राहुल गांधी को कमलनाथ से चाहिए 25 लोकसभा सांसद


दिग्विजय, सुरेश पचौरी, अरुण यादव को लड़ाओ और अजय सिंह-राजेंद्र सिंह को लड़ाओ आपत्ति नहीं

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के 5 बड़े नेताओं में महत्वाकांक्षाओं को लेकर जितनी खींचतान है उससे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नाराज भले न हो लेकिन चिंतित इस बात को लेकर हैं कि यदि यही गुटबाजी लोकसभा चुनाव में भी अपना रंग दिखाएगी तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के ब्रांड से दो-दो हाथ मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए टेड़ी खीर हो जाएगी। नई दिल्ली में राहुल गांधी के निवास पर जिन दो राज्यों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है उसमें मध्यप्रदेश पहले नंबर पर है जबकि दूसरे नंबर पर राजस्थान को माना जा रहा है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच में पटरी भले ही बैठ गई हो लेकिन संगठन के नेताओं का मानना है कि गुटबंदी से राजस्थान में भी कांग्रेस को उतना फायदा नहीं मिलेगा जितना विधानसभा के चुनाव में मिल गया। जहां तक सवाल है मध्यप्रदेश का तो यह लिखने में कोई संकोच नहीं है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के ऊपर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जो वर्तमान में राज्यसभा सदस्य भी हैं तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हाल ही में विधायक का चुनाव हारे अजय सिंह और विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह को लोकसभा चुनाव लड़वाने का दबाव बनाया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह, अजय सिंह और राजेंद्र सिंह तीनों को हरी झंडी दे दी है कि वे लोकसभा की तैयारी करें जिसकी सूचना बकायदा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पास है। कांग्रेस के महासचिव प्रियंका गांधी के उत्तरप्रदेश में सारथी बन चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अभी अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। लेकिन स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में जब बात उठेगी तो सिंधिया चुप नहीं बैठेंगे। कमलनाथ, दिङ्क्षग्वजय सिंह के बाद पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हमसखा कहलाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया शतरंज की चालें कैसी चलेंगे यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ से स्पष्ट कह दिया है कि दिग्विजय सिंह को लड़ाओ, अजय सिंह को लड़ाओ, राजेंद्र सिंह को भी लड़ाओ, सुरेश पचौरी और अरुण यादव भी लड़ें आपत्ति नहीं है, लेकिन मध्यप्रदेश से कांग्रेस के 25 लोकसभा सांसद चुनाव जीतकर आने चाहिए। समझा जाता है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उपरोक्त सभी अलग-अलग गुटों के नेताओं को धैर्य रखने के लिए कहा है और वायदा किया है कि यदि सर्वे रिपोर्ट में जीतने की संभावनाएं बताई जाएंगी तो हारे हुए सभी दिग्गजों पर एक बार फिर से विचार किया जाएगा। परंतु कमलनाथ की चिंता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का भरोसा और विश्वास उन पर न टूटे इसलिए वे सच्चाई से दूर नहीं रहेंगे। टिकट वितरण के पहले सबको बता दिया जाएगा कि चुनाव लडऩा है या लड़वाना है। मध्यप्रदेश की राजनैतिक परिस्थिति कांग्रेस के पक्ष में आज भी चुनौतीपूर्ण इसलिए है क्योंकि कमलनाथ के सामने फिर एक बार भारतीय जनता पाटी्र के पोस्टर ब्याय शिवराज सिंह चौहान का नाम सामने है। इसलिए यदि राहुल गांधी के लक्ष्य को पूरा करना है तो यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि मुख्यमंत्री कमलनाथ हारने की संभावना यदि उपरोक्त नेताओं के नाम पर 100 प्रतिशत है तो वे रिस्क बिलकुल नहीं लेंगे। मध्यप्रदेश को लेकर दो-तीन दिनों के अंदर ही राहुल गांधी के दौरों के भी कार्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया जाएगा और समझा जाता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा पिं्रयका गांधी का संयुक्त दौरा भी लोकसभा चुनाव के दरम्यान मध्यप्रदेश में होगा।

विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।