( अरुण बंछोर) छत्तीसगढ़ में बड़े अफसरों का टोटा

रायपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव अमिताभ जैन अगर सीएस बन गए तो राज्य बनने के बाद यह पहला मौका होगा, जब एडिशनल चीफ सिकरेट्री में सिर्फ दो ही अफसर बचेंगे।, रेणु पिल्ले और सुब्रत साहू। वो भी तब, जब दोनों को समय से पहले पडीओनाटी मिली है। दरअसल, शीर्ष लेवल पर अफसर हैं ही नहीं। 87 बैच के सीके खेतान रेवन्यू बोर्ड में हैं। आरपी मंडल सीएस और बीवीबार सुब्रमणियम डेपुटेशन पर जम्मूकश्मीर के मुख्यसचिव हैं। 88 बैच में सिर्फ एक केडीपी राव थे, वे पिछले साल रिटायर हो गए। 89 बैच में सिंगल अमिताभ जैन हैं। 90 बैच खाली है। 91 में रेणु पिल्ले और 92 में सुब्रत साहू। 93 के अमित अग्रवाल डेपुटेशन पर हैं। मध्यप्रदेश में डेढ़ दर्जन प्रमुख सचिव हैं। छत्तीसगढ़ में गिनती के। विकास शील, निधि छिब्बर, रीचा शर्मा प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में हैं। प्रमुख सचिव में सिर्फ तीन आईएएस हैं छत्तीसगढ़ में। मनोज पिंगुआ, गौरव द्विवेदी और मनिंदर कौर द्विवेदी। पिंगुआ 94 बैच के हैं और द्विवेदी दंपति 95 बैच के। 96 बैच पूरा खाली है। असल में, राज्य बनने के बाद 2003 से आईएएस की संख्या बढ़नी शुरू हुई। वरना, 98 बैच में छत्तीसगढ़ में एक भी आईएएस नहीं है। 99 में सोनमणि बोरा हैं। 2001 में शहला निगार। 2002 में दो डाॅ0 कमलप्रीत सिंह और डाॅ0 रोहित यादव। छत्तीसगढ़ में 2003 से आईएएस का कैडर बढ़ना शुरू हआ। मंत्रालय में 2025 के बाद स्थिति कुछ सुधरेगी, जब 2004, 2005 और 2006 बैच प्रमोट होकर उपर आएंगे। सब कुछ ठीक रहा तो अमिताभ 30 नवंबर को ब्यूरोक्रेसी के अमिताभ बन जाएंगे। सब कुछ ठीक रहा का मतलब ये कि चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल के एक्सटेंशन का प्रपोजल भारत सरकार को गया हुआ है। राजस्थान के सीएस को एक्सटेंशन नहीं मिला, इसलिए मंडल का भी हंड्रेड परसेंट खारिज हो जाएगा, नहीं कहा जा सकता। पिछले साल अक्टूबर में मंडल आखिर कहां सोचे थे कि वे सीएस बन ही जाएंगे। फिर, अभी सूबे के सबसे सीनियर आईएएस सीके खेतान के रिटायरमेंट में आठ महीना बचा है। पुरूष के भाग्य का क्या कहा जा सकता है हालांकि, ये सब किसी चमत्कर से कम नहीं होगा। कुल मिलाकर पलड़ा तो भारी अमिताभ का ही है। वैसे भी ब्यूरोक्रेसी के अमिताभ को हड़बड़ी नहीं है। रिटायरमेंट में पूरे पांच साल बचे हैं। 2025 तक। अमिताभ अगर ट्रेक पर बने रह गए तो सीएस का रिकार्ड बनाएंगे। अभी तक ब्यूरोक्रेसी के इस शीर्ष पद पर इतना लंबा कोई नहीं रहा है। सबसे लंबा मुख्यसचिव का कार्यकाल विवेक ढांड का रहा है। वे करीब साढ़े चार साल सीएस रहे हैं।