शिकायत मिलने से बिफरे मुख्यमंत्री, दिखाए कड़े तेवर

रायपुर, 18 मार्च। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के लिए लापरवाही अक्षम्य अपराध है, चाहे वह बड़े से बड़े नौकरशाह ही क्यों ना हो, गरियाबंद कलेक्टर श्रुति सिंह की अचानक विदाई ने सभी चौंका दिया! सबसे ज्यादा हैरानी इसी बात से हुई, मुख्यमंत्री के लोक सुराज के दौरान गरियाबंद से विदा हुए अभी घंटा भी नहीं गुजरा कि तबादला आदेश जारी हो गया। मुख्यमंत्री सप्ताह में दूसरी बार गरियाबंद पहुंचे थे, लेकिन दोनों बार जिले के परफार्मेंस से वो नाखुश दिखे। अलग-अलग योजनाओं के क्रियान्यवन में जिले का ग्राफ काफी नीचे दिखा। आज भी माडागांव में लोक समाधान शिविर में मुख्यमंत्री योजनाओं के क्रियान्वयन पर खुश नहीं थे। शिविर में राजस्व संबंधी मामलों की कई शिकायतें पाई गईं, जिस पर डॉ रमन सिंह ने गरियाबंद कलेक्टर से सवाल जवाब किया और पूछा कि लापरवाह अधिकारियों पर आपने क्या कार्रवाई की, सीएम ने वहीं पर श्रुति सिंह के जवाब पर नाराजगी जाहिर की, समाधान शिविर से निकलते ही मुख्यमंत्री ने इरादा कर लिया, कि गरियाबंद कलेक्टर को बदला जाएगा। लिहाजा मुख्यमंत्री चौपर पर जैसे ही बैठे, उन्होंने पास ही बैठे चीफ सेक्रेटरी अजय सिंह और पीएस अमन सिंह से इस बारे में चर्चा। करीब तीन हजार की फीट की ऊंचाई पर कलेक्टर बदलने को लेकर चर्चा हुई और फिर जैसे ही चौपर दुर्ग के थनौद में उतरा, चीफ सेक्रेटरी अजय सिंह ने जीएडी में काल लगाया और 5 मिनट के भीतर तबादला आदेश जारी कर फैक्स से गरियाबंद भेज दिया गया। मुख्यमंत्री को गरियाबंद कलेक्टर हटाने को लेकर ये कड़क तेवर, ठीक उसी तरह का रहा, जैसा पिछले लोक सुराज में रहा था। याद होगा आपको पिछली बार सुराज में जिलों के परफार्मेंस से नाराज मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कोरिया कलेक्टर एस. प्रकाश को और सूरजपुर कलेक्टर जी. चुरेंद्र को तत्काल हटाने के आदेश जारी किया था। वैसे अगर देखा जाए तो श्रुति सिंह को यूपी डिप्युटेशन पर जाना था, जहां उनके हसबैंड फोर्स में पोस्टेड हैं, लेकिन चूंकि अभी लोक सुराज अभियान चल रहा है, लिहाजा अप्रैल तक के लिए कलेक्टरों के तबादला टाल दिये गये थे। लेकिन गरियाबंद जिले के परफार्मेंस की वजह से श्रुति सिंह को वक्त के पहले ही बदल दिया गया। मुख्यमंत्री यहीं पर नहीं रुके। बीज वितरण नहीं करने की शिकायत पर उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारी को जमकर फटकार लगाई और निलंबित कर दिया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कई जगह अभियान के दौरान अफसरों को अच्छा काम और लोगों की समस्याएं सुलझाने का निर्देश दिया था। साथ ही बढिय़ा काम करने वाले अफसरों की पीठ भी थपथपाई। मुख्यमंत्री ने सुपेबेड़ा पीडि़तों को 50-50 हजार रुपए देने का बड़ा ऐलान किया। ग्रामीणों ने रमन को जब पेयजल की परेशानी बताई तो उन्होंने माडगांव तथा कूमढई खुर्द में पेयजल टंकी की घोषणा कर दी। साथ ही उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के जमीन विवाद सुलझाने के लिए कलेक्टर को निर्देश दिया।
वहीं धमतरी के डोंगरडुला ग्राम पंचायत की चौपाल में कुछ ऐसा वाकया हुआ, कि पूरी चौपाल ठहाकों से गूंज उठी। हुआ यूं कि साल पेंड़ के नीचे लगी मुख्यमंत्री की चौपाल में ग्रामीण बारी-बारी से अपनी समस्या बता रहे थे। मुख्यमंत्री भी ग्रामीणों से आत्मीय अंदाज में योजनाओं के तहत मिलने वाली सुविधा की जानकारी ले रहे थे, इसी दौरान मुख्यमंत्री ने अचानक ग्रामीणों से पूछ लिया- किस-किस को चरण पादुका मिली है, मुख्यमंत्री के इस सवाल का जवाब मौजूद सभी ग्रामीणों ने एक सुर से ना में दिया। ग्रामीणों से ना सनुकर मुख्यमंत्री ने तत्काल फारेस्ट रेंजर को बुलाया और पूछा कि इन लोगों को चरण पादुका क्यों नहीं बांटा गया, मुख्यमंत्री के कड़क तेवर में पूछे इस सवाल पर रेंजर को मानों सांप सूंघ गया। रेंजर ने जब चुप्पी साध ली, तो डिप्टी रेंजर को बुलाया गया, वो भी कुछ नहीं बोला, बाद में फारेस्ट गार्ड को बुलाया, वो भी जवाब नहीं दे सका, तो मुख्यमंत्री ने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए कहा कि मेरे सामने जवाब नहीं दे पा रहे हो, या फिर चरण पादुका बटी ही नहीं। मुख्यमंत्री ये कहते-कहते खुद भी हंसने लगे, जिसके बाद पूरे चौपाल में ठहाके गूंज उठे। मुख्यमंत्री के साथ-साथ चीफ सेक्रेटरी अजय सिंह, पीएस टू सीएम अमन सिंह, सेक्रेटरी टू सीएम मुकेश बंसल, सेक्रेटरी पीआर राजेश टोप्पो, एसपी रजनेश सिंह सहित ओएसडी विक्रम सिसोदिया और तमाम लोग खुद की हंसी नहीं रोक पाए। मुख्यमंत्री ने मौके पर फारेस्ट विभाग के अफसरों को 8 दिन के भीतर सभी लाभार्थियों को चरण पादुका वितरित करने का आदेश दिया।