योगी के डर से मुख्तार अंसारी ने पंजाब की जेल को बनाया ठिकाना,

बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद की चार और आपराधिक मामलों में बेल भी खारिज

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रवैये से एक तरफ पंजाब के रोपड़ जेल में बंद विधायक और माफिया मुख्तार अंसारी के कथित रूप से डिप्रेशन में चले जाने की खबर है तो दूसरी तरफ एक और बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद की चार और आपराधिक मामलों में सेशन जज द्वारा दी गई जमानत को स्पेशल जज डाॅ. बालमुकुंद की कोर्ट ने निरस्त कर दिया। 
चर्चा है कि पंजाब के सीएम कै. अमरिंदर सिंह के परिवार से मुख्तार के गहरे संबंध हैं और इसीलिए  सुनियोजित तरीके से एक मामूली अपराध में मुख्तार ने खुद को पंजाब में गिरफ्तार करा लिया, जिससे योगी सरकार के कहर से बच सके क्योंकि उप्र में मुख्तार के अवैध साम्राज्य पर सीएम योगी का बुलडोजर चलना जारी है और 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति ध्वस्त की जा चुकी है। उसके समर्थकों पर भी गैंगस्टर एक्ट के तहत र्कारवाई लगातार जारी है। बताया जाता है कि मुख्तार ने लेने आई उप्र पुलिस को डायबिटीज से पीड़ित होने की मेडिकल रिपोर्ट दिखा दी जिसमें 3 महिने बेडरेस्ट की सलाह दी गई है।
उधर, अतीक की जमानत एक दूसरे मामले में भी निरस्त की जा चुकी है। जमानत मिलने की शर्तों के उल्लंघन के आरोप में कोर्ट ने यह फैसला लिया। अदालत ने यह आदेश शासन की ओर से दाखिल अर्जी पर एडीजीसी राजेश गुप्ता और विशेष लोक अभियोजक वीरेन्द्र कुमार सिंह के तर्कों को सुनने के बाद दिया। कोर्ट ने आरोपित की ओर से प्रति शपथ पत्र दाखिल करने को शासन की अर्जी निरस्त किये जाने का आधार नहीं माना।
उप्र सरकार की ओर से अतीक अहमद को मिली इन जमानतों को निरस्त करने के लिये 2017 में जमानत अर्जी दी गई थी। उसमें यह आधार बनाया गया था कि 2017 तक अतीक अहमद के खिलाफ 75 आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। अदालत ने कहा कि जमानत निरस्त करने के लिये पर्याप्त आधार हैं।
तत्कालीन इलाहाबाद जिले के धूमनगंज थाने में दर्ज अपहरण के मुकदमे में 29 मई 2009 को सेशन जज द्वारा जमानत अर्जी मंजूर की गई थी, धूमनगंज में ही 2009 में कातिलाना हमला के मामले में सेशन जज द्वारा 20 जुलाई 2001 को जमानत अर्जी स्वीकारी गई गई थी। खुल्दाबाद थाने में साल 2003 में दर्ज नसीम हत्याकांड में सत्र न्यायाधीश इलाहाबाद द्वारा 26 जुलाई 2003 को जमानत याचिका मंजूर की गई थी। कर्नलगंज थाने पर अतीक अहमद पर खुद पर हमला कराने की साजिश रचने के आरोप में साल 2002 में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मुकदमे में सत्र न्यायाधीश द्वारा 25 जुलाई 2003 को जमानत अर्जी स्वीकार की गई थी। जमानत बंद पत्र दाखिल कर दिये जाने पर इन मामलों में रिहा करने का आदेश दिया गया था।