राहुल जी ने गांधी परिवार के कद और परंपरा का पालन किया

दरअसल राहुल गांधी जी कांग्रेस को आज के समय में देश की जनता विशेषकर युवाओं की अपेक्षा की कांग्रेस बनाना चाहते हैं। इसके पीछे उनके दो स्वार्थ हैं जो गांधी-नेहरू परिवार के हमेशा रहे हैं, एक- कांग्रेस के मूल्यों, सिद्धांतों और नीतियों को जिंदा रखना और दूसरा है, देश का लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाएं और संविधान सुरक्षित रहे, उसे कोई ताकत नष्ट न कर सके। कांग्रेस पार्टी को हमेशा मजबूत नेतृत्व हासिल आजाद भारत में हुआ है।
आजादी आंदोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सुभाषचंद बोस, जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा जी, राजीव गांधी जी, नरसिम्हा राव, मनमोहन सिंह या सोनिया गांधी हों। हमें कांग्रेस पर गर्व है कि देश की तरक्की और उसके मुकम्मल विकास में इन नेताओं के नेतृत्व में भारत पूरे विश्व में एक ताकतवर राष्ट्र के रूप में उभरा। इस कड़ी में राहुल गांधी जी ने एक चुनौतिपूर्ण समय में देश में असहमति को कुचलने, राष्ट्र को भ्रमित करने जैसे संविधान विरोधी ताकतों से मुकाबला करने की ठानी और कांग्रेस अध्यक्ष बने। सत्ता के प्रति उनका आग्रह कितना है यह राहुल गांधी जी ने कांग्रेस याने यूपीए सरकार के समय जाहिर कर दिया था। उन्होंने पद नहीं गांधी परिवार के कद और परंपरा का पालन किया। उन्होंने अपने को ऊपर से थोपे जाने वाले नेता के रूप में नहीं बल्कि चुनौतियों का मुकाबला करते हुए आगे बढऩे का रास्ता तय किया है।
राहुल जी आज देश में उन शक्तियों के बीच एक उम्मीद बनकर उभरे हैं जो देश के संविधान को इसकी समरसता को और विविधता को संरक्षित एवं समृद्ध करना चाहते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उनका सामना गुजरात और फिर कर्नाटक चुनाव से हुआ। जहां उनका मुकाबला धन, बल, झूठ, कुटिलता से ओतप्रोत लोगों से था। जिनके लिए चुनाव युद्ध था और जीत लाश की राजनीति करके हासिल करना है। इन ताकतों को इन्हीं के प्रयोगशाला और मॉडल बने गढ़ पर जाकर ललकारना कोई आसान काम नहीं था। आज सत्ता में जो लोग बैठे हैं उनसे आगे बढ़कर मुकाबला करना होगा। जिनका संविधान पर, लोकतंत्र पर उनके स्तंभों पर कोई विश्वास नहीं है। जिन्होंने मात्र 4 साल में बता दिया की आजादी के पहले और बाद में उन्हें फासिस्टवादी बताया जाता था, वह कितना सच है।
राहुल जी ने भारतीय राजनीति में भारतीय संस्कारों से प्रेरित राजनीति की। उन्होंने गुस्से से नहीं प्रेम, सद्भाव के साथ विरोधियों को जवाब दिया। जिसके लिए पूरे विश्व में भारत जाना जाता है। उन्होंने अपने प्रतिपक्ष के लोगों का चरित्र हनन नहीं किया। उन्होंने तथ्यों पर बात की। मोदी सरकार के चार साल में उनकी विफलताओं और झूठ को प्रमाणों के साथ जनता के सामने बताया। गुजरात और उसके बाद कर्नाटक में उन्होंने राजनीति में एक नई संस्कृति को लांच किया। उन्हें भलें ही गुजरात में सफलता नहीं मिली पर गुजरात सहित पूरे भारत ने माना की वहां राहुल गांधी जी की नैतिक जीत हुई है।
उन्होंने पूरे देश को यह भी बताया कि गुजरात चुनाव के नतीजे बताते हैं कि इस प्रदेश का पूरा विकास का दावा करने वाले लोगों की असलियत क्या है। गुजरात हमेशा से एक आगे बढ़ता प्रदेश रहा है। यहां के बाशिंदे उद्यमशील है इसलिए गुजरात गुजरात है न की शेख चिल्लियों की वजह से वह गुजरात है। कर्नाटक में राहुल जी सत्ता के पीछे नहीं भागे उन्होंने जनादेश का सम्मान किया पर उन ताकतों को सत्ता में काबिज होने से रोका जिनसे देश के लोकतंत्र और उसकी संस्कृति को खतरा है।
राहुल जी ने अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति को बदला है। सकारात्मकता और माइक्रो मैनेजमेंट के साथ, जमीनी स्तर पर काम करने की उनकी नीति ने कांग्रेस को एक नया जीवन दिया है। उन्होंने कांग्रेस के अनुशांगिक संगठनों में नए सिरे से सुगठित करने की प्रक्रिया प्रारंभ की है। ये वे शाखाएं है जिनसे पार्टी मजबूत होगी और उसका जनाधार बढ़ेगा।
उन्होंने पार्टी के अनुभवी और नई ऊर्जा के बीच बेहतर समन्वय बनाने का काम शुरू किया। च्ज्दरअसल वे कांग्रेस को आज के समय में देश की जनता विशेषकर युवाओं की अपेक्षा की कांग्रेस बनाना चाहते हैं। इसके पीछे उनके दो स्वार्थ हैं जो गांधी-नेहरू परिवार के हमेशा रहे हैं, एक- कांग्रेस के मूल्यों, सिद्धांतों और नीतियों को जिंदा रखना और दूसरा है, देश का लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाएं और संविधान सुरक्षित रहे, उसे कोई ताकत नष्ट न कर सके। कांग्रेस जन को अब अपने नए नेतृत्व के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा। उनके हर कदम पर साथ देना होगा। क्योंकि एक बार फिर देश संकट में है। सुनियोजित रूप से स्लो पाईजन शैली में प्रजातंत्र की नींव को खोखला किया जा रहा है। जिससे विश्व के सबसे बड़ा लोकतंत्र खत्म हो जाए और उन लोगों के मंसूबे पूरे हो जो देश को तोडऩा चाहते हैं। भारत के लिए यह लड़ाई अकेले राहुल जी की नहीं है हर कांग्रेसजन की है। हम सभी लोगों को कांग्रेस के अतीत की ओर लौटना होगा और उस समय के जज्बे जुनून के साथ सर पर फेंटा बांधकर राहुल जी के नेतृत्व में कांग्रेस और देश को मजबूत बनाना होगा। राहुल जी शतायु हों। वे भारत में राजनीति की नई परिभाषा गढ़े। भारत जो आज है उसे शीर्ष पर ले जाने के अवसर हासिल करें। हम सब कांग्रेसजन संकल्पित होकर उनके साथ है।
(लेखक मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं)