मामा जी, काउंसिल का गठन कब…?

10000 फिजियोथेरेपिस्ट और स्टूडेंट्स पूछ रहे सवाल

विस में हो चुका है प्रस्ताव पारित, फिर भी लंबा इंतजार

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ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार
मो.09425002527

पूरे प्रदेश में ‘मामा के नाम से मशहूर हो चुके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से हजारों फिजियोथेरेपिस्ट यह पूछ रहे है कि मामा जी अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश में फिजियोथेरेपी काउंसिल का गठन आखिर कब होगा..? यह सवाल दिन-प्रतिदिन इसलिए बार-बार सामने आ रहा है कि क्योंकि बिना अतिरिक्त बजट के जब काउंसिल का गठन हो सकता है तो न जाने ऐसी कौन सी अद्रश्य शक्ति मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह फैसला लेने से रोक रही हैं। जबकि विधानसभा के पटल पर सत्र के दौरान पक्ष और विपक्ष ने सर्वसम्मति से इसे पारित किया जा चूका हैं। फिजियोथेरेपिस्टों की यह मांग इसलिए भी जायज है क्योंकि कि देश के अन्य 9 राज्यों में सरकारे जब यह फैसला फिजियोथेरेपिस्टों के हित में ले सकती है तो फिर मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार क्यों नहीं। 2003 में पैरामेडिकल काउंसिल का गठन कर फिजियोथेरेपिस्टों को इनके अधीन करके गाला घोटने जैसा काम तत्कालीन दिग्विजय सिंह की सरकार ने किया था। जब डाक्टरों और स्टूडेंट्स की संख्या कम होने का कारण बताकर काउंसिल का गठन नहीं किया गया। लेकिन आज की स्थिति ठीक इसके विपरित हैं। मतलब आज प्रदेश भर में 10000 फिजियोथेरेपिस्ट और स्टूडेंट्स हैं। जो अपनी सेवाएं निरंतर दे रहे हैं, इसलिए वे स्वतंत्र फिजियोथेरेपी काउंसिल बनाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर जगदीश जायसवाल का इस मामले में स्पष्ट कहना है कि एमपी में फिजियोथेरेपिस्टों के साथ दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। अन्य राज्यों की तरह काउंसिल का गठन करके मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक स्तर को बढ़ाने के लिए अपनी उदारवादी सोच का परिचय देना चाहिए। वहीं भौतिक चिकित्सा कल्याण संघ के मीडिया प्रभारी डॉक्टर सुनील पाण्डेय का कहना है कि फिजियोथेरेपी काउंसिल का गठन हमारा अधिकार हैं, जिसे राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से अमल में लाकर फिजियोथेरेपिस्टों को अलग पहचान देना चाहिए। जिससे साढ़े चार साल की पढ़ाई में स्टूडेंट्स एडमिशन लेने में अपनी रुचि दिखाएंगे और उनका स्तर भी बढ़ेगा। इसके अलावा शोषण होने की जगह वेतन में भी वृद्धि होगी। कुल मिलाकर बड़े-बड़े फैसले लेने की जिस मुख्यमंत्री को महारत हासिल है वे इतने छोटे मामले में इतना समय क्यों लगा रहे है यह बात किसी के गले से नीचे नहीं उतर रही है। खैर जो भी हो यह बात तो सत्य है कि मध्यप्रदेश के फिजियोथेरेपिस्टों की लड़ाई जायज है, जिसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गंभीरता से लेना चाहिए।