दिग्विजय ङ्क्षसह एक बार सामने आ जाएं, भाजपा को प्रचार की जरूरत नहीं…

कड़वी खबर
मुरैना से
विजय कुमार दास
मो.9617565371

जनता को कमलनाथ का मर्यादा पुरुषोत्तम बनना पसंद नहीं आया, शिवराज खुद को कहें भूखा-नंगा, जनता को बर्दाश्त नहीं, जो बेरोजगारी मुद्दे की बात करेगा, वही ग्वालियर-चंबल में राज करेगा

मध्यप्रदेश में ग्वालियर-चंबल संभाग में 3 नवम्बर को होने वाले विधानसभा उप चुनाव में नेताओं की बानगी जनता को पसंद नहीं आ रही है, इसलिए यदि जुबान पर लगाम नहीं लगे तो खेल बिगड़ सकता है। जहां तक सवाल है ग्वालियर-चंबल संभाग में चुनावी समर के बड़े खोताखोरों के बारे में जनता की राय क्या है-
राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने अपनी टीम के साथ आज इसी की पड़ताल की है, जब हम ग्वालियर-चंबल के मुरैना जिले में होने वाले विधानसभा उप चुनाव के चारों विधानसभा क्षेत्र में जब पहुंचते हैं और अलग-अलग 10-10 लोगों से बात करते हैं, तब पता यह चलता है कि जनता को मूर्ख समझने की यदि कोई भूल करेगा तो वह पछताएगा जरूर। सबसे ज्यादा रोचक प्रसंग सुमावली विधानसभा क्षेत्र का है, जहां भाजपा के उम्मीदवार एदल सिंह कंसाना हैं। वे अपने भाषणों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को विकास पुरुष बताते हैं और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ङ्क्षसह को कमलनाथ सरकार में भ्रष्टाचार का बड़ा हिस्सेदार बताते हैं। वे कहते हैं कि वल्लभ भवन में बैठकर मुख्यमंत्री कमलनाथ योजनाओं के पैसे को अपने निजी सचिव मिगलानी के माध्यम से बोरियों में भरकर रवाना करते थे और हमें बताते थे कि इसमें फाइलें जा रही हैं। लेकिन जनता बड़ी समझदार है। वे एदल सिंह की इस बात पर यकीन नहीं करते। वह कहती है कि एदल सिंह तो कल तक दिग्विजय ङ्क्षसह के साथ थे, आज भाजपा में महाराज के साथ आ गए तो ऐसी बातें कर रहे हैं। लेकिन एदल सिंह जब यह कहते हैं कि ग्वालियर-चंबल में दिग्विजय सिंह एक बार सामने आ जाएं तो भाजपा को प्रचार की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस बात को 10 में से 10 लोग मानने का तैयार हैं। अब आइए कांग्रेस के दूसरे बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की बात। मेहगांव विधानसभा क्षेत्र में दस में से दस लोगों का मानना है कि कांग्रेस का उम्मीदवार अंदर से कड़क है, बाहर से मासूम और ब्राह्मणों के भरोसे यहां मैदान में उतर गया है। जो लोग कमलनाथ को नहीं जानते, वे कहते हैं कांग्रेस जनता को मूर्ख समझ रही है। ग्वालियर-चंबल की तासीर कमलनाथ को मालूम ही नहीं तो क्या हेलीकाप्टर से कमलनाथ चुनाव जीत जाएंगे। इस तरह के सवालों का बाजार यहां गरम है। जहां तक सवाल है भाजपा उम्मीदवारों का तो यह मानकर चलिए कि उम्मीदवार तो मोहरा हैं, महाराज-शिवराज ही प्रमुख किरदार हैं। इन दोनों के चेहरे पर ग्वालियर-चंबल का चुनाव लड़ा जा रहा है। भिंड में हमारी टीम ने गोहद विधानसभा के अलग-अलग उम्र के 10 लोगों से बातचीत की और पूछा कि मुख्यमंत्री के भाषणों में आपको क्या अच्छा लगता है तो सबने एक स्वर में कहा मुख्यमंत्री अपने आपको दूसरों के कहने पर भूखा-नंगा कहें, यह बात अच्छी नहीं लगती। इस समूह ने एक बात और ऐसी कही यदि शिवराज सिंह चौहान बेरोजगारों के लिए कोई ठोस प्रावधान करें, बेरोजगारी भत्ता दें या फिर पढ़े-लिखे बेरोजगारों को ग्वालियर-चंबल संभाग में ही सही एमएसएमई श्रेणी के अंतर्गत एक रुपए फिट में जमीन देकर उद्योग लगाने की बात करें तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो जाएगा। भिंड के एक दूसरे विधानसभा क्षेत्र, जहां चुनाव नहीं हो रहा है मतलब लहार में लोगों का कहना है कि कांग्रेस से सारे ठाकुर नाराज हैं। ऐसा नहीं है। उनका सम्मान चला गया है, इसलिए वे केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के साथ चल पड़े हैं। बात भी सही है कि नरेन्द्र तोमर ने भाजपा उम्मीदवारों को जिताने के लिये जान लगा दी है। अब आइए चौथा चेहरा महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया का, जिनकी प्रतिष्ठा है दांव पर। उनके बारे में किसी की दो राय नहीं है सबकी राय यही है कि सिंधिया ने सरकार बनाई है। भाजपा की सरकार रहेगी तो विकास होगा, इसलिए सिंधिया की बात पर न जात पर न पांत पर, मुहर तब लगेगी, जब सिंधिया अपने भाषणों में केवल मुद्दों की बात करें, मुहावरों की नहीं। दतिया के डबरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के उम्मीदवार तो भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच में महल की अंधभक्त हैं। इसके अलावा इसकी योग्यता विकास के परिपे्रक्ष्य में मात्र 15 प्रतिशत है। लेकिन इस विधानसभा क्षेत्र में भी सिंधिया के वायदे ही भाजपा की ताकत हैं। लेकिन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बिना नैया पार लगना संभव नहीं है। यहां पर भी लोगों ने यह कहा कि इस चुनाव में मुद्दे गायब हैं और मुद्दे की जो बात करेगा, वही यहां पर राज करेगा। डबरा के इस समूह से निकले इस वाक्या का पड़ताल हमने पूरा किया तो चंबल एक्सप्रेस वे को शिवराज-महाराज की बड़ी उपलब्धियों में गिनने वाले लोगों का कहना है कि शिवराज-महाराज अब विकास की बात करें, मुद्दे की बात करें, मुहावरों से पल्ला झाड़ें और एंटी इन्कंबैंसी फैक्टर से शिवराज सरकार को कितना नुकसान हो सकता है इस चुनाव में, यह खोज का विषय है लेकिन कमलनाथ के रवैये में यदि ठीक-ठाक परिवर्तन आता है तो इस बार न सही, 2023 के लिए कांग्रेस के द्वारा केवल कमलनाथ की ब्रांडिंग और कांग्रेस में कोई नहीं, यह मुद्दा बाद में काम आएगा। राष्ट्रीय हिन्दी मेल की यह कड़वी खबर किसी दल के बड़े नेताओं की जीत-हार का ऑकलन नहीं है। यह तो सिर्फ एक संकेत है कि नेताओं को चाहिए कि वे जनता को मूर्ख न समझें और मुहावरों से बचें और जरूरत इस बात की भी है कि वे समझें। महाआर्यन, कार्तिकेय, नकुलनाथ, जयवद्र्धन इस पीढ़ी को क्या देना चाहते हैं…?