निमोनिया से बचाएगा पीसीव्ही वैक्सीन

सुनीता दुबे
टीकाकरण सत्र पर बच्चे के अभिभावकों को चार प्रमुख संदेश दिये जाते हैं
आज कौन-कौन सी वैक्सीन दी गई और वे कौन-कौन सी बीमारियों से सुरक्षा करती है।
अगली बार टीकाकरण के लिये कब और कहाँ आना है।
वैक्सीन लगने पर कौन से मामूली साइड इफेक्ट हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिये।
टीकाकरण कार्ड संभाल कर रखें और उसको अगली बार साथ लेकर आयें।

न्यू मोनिया एवं डायरिया 5 साल से छोटे बच्चों में मृत्यु के प्रमुख कारण हैं। न्यूमोकोकस बैक्टीरिया न्यूमोनिया का एक मुख्य कारण है। यह स्वस्थ लोगों के नाक और गले में बिना किसी बीमारी किए हुए भी पाया जाता है। यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है और कई बीमारियों जैसे- न्यूमोनिया, ब्लड इन्फेक्शन, दिमागी बुखार, कान का इन्फेक्शन आदि करता है।
न्यूमोकोकल बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को खांसने और छींकने से फैलती है। यह बैक्टीरिया 5 साल से छोटे बच्चों को, खासकर 2 साल से छोटे बच्चों को, कम प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों को एवं वृद्ध लोगों को बीमार कर सकता है। पीसीव्ही वैक्सीन न्यूमोकोकस बैक्टीरिया से होने वाले न्यूमोनिया एवं अन्य बीमारियों से बचाव का सबसे कारगर तरीका है। इस वैक्सीन के इस्तेमाल से बच्चों में न्यूमोनिया बीमारी और बाल मृत्यु दर में काफी कमी आयेगी। पीसीव्ही महंगी वैक्सीन है, जो अभी तक केवल प्रायवेट डॉक्टरों के पास ही उपलब्ध थी। प्रायवेट में पीसीव्ही के एक डोज की कीमत लगभग तीन से चार हजार रुपये है। भारत सरकार अब उसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में मुफ्त में उपलब्ध करा रही है। पहला चरण 2017 में उत्तर प्रदेश (6 जिले), बिहार (17 जिले), हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में नियमित टीकाकरण के अंतर्गत सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है। दूसरे चरण में इस वैक्सीन को बिहार (21 जिले), उत्तर प्रदेश (6 जिले), राजस्थान (9 जिले) और मध्यप्रदेश के सभी जिलों में नियमित टीकाकरण के अंतर्गत शुरू किया जा रहा है।
पीसीव्ही वैक्सीन तीन टीकों के रूप में दी जायेगी (दो प्रायमरी टीके और एक बूस्टर)। दो प्रायमरी टीके क्रमश: डे? महीने (6 सप्ताह) और साढ़े 3 महीने (14 सप्ताह) की उम्र पर और बूस्टर टीका 9 महीने की उम्र पर दिया जायेगा। पीसीव्ही की पहली डोज 6 सप्ताह की उम्र पर ओपीव्ही -1, पेंटा-1 और अन्य निर्धारित टीकों के साथ दी जायेगी। पीसीव्ही वैक्सीन शरीर के दांई मध्य जांध के आगे एवं बाहरी भाग में, 0.5 द्वद्य की डोज में और इंट्रामस्कुलर तरीके से लगाया जाता है। आशा को मिलने वाले पूर्ण टीकाकरण मानदेय में पीसीव्ही वैक्सीन भी शामिल है। अब पीसीव्ही वैक्सीन राष्ट्रीय टीकाकरण सारणी में शामिल है। आशा को पूर्ण टीकाकरण का मानदेय तभी मिलेगा जब बच्चे को एक वर्ष के भीतर लगने वाले सभी टीके एक वर्ष की आयु से पहले लग जायेंगे।
यह नई वैक्सीन नहीं है। यह सन 2000 से अन्य देशों में इस्तेमाल की जा रही है और अभी 141 देशों के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल है। इस वैक्सीन के इस्तेमाल से उन देशों के बच्चों में न्यूमोनिया बीमारी और बाल मृत्यु दर में काफी कमी आयी है। भारत में प्रायवेट डॉक्टरों द्वारा यह वैक्सीन 2006 से लगाई जा रही है। इस वैक्सीन को अब तक उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश के चिन्हित जिलों में 2017 मध्य से लागू किया जा चुका है। पीसीव्ही कवरेज रिपोर्ट दिसम्बर 2017 के अनुसार लगभग 11 लाख सफल टीके इन चिन्हित जिलों में लगाये जा चुके हैं।
पीसीव्ही पूरी तरह सुरक्षित एवं कारगर वैक्सीन है। वैक्सीन के लगने से गंभीर दुष्प्रभाव की संभावना न के बराबर है। वैक्सीन लगने की जगह पर हल्का दर्द या हल्का बुखार हो सकता है। वैक्सीन से होने वाले फायदे इसके मामूली साइड इफेक्ट से कहीं ज्यादा है। अगर बच्चे को बुखार आता है तो पैरासिटामोल की एक खुराक निर्धारित मात्रा में दी जा सकती है। समय से पहले जन्में बच्चे (9 महीने से पहले) को भी पीसीव्ही वैक्सीन डेढ़ महीने की उम्र पर दिया जा सकता है। यह वैक्सीन मामूली बीमारी, बुखार, जुकाम या दस्त होने पर भी सुरक्षित है। अगर बच्चा ज्यादा बीमार है तो डॉक्टर की सलाह लेकर टीकाकरण करवायें। एक बार में एक से ज्यादा इंजेक्शन लगाना पूरी तरह से सुरक्षित है। सभी देय टीके एक साथ नहीं दिए जाने पर बच्चा लम्बे समय तक उन बीमारियों से असुरक्षित रहेगा। एक ही बार में एक से ज्यादा देय इंजेक्शन देने से बच्चा जल्दी ही बीमारियों से सुरक्षित हो जाता है। इसके अलावा एक साथ इंजेक्शन देने से बार-बार टीकाकरण सत्र पर भी नहीं आना पड़ता।
पीसीव्ही का डोज टीकाकरण एससीपी कार्ड में दर्ज किया जाना है, जो कि डेढ़ महीने (पीसीव्ही -1), साढ़े तीन महीने (पीसीव्ही -2) तथा 9 महीने पर (पीसीव्ही बूस्टर) अन्य टीकों के साथ दर्ज होना है। पीसीव्ही वैक्सीन से न्यूमोनिया बीमारी और बाल मृत्यु दर में कमी आयेगी। बच्चों को अन्य बैक्टीरिया या वाइरस से न्यूमोनिया हो सकता है, परन्तु पेंटा और पीसीव्ही वैक्सीन बच्चों में होने वाले न्यूमोनिया के मुख्य कारणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।