देश में 1 अप्रैल से लागू होगा अंतर्राज्यीय ई-वे बिल:जेटली

नई दिल्ली, 11 मार्च। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने शनिवार को अंतिम निर्णय लिया कि एक अप्रैल 2018 से देशभर में अंतर्राज्यीय ई-वे बिल लागू होगा। जीएसटी परिषद की 26वीं बैठक के बाद अरूण जेटली ने कहा, अंतर्राज्यीय ई-वे बिल राज्यों के चार समूहों के साथ चरणों में लागू होगा। एक अप्रैल के बाद हर सप्ताह एक के बाद एक समूह इसके अधीन आ जाएगा और अप्रैल के अंत तक पूरे देश में इसे लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
इससे पहले 24 फरवरी को बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिसमूह की बैठक में अंतर्राज्यीय माल ढुलाई के लिए ई-वे बिल एक अप्रैल से अनिवार्य रूप से लागू करने की सिफारिश की गई थी। जीएसटी व्यवस्था के तहत 50,000 रुपए से अधिक मूल्य की वस्तुओं की ढुलाई के लिए ई-वे बिल तैयार करने और उसे मालवाहक वाहन के साथ ले जाने की जरूरत है। जेटली ने यह भी कहा कि परिषद ने रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया के लिए दो वैकल्पिक विधियों पर विचार किया है। लेकिन इस संबंध में अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है।
जेटली ने बताया, रिटर्न दाखिल करने की मौजूदा प्रक्रिया को अगले तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के समूह और सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ आज विमर्श किए गए मॉडल की जांच करेंगे, जिसके बाद अमल में लाने पर निर्णय लिया जाएगा। रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म लागू करने का फैसला भी अगले तीन महीने के लिए टाल दिया गया है। रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म के तहत खरीदार को वस्तुओं की खरीद पर जीएसटी अदा करना पड़ता है। यह उस मामले में लागू होता है जहां जीएसटी के तहत पंजीकृत कारोबारी ऐसे आपूर्तिकर्ता से वस्तु खरीदता है जो जीएसटी के तहत पंजीकृत नहीं है।
जीएसटी काउंसिल शनिवार की बैठक में जीएसटी के सरल फार्म के बारे में किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सकी। काउंसिल ने इस संबंध में बिहार के उप- मुख्यमंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता वाली समिति को एक पन्ने का फार्म तैयार करने को कहा है जो कि सरल हो और टैक्स चोरी से निजात दिलाने वाला हो। जेटली ने कहा कि जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की मौजूदा व्यवस्था जीएसटीआर-3 बी को ही 3 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही निर्यातकों को दी गई कर छूट को भी 6 महीने यानी सितंबर तक जारी रखने का फैसला किया गया है।