विश्वरंग अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव 2020 का दूसरा दिन

सिंगापुर, यूएई, यूके, यूएसए और नीदरलैंड में आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रम, भारतीय संस्कृति का मिश्रण देखने को मिला

भोपाल। टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य और कला महोत्सव के दूसरे संस्करण के दूसरे दिन, सिंगापुर, यूएई, यूके, यूएसए में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए। विभिन्न देशों की संस्कृति, कला और साहित्यिक विरासत को मनाने वाले विश्वरंग अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव 2020 के विश्वरंग का दूसरा दिन डांस ड्रामा के साथ शुरू हुआ। यह डांस ड्रामा हिंदी कविता साकेत पर आधारित था। डांस ड्रामा का नाम था ‘उर्मिला द फॉरगॉटेन प्रिंसेस ऑफ मिथिलाÓ। पोन्नमा देवाइया ने इस कार्यक्रम में अपनी कला से सभी का मन मोह लिया।
विश्वरंग सिंगापुर में युवाओं के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिबोनर जोगियान के विक्टरी सॉन्ग ने कोरोना महामारी से आई मायूसी के बीच सभी में उम्मीद और उत्साह का संचार किया। उन्होंने ‘अ रे ऑफ होप ड्यूरिंग पैंडेमिक गाने से सभी को अभिभूत कर दिया। कार्यक्रम में आगे गांधी और टैगोर के बीच संबंधों पर भी चर्चा हुई, जो कि उस समय के नेताओं से काफी अलग थे।
एक शॉर्ट फिल्म के जरिए दोनों महापुरुषों के आपसी और वैचारिक संबंधों को समझने का प्रयास किया गया। सिंगापुर में हिंदी कैसे आगे बढ़ी है और यहां की संस्कृति पर हिंदी का क्या प्रभाव रहा है। इस विषय पर भी कार्यक्रम में चर्चा की गई। रंगमंच से मंटो, चीफ की दावत और झमेला जैसी रचनाओं ने सभी का मनोरंजन किया और भारतीय संस्कृति के बदलते आयामों की समझ भी सभी दर्शकों में भरी।
कार्यक्रम में आगे सिंगापुर की अनूठी कलाकृतियों का प्रदर्शन भी किया गया। विश्वरंग महोत्सव के सिंगापुर मंच में हिंदी साहित्य पर भी चर्चा हुई। इस सत्र का संचालन आराधना झा श्रीवास्तव ने किया। सबसे पहले गौरव उपाध्याय की किताब ‘हॉफ फिल्टर कॉफीÓ पर चर्चा हुई। यह किताब गौरव उपाध्याय की 30 मौलिक कविताओं का संग्रह है। अपनी इस किताब के जरिए उन्होंने युवा पाठकों के बीच काफी लोकप्रियता पाई है। इसके बाद शांति प्रकाश उपाध्याय के काव्य संकलन मेरी अनुभूतियां पर भी चर्चा हुई। शांति प्रकाश को लिखने की प्रेरणा उनके पिता से मिली और उनके पिता इस किताब के सह लेखक भी हैं। यह काव्य संग्रह पिता-पुत्र की रचनाओं का अनोखा संकलन है। उन्होंने इस किताब के लिए कोविड-19 को भी श्रेय दिया। लॉकडाउन में मिले समय के कारण ही वो इस पुस्तक को प्रकाशित कर पाने में सफल रहे हैं।

विश्वरंग के तहत दीवाली क्राफ्ट मेला और संगीत की गूंज

भोपाल। संस्कृति के विभिन्न रंगों से गुलजार विश्वरंग के अंतर्गत स्कोप कैंपस में शिल्पकला मेला गीत-संगीत की स्वर लहरियों के बीच अपनी अनूठी बानगियां बिखेरता रहा। त्यौहारी मौसम के साथ जुड़ी परंपरागत कलात्मक और सजावटी वस्तुओं की एक वृहद श्रृंखला विश्वरंग का अलहदा आयाम बना, वहीं दूसरी ओर शैडो ग्रुप के कलाकारों ने सुरों में छलकती बच्चन की मधुशाला और अन्य तरानों ने माहौल को रोमांचकारी अहसास दिया। गौरतलब है कि रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा साहित्य और कला के अंतरराष्ट्रीय महोत्सव विश्वरंग 2020 के तहत अनेक रंगारंग गतिविधियों का सिलसिला इन दिनों जारी है। शनिवार की सुबह आईसेक्ट के चेयरमैन और विश्वरंग के निदेशक संतोष चौबे ने शिल्पकला मेले का शुभारंभ किया। इस मेले में सुप्रीति चतुर्वेदी के निर्देशन में बी.एड. के विद्यार्थियों द्वारा तरह-तरह के दीवाली के दिए बनाए गये और विद्यार्थियों द्वारा मधुवनी पेंटिंग, साडिय़ां, चादर, ज्वैलरी, सूट, काष्ठ शिल्प के साथ काष्ठ को अलग-अलग रूप में कैनवास पर उकेरा गया। इस मौके पर सेक्ट कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन के डॉ. सतेन्द्र खरे और सेक्ट बी.एड. कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नीलम सिंह मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संयोजन टैगोर विश्वकला एवं संस्कृति केन्द्र के निदेशक विनय उपाध्याय ने किया। मनोज नायर के निर्देशन में स्कोप कैम्पस के मुक्ताकाश परिसर में शैडो ग्रुप के कलाकारों ने अपनी महफिल सजाई तो उनके कद्रदानों ने भी ताल पर ताल मिलाई। शुरुआत हरिवंश राय बच्चन की लोकप्रिय मधुशाला की रूबाईयों से हुई। उसके बाद इन कलाकारों ने संतोष चौबे द्वारा लिखित नाटक सुकरात पर गीत गुनगुनाया। प्रस्तुति का समापन रोचक ढंग से करते हुए शैडो ग्रुप के कलाकारों ने ‘साइकिल की चैन…. गाकर किया।