स्वागत शिवराज सत्याग्रह को सबका समर्थन

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास
मो.9617565371

मध्यप्रदेश में पौने आठ करोड़ की आबादी मानव इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 24X7 जागरूक रहकर और जनता की जिन्दगी को कोरोना संक्रमण की महामारी के प्रकोप से और दहशत से निजात दिलाने के लिए ‘स्वास्थ्य-आग्रह का प्रयोग किया है तो यह महात्मा गांधी की 1930 वाली नमक सत्याग्रह के अभियान से भी एक बड़ा सत्याग्रह है, जिसे सभी वर्ग का समर्थन मिलना ही चाहिये। क्योंकि यहां अब करोड़ों जिन्दगी की सुरक्षा का सवाल खड़ा है। यह बात अलग है तब महात्मा गांधी भारतीयों को नमक बनाने से रोकने वाले कानून के खिलाफ सत्याग्रह करते अहमदाबाद से 240 कि.मी. दांडी की यात्रा 10 हफ्तों में पूरी की, लेकिन अंग्रेजों के होश उड़ा दिये थे, परन्तु 80000 लोगों की जेल यात्रा भारतीय मानव इतिहास में उस वक्त अंग्रेजों की तानाशाही रवैये के कारण सबसे बुरा वक्त था, और आज हम पूरे देश में मानव इतिहास के सबसे बुरे वक्त के दौर से गुजर रहे हैं। जिसमें एक जिंन्दगी बचाने की जद्दोजहद हो तो बात दूसरी है परन्तु जिसमें पूरे राज्य की जनता को मौत के खतरे से बाहर करने के लिए मास्क लगाओ, अभियान में राज्य के मुख्यमंत्री को सत्याग्रह करना पड़े तो इससे ज्यादा और किसी राज पुरूष से अपेक्षा करना बेइमानी ही कहलायेगी। शायद इसीलिए ‘स्वास्थ्य आग्रह को पूरे प्रदेश ने जिसमें नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ तक सम्मिलित हैं सत्य का आग्रह मानकर पूरे मन से समर्थन भी किया है। और तो और मुख्यमंत्री ने जब निजी अस्पतालों में कोरोना के आड़ में चल रही खुली लूट को संज्ञान में लेते हुए ‘मंच से यह घोषणा की कि अब कोरोना टेस्टिंग की फीस भी कम होगी और इलाज की दर भी निर्धारित शुल्क से ज्यादा कोई चार्ज नहीं करेगा, तो मीडिया को भी लगा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह वैसे तो 16 वर्ष मुख्यमंत्री के रूप में जनता के प्रधान सेवक कहलाने वाले मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री हंै, तो कोरोना काल में महत्वपूर्ण अखबारों एवं चैनलों की खबरों को संज्ञान में लेकर त्वरित निर्णय करने वाले भी पहले मुख्यमंत्री हो गये हंै। सेन्ट्रल प्रेस क्लब ने तो स्वास्थ्य आग्रह का सम्पूर्ण समर्थन किया है और पूरे प्रदेश में मीडिया से भी यही अपील की है कि मुख्यमंत्री के जागरूकता अभियान से जुड़े। मध्यप्रदेश की समूची मीडिया यदि जनता की जिन्दगी बचाने के लिए शिवराज जी का सत्य से आग्रह को सत्य मतलब सत्याग्रह समझ ले (स्वास्थ्य आग्रह) उसका खुलकर समर्थन भी करें तो मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार मीडिया से अनुरोध को न्याय संगत बनाया जा सकेगा। मीडिया को भी अब यह मानकर शिवराज के साथ खड़ा होना पड़ेगा कि ‘स्वास्थ्य-आग्रह अभियान राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी आस्था से उपर उठकर जनता के हित में चलाया गया शिवराज सिंह चौहान का सबसे बड़ा अभियान है, जिसमें मास्क नहीं तो बात नहीं, घर पर रहें सुरक्षित रहें, यह जागरूकता मिशन जिन्दगी बचाने के लिए सबसे बड़ा उपक्रम है, इसलिए स्वागत शिवराज लिखने में संकोच भी नहीं है। परन्तु मैदानी और जुझारू मीडिया को शिवराज सरकार में अभी तक ‘कोराना योद्धाÓ नही माना है उनका यह बर्ताव मीडिया की उपेक्षा का एक संदेश भरा हिस्सा बन गया है, इसे शीघ्र दूर करते हुए शिवराज जी को उन पत्रकारों को खुले दिल से राजस्थान राज्य की तर्ज पर कोरोना योद्धा घोषित कर देना चाहिए जिन्होंने कोविड-काल में पूरे वर्ष भर मैदानी रिपोर्टिंग की है और रात-दिन मीडिया संस्थानों में खबरों के संपादन में अहम भूमिका निभाई है। खैर मुख्यमंत्री की समझदारी पर सवाल खड़ा करना हमारी इस विशेष संपादकीय का मकसद नहीं है, हमारी तो कोशिश है यदि मानव इतिहास के इस बुरे दौर में मध्यप्रदेश सरकार मैदानी मीडिया की भूमिका को सकारात्मक समझती है तो ऐसी मीडिया को कोरोना योद्धा घोषित करने में देर नहीं होनी चाहिए। जहां तक सवाल है ‘शिवराज जी आपके ‘स्वास्थ्य-आग्रह का तो आज तक के जितने भी भूल आपसे हुए होंगे जनता और मीडिया दोनों उसे भूलने को तैयार हैं, साथ चलिये-हम सब आपके अभियान को घर-घर पहुंचायेंगे, यकीन मानिये आपका यह सत्याग्रह 100 प्रतिशत सफल होगा, कोरोना हारेगा।

विशेष संपादकीय
के लेखक इस
पत्र समूह के
प्रधान संपादक हैं।