आबकारी आयुक्त का गुस्सा फूटा ‘सोम डिस्टलरी’ का भ्रम टूटा


सण्डे डायरी
विजय कुमार दास
मो.9617565371

मध्यप्रदेश में सरकार किसी भी दल अथवा किसी भी नेता की रही हो, भोपाल के सबसे बड़े शराब व्यापारी (Liquor Baron) जगदीश अरोरा को हमेशा यह गुमान रहा है कि वह शराब व्यापार अपनी शर्तों पर ही करेंगे। हालांकि उनके इस गुमान को पहली बार नकली बैंक ड्राफ्ट पकड़ कर तत्कालीन इंदौर कलेक्टर मनोज श्रीवास्तव ने चकनाचूर कर दिया था, परन्तु उसके बाद जगदीश अरोरा ने जैसा भी पोलिटिकल मैनेजमेंट किया, वे शराब के व्यापार में नकली बैंक ड्राफ्ट कांड में एफ.आई.आर. होने के बाद भी आज तक सुरक्षित रूप से व्यापार करने में सफल रहे हैं। यूं कहा जाए कि जगदीश अरोरा एक चतुर, चालाक एवं बेहतर प्रबंधन वाले फितरती शराब व्यापारी (Liquor Baron) बनने में आज तक कामयाब हो गए। हालांकि जगदीश अरोरा के बारे में कहा जाता है कि वे आज भले ही शराब व्यापार में एक बड़ा नाम है, परन्तु उन्हें इस शराब के गोरखधंधे में ‘डाउन-टू-अर्थ कहा जाता है, मतलब जब अरोरा ने शराब के व्यापार में कदम रखा तो बताते हैं कि वे साइकिल से शराब की बोतलों की सप्लाई होटलों में एवं बारों में किया करते थे, लोग अरोरा को एक मेहनतकश Country Liquor सेल्समैन मानते थे। अरोरा का यही आत्मविश्वास उन्हें मध्यप्रदेश मेें नंबर वन का शराब व्यापारी (Liquor Baron) बनाता भी है। परन्तु गुरूर इतना कि सरकार की आबकारी नीति, आबकारी अधिकारियों में तबादलों तक का हस्तक्षेप तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार से लेकर कुछ आगे तक नहीं छुपा है। परन्तु यह एक खुशखबर है कि आबकारी आयुक्त राजीव चंद्र दुबे ने मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार ‘सोम डिस्टलरीज जिसके जन्मदाता मालिक जगदीश अरोरा हैं, उस पर हमला बोल दिया है। यूं कहा जाए कि 19 जनवरी 2021 का दिन जगदीश अरोरा के लिए शराब व्यापार में सबसे बड़ा तनाव का दिन रहा होगा, जब आबकारी आयुक्त ने मध्यप्रदेश आसवनी नियम 1995 के प्रावधानों का पालन नहीं करने के कारण सोम डिस्टलरीज सेहतगंज, रायसेन स्थित डी-1 लाइसेंस वाली शराब कारखाने को नोटिस पकड़ा दिया। आबकारी आयुक्त ने सीधे-सीधे भयंकर गुस्से के साथ जगदीश अरोरा को चुनौती दी है और कहा है कि सोम डिस्टलरीज में संभागीय उडऩदस्ते ने छापा मारने के बाद रिपोर्ट दी है कि उपरोक्त इकाई में मध्यप्रदेश आसवनी अधिनियम 1995 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया गया है। मतलब प्रावधान के अनुसार सोम डिस्टलरीज में अधोसंरचना के निर्माण के बगैर ही कारखाना वर्षों से चल रहा है, जो प्रदूषण एवं अन्य कई प्रकार के विषाक्त फैलाने के लिए जिम्मेदार हो सकता है। इसलिए बताते हंै कि कारण बताओ नोटिस में मात्र 7 दिन का समय जवाब के लिए दिया गया है और सोम डिस्टलरीज की स्पीरिट रिसीवर टैंक क्रमांक-आर-1 से आर-11 तथा स्पीरिट स्टोरेज टैंक क्रमांक-एसवी-12 से लेकर एसवी-19 तक जो खुले आसमान में असुरक्षित पाई गई थी, उसे सील कर दिया गया है। इस संडे डायरी का लब्बोलुआब यही है कि राजीव चंद्र दुबे आबकारी आयुक्त किसी प्रलोभन में नहीं आते, यह बात प्रमाणित हो गई है। और इतिहास में पहली बार किसी आबकारी आयुक्त ने शराब व्यापारी (Liquor Baron) जगदीश अरोरा, जिसकी कोठी मुख्यमंत्री निवास से भी बड़ी है, उस पर शिकंजा कसा है, बड़ी घटना है।

संडे डायरी के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।