राष्ट्रीय कृषि और मनरेगा समिति के अध्यक्ष का पद मतलब मोदी की नजरों में बढ़ा शिवराज का कद

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास

18 फरवरी, 2016 मध्यप्रदेश के लिए ऐतिहासिक दिन था। इस दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के शेरपुर में किसानों के हित के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। पहली घोषणा थी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करना और दूसरी थी किसानों की आय को पांच वर्ष में दोगुना करने की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव के लिए मध्यप्रदेश का चयन करने से यह साफ है कि मध्यप्रदेश वह राज्य है, जहां एक दशक पहले खेती-किसानी करना मुश्किलों भरा काम था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति बदली और अब आलम यह है कि मध्यप्रदेश को लगातार पांच बार कृषि कर्मण अवार्ड प्राप्त हो चुका है। यही नहीं, मध्यप्रदेश में असंगठित मजदूरों को लाभ दिलाने के लिए मध्यप्रदेश असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्याण मण्डल का गठन किया गया और इसी वर्ष 1 अप्रैल से अभियान चलाकर प्रदेश के असंगठित श्रमिकों का पंजीयन कराया गया एवं मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री असंगठित मजदूर कल्याण योजना के तहत श्रमिकों को योजना के लाभ मिलना शुरू हुए। इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नई दिल्ली में सम्पन्न हुई नीति आयोग की शासी परिषद की चौथी बैठक में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को राष्ट्रीय कृषि एवं मनरेगा समिति का अध्यक्ष मनोनीत करने का निर्णय लिया गया। समिति में बिहार, सिक्किम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्रियों को सदस्य बनाया गया है। राष्ट्रीय कृषि एवं मनरेगा समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद निश्चित ही देश में राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति के मायने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नजरों में शिवराज सिंह चौहान दूसरी कतार के बड़े नेता बन गए हैं। और अन्य राज्यों के तुलना में यह भी स्पष्ट हो गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में अव्वल राज्य है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिवराज सिंह चौहान को केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए गठित समिति का अध्यक्ष बनाया था और प्रधानमंत्री की उम्मीदों पर खरे उतरते हुए शिवराज सिंह चौहान ने इस समिति की रिपोर्ट और अनुशंसाएं निर्धारित समय में प्रस्तुत कर दी थीं। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री ने अगले पांच वर्षों में किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा की थी, उसी घोषणा के चलते प्रधानमंत्री ने शिवराज सिंह चौहान को 2022 तक कृषि की आय दोगुनी करने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी भी दी थी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी भी पूरी कार्य योजना बनाकर प्रधानमंत्री को सौंप दी है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री की किसानों की आय को दोगुना करने की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही एक उच्चस्तरीय बैठक में किसानों की आय दोगुना करने का रोडमैप बनाने के निर्देश दे दिए थे, मध्यप्रदेश वह पहला राज्य बना, जहां किसानों की आय दोगुना करने का रोड मेप सबसे पहले तैयार किया। शिवराज सरकार द्वारा तैयार कृषि रोड मेप में किसानों को 360 डिग्री पर सहायता देने की बात कही गई। इसमें किसानों को मौसम के अनुसार सुविधाएं तो उपलब्ध करवाई ही जाएंगी, साथ ही कृषि संबंधी शोध, बीज, खाद, पर्याप्त बिजली, पानी, सरकार की योजनाएं, उत्पादन की लागत, मंडी के दामों आदि को सरलता से किसानों तक पहुंचाया जाएगा। इससे किसानों को अनाज उत्पादन में अधिक से अधिक मदद मिलेगी। कृषि रोडमेप में प्रमुख रूप से भू-राजस्व संहिता एक्ट में संशोधन कर छोटे किसानों में कांट्रेक्ट फार्मिंग को अमली जामा पहनाना, सहकारिता के नेटवर्क से प्रत्येक किसान को जोडऩे की प्राथमिकता, कृषि वानिकी नीति बनाना, किसानों को एसएमएस से उनके लोन, बीमा आदि की जानकारी मुहैया करवाना, प्रत्येक किसान का स्वाईल हेल्थ कार्ड बनाना और बिजली के स्थायी कनेक्शन के लिए अभियान चलाकर प्रत्येक किसान को पर्याप्त बिजली उपलब्ध करवाना शामिल है। इस रोड मेप में 23 हजार ग्राम पंचायत में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन, फ्रूट रूट एवं वेजीटेबल रूट बनाकर संस्थागत व्यवस्था, प्रत्येक जिले में अलग से फल और सब्जी मंडी तैयार करना व क्लस्टर में एग्री बिजनेस सेंटर की स्थापना, फूड प्रोसेसिंग यूनिट को प्रोत्साहन देना एवं विकासखंडों में 4 या 5 आटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित करना प्रमुख है।
बात करें राज्य के असंगठित मजदूरों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री असंगठित मजदूर कल्याण योजना की, तो मध्यप्रदेश में असंगठित मजदूरों के लिए इस योजना के तहत असंगठित श्रमिकों के पंजीयन के लिए गांव-गांव में पंचायतवार तथा नगरीय क्षेत्र में वार्डवार पंजीयन शिविर लगाए गए तथा अधिक से अधिक श्रमिकों का पंजीयन कराया गया। इस योजना में पंजीकृत मजदूरों के लिए 200 रूपए मासिक फ्लैट रेट पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। गर्भवती श्रमिक महिलाओं को पोषण आहार के लिए 4 हजार रूपए दिए जा रहे हैं, प्रसव होने पर महिला के खाते में 12,500 रूपए दिए जा रहे हैं, घर के मुखिया श्रमिक की सामान्य मृत्यु पर परिवार को 2 लाख तथा दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख रूपए की सहायता, हर भूमिहीन श्रमिक को भूखण्ड या मकान एवं स्वरोजगार के लिए ऋण दिलाया जाएगा। साइकिल-रिक्शा चलाने वालों को ई-लोडिंग रिक्शा का मालिक बनाने के लिए बैंक ऋण की सुविधा दिलाई जाएगी, उन्हें 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान के साथ 30 हजार की सब्सिडी दी जाएगी। श्रमिक की मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए पंचायत व नगरीय निकाय से 5 हजार रूपए की नगद सहायता मिलेगी। इसके अलावा तेंदूपत्ता तोडऩे वाले मजदूरों को चरण पादुका योजना के तहत जूते चप्पल तथा पानी की कुप्पी दिलाई जाएगी। पंजीकृत श्रमिक व उसके परिवार के सदस्यों की गम्भीर बीमारी का मुफ्त इलाज भी सरकार कराएगी। श्रमिक के बच्चों को कक्षा एक से पीएचडी तक नि:शुल्क शिक्षा दिलाई जाएगी। मजदूर को साइकिल व औजार खरीदने के लिए 5 हजार रूपए का नगद अनुदान भी दिया जाएगा। मजदूरों को मकान बनाने के लिए जमीन का पट्टा भी दिलाया जाएगा।
शिवराज सिंह चौहान का असंगठित मजदूरों के प्रति उपरोक्त समर्पण की जितनी भी नीतियां हैं, उसे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबसे पहले इन नीतियों को प्रधानमंत्री सचिवालय में रेखांकित किया होगा, और फिर उसके बाद फैसला लिया गया कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ही क्यों न राष्ट्रीय स्तर की कृषि तथा मनरेगा की समस्याओं को सुलझाने तथा नीतियों को क्रियान्वित करने का नेतृत्व सौंप दिया जाए। यही कारण है कि आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक कद अन्य राज्यों की तुलना में मोदी के सामने सबसे बड़ा हो गया है, ऐसा मान लिया जाए तो इसमें अतिशयोक्ति नहीं है।