एक बार फिर शर्मसार हुआ लोकतंत्रएक बार फिर शर्मसार हुआ लोकतंत्र

हृदेश धारवार 
देश की दो महत्वपूर्ण घटनााएं जिसने मानवता के साथ लोकतंत्र को भी शर्मसार कर दिया है। समाज वैसे तो सिकी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं करता,लेकिन इन दिनों भीड़तंत्र द्वारा कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला मामला हैं झारखंड के पाकुड़ जिले का जहां भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने बंधुओं मज़दूरों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के साथ मारपीट कर दी। पहले तो हमलावरों ने उनके खिलाफ नारे लगाए,काले झंडे दिखाए इससे भी उनका दिल नहीं भरा तो उन्होंने सरे राह उनकी पिटाई कर दी और कपड़े भी फाड़ दिया। दूसरी घटना है एक प्रतिष्ठत न्यूज चैनल के लाइव शो ‘बताना तो पड़ेगाÓ में एक मौलाना और सुप्रीम कोर्ट में वकील फराह फैज के बीच हाथापाई हो गई। चैनल के इस शो में तीन तलाक के मुद्दे पर चर्चा हो रही थी। शो के मेहमानों में से 2 महिलाएं तीन तलाक से पीडि़त थी और दूसरी सुप्रीम कोर्ट में वकील और तीन तलाक की मुख्य याचिकाकर्ता फराह फैज थी। कार्यक्रम को टीवी पर लाइव आयोजित किया गया था जिस पर सभी मेहमान बहसबाजी कर रहे थे और कुछ अपनी राय भी दे रहे थे और उसी दौरान एक विषय पर लाइव शो के दौरान मौलाना और फराह में बहस हो गई बहस-बहस में में हाथापाई की नौबत तक आ गई। यह दोनों ही घटना देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं। मीडिया को लोकतंत्रा को चौथा स्तंभ कहा जाता है,इसे लोकतंत्र का चौकीदार भी कहते हैं। भीड़तंत्र द्वारा लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने का जो सिलसिला शुरू हुआ है,भविष्य में इसके परिणाम और ज्यादा भयावह हो सकते हैं। देश को अनुशासन और शिष्टाचार का पाठ पढ़ाने वाले विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की इस करतूत से भाजपा के संस्कार पर उंगलियां उठने लगी है। आखिर ऐसी क्या वजह थी कि युवा इतने उत्तेजित हो उठे कि उन्होंने स्वामी अग्निवेश की पिटाई कर दी। हलांकि अग्निवेश के साथ मारपीट की घटना की राजनीतिक हलकों में कड़ी निंदा की जा रही है। झारखंड के सीएम रघुवर दास ने मामले की जांच के आदेश भी दे दिए हैं। इस मामले में केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने मारपीट की घटना की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक देश में कानून का शासन सर्वोपरि है। किसी तरह की गैरकानूनी हरकतें जो किसी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन करता है तो दंडित किया जाना चाहिए। सीपीआईएम ने भी इस घटना की आलोचना की और हमलावरों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। न्यूज चैनल पर दिखाई गए शो में एक मौलाना जो कि लोगों को शांति का पाठ पढ़ाने का ढोंग करते हैं। सोशल मीडिया पर मौलाना के कृत्य की कड़ी निंदा की जा रही है। उनके द्वारा लाइव कार्यक्रम में एक अजांन महिला के साथ मारपीट की घटना को अंजाम देना उनके असली चरित्र को दिखाता है। किसी एक व्यक्ति की वजह से पूरी कौम को बदनामी झेलनी पड़ती है। समाज को भी ऐसे लोगों से सबक लेने की आवश्यकता है। जो स्वयं धर्म और मजहब को नहीं मानते वे,राष्ट्र, धर्म, महिला, संस्कृति की रक्षा कैसे कर सकते हैं। हाल ही में तीन तलाक के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली महिला निदा खान के खिलाफ फतवा जारी किया गया। जिसे दरगाह आला हजरत के दारूल इफ्ता ने जारी करते हुए कहा निदा अल्लाह के बनाए कानून का विरोध कर रही हैं इसलिए उनका हुक्का पानी बंद और उनसे मिलने वाले को महकमे से बाहर कर किया जाएगा। इसी मुद्दे के ऊपर बहस चल रही थी जिसने देखते ही देखते हिंसा का रूप ले लिया। चैनल के बारे में कहा जा रहा है कि यह सब प्रयोजित था,जिन लोगों को बहस में बुलाया गया था,समाज में उनकी स्वीकारिता भी नहीं है। बरहाल जो भी हो लोकतंत्र में हिंसा को कोई स्थान नहीं है।       (वरिष्ठ पत्रकार)