रिपोर्ट
विजय कुमार दास
मो.9617565371

मध्यप्रदेश में 28 विधानसभा उप चुनावों में ब्यावरा एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है, जहां बिकाऊ और टिकाऊ कोई मुद्दा नहीं है। इस विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पसंद का उम्मीदवार नारायण सिंह पवार, जो 2018 का विधानसभा चुनाव मात्र 826 मतों से हारे थे, अपनी जातिगत 28,000 मतदाताओं के भरोसे मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा को बचाने में लगे हैं। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ङ्क्षसह के पसंदीदा उम्मीदवार कांग्रेस के रामचंद्र दांगी हैं, जिन्हें अपनी जाति के 35,000 मतदाताओं पर भरोसा है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रतिष्ठा को बचाने में पूरा दम लगाएंगे।
ब्यावरा ऐसा विधानसभा क्षेत्र है, जहां कांग्रेस के उम्मीदवार रामचंद्र दांगी को सहानभूति पर भी भरोसा है। वह मानकर चल रहा है कि कांग्रेस के पूर्व विधायक, जिसका निधन कोरोना महामारी के कारण हुआ था, वह भी दांगी परिवार का ही था। इसलिए इस चुनाव में समूचा दांगी परिवार कांग्रेस के साथ खड़ा होगा, जबकि भाजपा के उम्मीदवार नारायण सिंह पवार का यह मानना गलत नहीं है कि उसे शिवराज के चेहरे पर ही विकास के एजेंडे पर विश्वास है कि यहां पर भाजपा ही चुनाव जीतेगी। कोरोना की वजह से ब्यावरा के बाजारों में उतना ही खुलापन है, जितना कोरोना के पहले हुआ करता था, क्योंकि ब्यावरा ऐसे चौराहे पर बसा हुआ है, जहां से इंदौर, भोपाल, आगरा, बंबई चारों तरफ से यातायात यहीं पर आकर पहले रूकता है, फिर आगे बढ़ता है। हमने बाजार के हालातों पर भी चर्चा की। इसमें रोचक प्रसंग भी सामने आए। कुछ खांटी भाजपाई कहते सुने गए अंदर में फूट और टूट है, तो कांग्रेस जीत सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ब्यावरा विधानसभा क्षेत्र के कम से कम 5 बार राउंड लगाने पड़ेंगे और मुख्यमंत्री ऐसा कर पाएं तो भाजपा के पक्ष में बाजी पलट जाएगी। इधर खांटी कांग्रेसी व्यापारियों का मानना है कि विकास के एजेंडे पर भाजपा तो मजबूत है, और कांग्रेस में जबरदस्त फूट भी है। इसका मतलब भले दबी जुबान से कहें भितरघात की संभावनाएं कांग्रेस में भी कम नहीं हैं। हालांकि व्यापारी समुदाय का या यंू कहें कि अग्रवाल समाज का मत प्रतिशत बहुत ज्यादा नहीं है। कुल जमा 8,000 मतदाताओं के बीच में अन्य मतदाताओं के व्यापारिक और सामाजिक संबंध होने के कारण यह समुदाय ‘मोटीवेशनÓ का काम करता है। व्यापारी समुदाय के अलावा भी राष्ट्रीय हिन्दी मेल की टीम ने उन लोगों से बात की, जिनका भाजपा या फिर कांग्रेस से कोई रिश्ता नहीं है और यह समूह है बहुजन समाज पार्टी के समर्थक मतदाताओं का, जो बीएसपी उम्मीदवार गोपाल भिलाला के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। उनका मानना है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 10 दिनों के लिए यहां डेरा डालने वाले हैं। यदि ऐसा हुआ तो गोपाल भिलाला का वोट शेयर हजार-दो हजार में सिमट जाएगा और कांग्रेस को इसका फायदा मिलेगा। ब्यावरा विधानसभा क्षेत्र में रोचक प्रसंग यह भी है कि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और भाजपा के राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया फैक्टर नहीं हैं। सारा दारोमदार भाजपा के उम्मीदवार नारायण सिंह पवार को जिताने के लिए यदि शिवराज का दम दस गुना है तो भितरघात के चलते दिग्विजय सिंह का दम कम नहीं है। यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे कि ब्यावरा में शिवराज सिंह चौहान की प्रतिष्ठा बचेगी या फिर दिग्विजय सिंह बाजी मारेंगे, इस खास रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ङ्क्षसह ब्यावरा में आमने-सामने होंगे, लेकिन दोनों दलों में भितरघात एक तीसरा दल है, जो पर्दे के पीछे है। और इस भितरघात में नुकसान का जो अंदेशा है, उसकी बेचैनी भाजपा में ज्यादा दिखाई दे रही है। जहां तक सवाल है कांग्रेस के उम्मीदवार को भितरघात से बचाने की कोशिशों का तो इस मामले में दिग्विजय सिंह के पुत्र पूर्व मंत्री जयवद्र्धन सिंह 10 दिनों से जुटे हुए हैं।
खास रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।