रमन सिंह बनाम अमन सिंह का सूपड़ा साफ, छा गए राहुल गांधी, जोगी भी आ गए

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली है। 90 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 46 विधायकों की दरकार होती है, वहीं कांग्रेस की झोली में 66 सीटें गयी हैं, भाजपा को 15 और बसपा-जकांछ गठबंधन को 08 सीट मिली है। इस जीत से भाजपा और डॉ. रमन सिंह का सूपड़ा साफ हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की गुगली सटीक बैठी और प्रदेश में वे छा गए। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने भी अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज करा दी है। पहली बार पार्टी बनाई और 08 सीटों के साथ एक बेहतर स्थिति में हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जो जीत मिली है, उसकी उम्मीद खुद कांग्रेस के नेताओं ने भी नहीं की थी। इससे बड़ी बात यह देखने वाली है कि भाजपा इस कदर क्यों हार गई। भाजपा डॉ. रमन सिंह की करतूतों से कम, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की करतूतों के कारण ज्यादा हार गए। मंत्रियों पर जो भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, उससे जनता के मन में बदलाव लाने की स्थिति पैदा हुई। एक नजर इन कारणों पर कि भाजपा को यह हार क्यों मिली और कांग्रेस कैसे 15 साल बाद सत्ता में लौटी।
छत्तीसगढ़ की जनता कई समस्याओं से जूझ रही थी और कांग्रेस ने इन समस्याओं का समाधान करने का वादा अपने घोषणा पत्र में किया, इसका असर रहा कि यह पार्टी जनता का भरोसा जीत सकी, कांग्रेस ने इस बार परिवर्तन का नारा दिया था, जिसे जनता का समर्थन मिला। भाजपा नेता इन्कार करते रहे, लेकिन आखिर में यह परिवर्तन का नारा सच साबित हुआ, उसके बाद कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में धान के दाम और कर्जमाफी का वादा किया है, कांग्रेस की जीत दिखाती है कि किसानों ने इस वादे पर भरोसा दिखाया है, भाजपा सरकार के राज में कांग्रेस नेताओं पर कई बार लाठियां बरसाई गईं, परिणाम देखकर लगता है कि कांग्रेस को जनता की सहानुभूति मिली। कांग्रेस ने जिन समस्याओं को मुद्दा बनाया, उनमें रोजगार का मुद्दा सबसे बड़ा था, कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में रोजगार भत्ता देने का वादा किया है, जिसका असर चुनाव परिणाम पर पड़ा। भारतीय जनता पार्टी के हारने के पीछे किसानों की नाराजगी महत्वपूर्ण रही है। किसान वर्ग भाजपा सरकार से नाराज रहा। उनका आरोप है कि उन्हें उपज, खासतौर पर धान का सही मूल्य नहीं मिला। रोजगार की कमी दूसरा कारण रहा, जिसकी कीमत रमन सिंह को चुकानी पड़ी, रोजगारी की कमी के कारण परिवारों को विस्थापित होना पड़ा, सरकार आउटसोर्सिंग से पद भरती रही, जबकि उसके अपने यहीं रोजगार खड़े करने थे, तीसरा सबसे बड़ा कारण है आदिवासियों ने सरकार पर दमनकारी नीति अपनाने का आरोप लगाया, पत्थलगड़ी आंदोलन और बड़ी संख्या में विस्थापन इसके प्रमाण रहे, चुनाव से ठीक पहले सरकारी कर्मचारियों और पुलिस का आंदोलन सरकार को भारी पड़ा और अंत में हम यह कहना चाहेंगे कि 15 साल से सत्ता पर काबिज भाजपा के लिए कहा जा रहा था कि इस बार एंटी-इनकमबेंसी असर दिखाएगी। भाजपा नेता इससे इन्कार करते रहे, लेकिन आखिर में यही बात सही साबित हुई। भाजपा के हाथ से सत्ता जाने का सबसे बड़ा कारण मंत्रियों के भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी रहा है। सरकार ने काम तो किया, लेकिन मंत्रियों ने खुलेआम कमीशनखोरी दिखाई। नौकरशाही पर अंकुश नहीं लगा पाए। मंत्री तो किसी की बात सुनते नहीं थे, अफसर भी जनता को महत्व नहीं देते थे। दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस चुनाव में बड़ी समझदारी से काम लिया। सुलझे हुए एवं कर्मठ नेता टी.एस. सिंहदेव को घोषणा पत्र की जिम्मेदारी सौंपी। जिन्होंने एक ऐसा घोषणा पत्र तैयार किया, जो छत्तीसगढ़ की जनता को बहुत भाया। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने भी इस चुनाव में अपनी पूरी शक्ति झोंक दी और तमाम दिक्कतों का सामना करते हुए पूरे समय पार्टी के लिए समर्पित रहे। उनका समर्पण पार्टी की जीत में मिल का पत्थर साबित हुआ है। पूर्व मंत्री चरणदास महंत ने ओबीसी मतों को एकत्र करने का बेहतर काम किया। सबसे बड़ी अहम बात यह रही कि प्रदेश में अजीत जोगी ने एक क्षेत्रीय पार्टी खड़ा किया, जिसने पहली ही बार 08 सीटें जीतकर अपना महत्व जनता को बता दिया।