मेरे खिलाफ कोई केस, एफआईआर, चार्जशीट नहीं है

सिख विरोधी दंगों पर मुख्यमंत्री कमलनाथ की टिप्पणी

भोपाल/नई दिल्ली, 17 दिसंबर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 1984 सिख विरोधी दंगों पर कहा है कि उन्होंने 1991 में और उसके बाद कई बार शपथ लिया, किसी ने कुछ नहीं कहा। मेरे खिलाफ कोई केस, एफआईआर, चार्जशीट नहीं है। पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के उत्तर में कमलनाथ ने कहा कि आज वे इस मामले को उठा रहे हैं। आप इसके पीछे की राजनीति समझ सकते हैं। उन्होंने सवाल किया क्या किसी प्रत्यक्षदर्शी ने कुछ कहा?
सोमवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले कमलनाथ ने 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों में किसी भी तरह की भूमिका होने से हमेशा इंकार किया है। कांग्रेस का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया चल रही है और मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।
34 साल बाद सज्जन कुमार को उम्रकैद
तीन दशक के बाद भी 1984 सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, 34 साल के बाद इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सोमवार को निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सज्जन कुमार को दंगे के लिए दोषी माना और उम्रकैद की सजा दे दी। बता दें कि 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में 3325 लोग मारे गए थे, इनमें से 2733 सिर्फ दिल्ली में मारे गए थे, जबकि बाकी हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मारे गए थे। सज्जन कुमार को दिल्ली के कैंट इलाके में आपराधिक षडयंत्र रचने, हिंसा कराने और दंगा भड़काने का दोषी पाया गया है। इससे पहले 1984 सिख दंगा मामले में 2013 में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को निचली अदालत ने बरी कर दिया था, जबकि सज्जन कुमार के अलावा बाकी और आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था, इसमें पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर, कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल और दो अन्य लोग शामिल थे। कोर्ट ने अपने आदेश में इनको दंगा भड़काने का दोषी माना था और पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर, भागमल और गिरधारी लाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर को तीन तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। निचली अदालत के इस फैसले को दोषियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, इसके अलावा सीबीआई और पीडि़तों ने भी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट में अपील दायर की और सज्जन कुमार समेत सभी दोषियों पर आरोप लगाया था कि दंगा भड़काने के पीछे इन लोगों का हाथ है। सज्जन कुमार के बाद दिल्ली के दूसरे बड़े नेता कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर भी आरोप लगे हैं, उन पर दिल्ली के बुलबंगश इलाके में गुरुद्वारा के सामने 3 सिखों की हत्या करने का आरोप लगा था, हालांकि सीबीआई अभी तक टाइटलर पर लगे आरोपों की पुष्टि नहीं कर सकी, ऐसे में सवाल उठता है कि सज्जन कुमार की सजा के बाद क्या जगदीश टाइटलर की मुश्किलें भी बढ़ेंगी।
84 के दंगे के चलते कुछ कांग्रेसी नेताओं का सियासी भविष्य पूरी तरह से खत्म हो गया है, इनमें जगदीश टाइटलर, सज्जन कुमार समेत कुछ दूसरे नेताओं का भी नाम शामिल है।
2010 में इन दंगों में संलिप्तता को लेकर कमलनाथ का भी नाम सामने आया था, उनका यह नाम दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में हुई हिंसा में सामने आया था, उनके ऊपर ये भी आरोप लगा था कि यदि वह गुरुद्वारे की रक्षा करने पहुंचे थे, तो उन्होंने वहां आग की चपेट में आए सिखों की मदद क्यों नहीं की, वहां पर उनकी मौजूदगी का जिक्र पुलिस रिकॉर्ड में भी किया गया और इन दंगों की जांच को बने नानावती आयोग के सामने एक पीडि़त ने अपने हलफनामे में भी उनका नाम लिया था।
कांग्रेस के दामन पर गहरे हैं दाग
बहरहाल, कांग्रेस के दामन पर इन दंगों के दाग बेहद गहरे हैं, राहुल गांधी भले ही इन दंगों में कांग्रेस की संलिप्तता से साफ इंकार कर रहे हैं लेकिन आपको बता दें कि दंगों के 21 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में इसके लिए माफी मांग चुके हैं, उन्होंने कहा था कि जो कुछ भी हुआ, उससे उनका सिर शर्म से झुक जाता है, इन दंगों की तपिश को आज तक सिख महसूस करते हैं।