सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का नहीं हो रहा निराकरण

भोपाल, 5 मार्च। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का निराकरण करने में कलेक्टर जी चुराने लगे हैं। खासतौर पर मनरेगा से संबंधित शिकायतों को जिले स्तर पर परीक्षण न करते हुए सीधे मुख्यालय (राज्य स्तर पर) भेज रहे हैं। कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत की इस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए मप्र राज्य रोजगार गारंटी परिषद की आयुक्त जीवी रश्मि ने नसीहत दी है।
सभी विभागों को जानकारी भेजी गई है कि मुख्यमंत्री मार्च में सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा करेंगे। सीएम का प्रमुख फोकस ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं और योजनाओं का लाभ नहीं मिलने संबंधी की गई शिकायतों पर होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र जारी होने के बाद विभाग प्रमुखों ने कलेक्टरों को टारगेट पर लिया है। रोजगार गारंटी परिषद ने सभी जिलों का स्टेटस मंगा लिया है। इसमें 40 जिलों के कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत का परफारमेंस बेहद पुअर पाया गया है।
मनरेगा से संबंधित कुल शिकायतों की प्रारंभिक स्थिति है कि 6 हजार से अधिक सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को स्पेशल क्लोज में डाल दिया है। जबकि एक हजार से ज्यादा आंशिक तौर पर बंद कर दी गई हैं। दो हजार से अधिक शिकायतें अभी भी निराकरण का इंतजार कर रही हैं।
मनरेगा जानकारी पहुंची है कि कलेक्टर अधिकांश शिकायतों का जिला स्तर पर निराकरण नहीं करते हुए विभाग प्रमुखों पर थोप रहे हैं। राज्य स्तर पर बढ़ रही सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को देखते हुए आयुक्त मनरेगा ने कलेक्टरों को नसीहत दी है कि लंबित शिकायतों का फिर से परीक्षण करें उनका समाधानकारक निराकरण करें। नीतिगत शिकायतों को ही आगे बढ़ाएं। बाकी सभी प्रकरण जिला स्तर पर ही निराकरण करें।