कमलनाथ को फ्री हैंड- सिंधिया को अपर हैंड, लेकिन अहमद पटेल…


लोकसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश के लिए राहुल गांधी जरूरत से ज्यादा सक्रिय हुए, इसलिए
नई दिल्ली से विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश में 2019 मई के महीने में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बेहद गंभीर हैं। उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राजनीतिक सलाहकार सबसे ज्यादा पावरफुल संगठन के नेता अहमद पटेल को संकेत दे दिया है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस काफी संघर्ष के बाद बराबरी में रहकर सत्ता में आई है। कांग्रेस की यह स्थिति निश्चित रूप से 5 गुटों में विभाजित मध्यप्रदेश में कांग्रेस की अपनी आपसी खींचतान के कारण बनी है, इसलिए मध्य प्रदेश पर विशेष नजर रखी जाए। राहुल गांधी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में इन पांचों गुटों का बेहतर से बेहतर समन्वय हो सके, इसलिए मुख्यमंत्री कमलनाथ को फ्री हैंड दिया जाना चाहिए, ताकि उम्मीदवारों के चयन में कमलनाथ तय कर सकें जीतने वाले उम्मीदवार आखिर 29 लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के कितने मजबूत होंगे।
सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के महासचिव और प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश राज्य में कांग्रेस का गढ़ पुनस्र्थापित करने के लिए सारथी बन चुके हैं, इसलिए उनका मध्य प्रदेश में ज्यादा समय निकाल पाना मुश्किल होगा। परंतु ग्वालियर, चंबल, मध्य भारत के लगभग 13 लोकसभा क्षेत्र ऐसे हैं जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया जिस भी उम्मीदवार पर उंगली रखेंगे, उसे टिकट दे दिया जाएगा। रहा सवाल 5 गुटों में विभक्त बड़े नेताओं की दावेदारी का जिसमें दिग्विजय सिंह, सुरेश पचोरी, राजेंद्र सिंह, अजय सिंह, अरुण यादव और मुकेश नायक यह ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्हें लोकसभा में उतारने के बारे में 10 जनपथ में भी गंभीरता से विचार चल रहा है। जहां तक सवाल है कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच आपसी रिश्तों का तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की वजह से कभी बिगड़ते हैं तो कभी आपसी तालमेल के बेहतर होने का राजनीतिक संकेत मिलता है।
सूत्रों के अनुसार कमलनाथ भी चाहते हैं कि दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी, राजेंद्र सिंह, अजय सिंह, अरुण यादव और मुकेश नायक लोकसभा में उतारे जाएं, लेकिन अखिल भारतीय कांग्रेस के फार्मूले में विधायक का चुनाव हारे हुए उम्मीदवारों के लिए बताया जा रहा है कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के स्रोतों के सर्वे रिपोर्ट और सरकार की खुफिया तंत्र के सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाया जाएगा। खुफिया तंत्र की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश के कांग्रेस की कमलनाथ सरकार यह मानकर चल कर चल रही है कि 29 में से 14 सीटों पर कांग्रेस की जीत पक्की है लेकिन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पास पहुंची रिपोर्ट चौंकाने वाली है। अहमद पटेल के टेबल पर एक फाइल उम्मीदवारों के जांच पड़ताल के लिए पड़ी है, उसकी तुलना संघ द्वारा बनाई गई ताजी रिपोर्ट के आधार पर, मध्य प्रदेश में कांग्रेस 9 सीटों पर चुनाव जीत सकती है। लेकिन मेरा गधा तुम्हारे घोड़े से तेज चलता है वाली कहावत कांग्रेस की डिक्शनरी से कमलनाथ-सिंधिया दोनों मिलकर हटा दें तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस भाजपा से अधिक सीटें हासिल करेगी लेकिन ऐसा होता कहां है?
यह बात अलग है कि कमलनाथ और सिंधिया एक कमरे में बिना किसी अन्य के हस्तक्षेप के बैठ जाएंगे और उम्मीदवार तय करेंगे तो परिणाम बेहतर आएगा। जैसा कि राहुल गांधी मध्य प्रदेश के मामले में सोच रहे हैं यदि वैसा ही हुआ तो कमलनाथ को मिलेगा फ्री हैंड- और ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपर हैंड। मतलब साफ है कि यदि सिंधिया किसी भी मामले में या किसी उम्मीदवार के बारे में अड़ जाएंगे तो कमलनाथ उन्हें मना करने की स्थिति में नहीं होंगे। इस रिपोर्ट का लब्बेलुआब यह है कि गुटबाजी से बचने के लिए कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित विधानसभा में पराजित सुरेश पचौरी, राजेंद्र सिंह, अजय सिंह, मुकेश नायक के साथ अरुण यादव को भी मैदान में उतारा जाएगा। बाकी लोकसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की उम्मीदवारी कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ही मिलकर तय करेंगे।
सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि राहुल गांधी ने कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच में दीवार खड़ी करने की अवसरवादी कोशिशों को समझ लिया है और यही कारण है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया चाहे प्रियंका गांधी के साथ कितने ही व्यस्त होंगे लेकिन मध्य प्रदेश लोकसभा चुनाव के मामले में उनका हस्तक्षेप को स्वीकार किया जाएगा।
कमलनाथ और सिंधिया का समन्वय यदि मजबूत हुआ तो राहुल गांधी मानते हैं कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस 20 से अधिक लोकसभा सीटों पर चुनाव जीतेगी।
विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।