सुप्रीम कोर्ट ने कहा केवल शादी के लिए नहीं है महिला का जीवन

नई दिल्ली। दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में महिलाओं की खतना प्रथा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। इस प्रथा के विरुद्ध शीर्ष अदालत में दायर एक याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। इसमें कोर्ट ने कहा कि महिलाओं की खतना केवल इसलिए ही नहीं होना चाहिए कि उन्हें आगे चलकर विवाह करना है। अदालत ने टिप्पणी की है कि महिलाओं का जीवन सिर्फ इसलिए ही नहीं है कि वह शादी करे और पति के लिए जीए। कोर्ट ने इस प्रथा को लैंगिक असंवेदनशीलता करार देते हुए कहा कि यह महिलाओं का अपमान भी है और उनकी निजता का हनन भी। इससे पहले नौ जुलाई को शीर्ष अदालत ने दाऊदी बोहरा समुदाय की इस परंपरा पर सवाल उठाया था। कहा था कि क्या यह किसी बच्ची की शारीरिक पूर्णता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है। तब महाधिवक्ता वेणुगोपाल ने कहा था इस प्रक्रिया से बच्चियों को शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कठिनाई उठानी पड़ती है, इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।