अंजाम से भयभीत पाक का अनर्गल प्रलाप जारी आहे

डॉ. हिदायत अहमद खान
पाकिस्तान सरकार और उसके नुमाइंदे मीडिया के समक्ष जो बयान दे रहे हैं उससे यही संदेश जाता है कि पाकिस्तान के वर्तमान राजनैतिक हालात बद से बदतर हो चले हैं। इसीलिए वो अनर्थक और अनर्गल बयान देकर देश की आवाम का ध्यान अपनी ओर से हटाने का प्रयास कर रहे हैं। बेनूर बंद सुरंग में भटके हुए राही की तरह ही इस मसय पाकिस्तान को रास्ता दिखाने वाली एक रोशनी की दरकार है। अब उसे रोशनी दिखाए भी तो कौन, क्योंकि जिसकी गोद में बैठकर उसने हमेशा ही आंखें तरेरने का काम किया, गीदड़ भभकियां दीं, आज वही उसके कान मरोडऩे जैसा काम कर रहा है। यही वजह है कि अपने हश्र से नावाकिफ पाकिस्तान आदतन ऊट-पटांग हरकतें कर रहा है और जिसका कोई सिर-पैर नहीं, झूठ-मूठ वाली कहानी सुनाने में लगा हुआ है। अगर यकीन नहीं आता तो पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान को देख लें जिसमें वो कहते हैं कि भारत और इजरायल के गठजोड़ के बावजूद पाकिस्तान अपनी रक्षा कर सकता है। पाकिस्तान को समझना होगा कि भारत के रिश्ते जो बने हैं वो विस्तारवादी सोच के कारण नहीं बने हैं बल्कि उसका उद्देश्य देश को तरक्की के रास्ते में ले जाना और शांति एवं सद्भाव के साथ दुनिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढऩा रहा है। ऐसे में भारत जहां रुस के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को बराबर बनाए हुए है तो वहीं अमेरिका और जापान के साथ ही साथ अब इजरायल के मध्य भी दोस्ताना संबंध बनाने की ओर अग्रसर हुआ है। इसे लेकर पड़ोसी मुल्कों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि पाकिस्तान को चाहिए कि वह भी आतंकवादियों को पालने और पोसन के साथ ही साथ उन्हें प्रशिक्षित कर सीमा पार कराने जैसा कुत्सित कार्य बंद करके शांति और सहअस्तित्व की राह पर आगे बढ़े। इसी में उसकी भी भलाई है, वर्ना अमेरिका ने जो कहा है वह उसे फलीभूत करने में देर नहीं लगाएगा, क्योंकि अब सऊदी अरब व अन्य खाड़ी देश भी पाकिस्तान के भ्रमजाल में फंसने वाले नहीं हैं। वहीं पाक विदेशमंत्री ख्वाजा आसिफ जब यह कहते हैं कि इजरायल उस बड़े इलाके पर कब्जे की कोशिश में है, जो मुस्लिमों का है और वैसे ही भारत कश्मीर में मुस्लिमों की जमीन कब्जा कर रहा है। इजरायल और भारत का समान उद्देश्य है। तो हंसने के सिवा कोई क्या कर सकता है। दरअसल यह कहते हुए आसिफ भूल जाते हैं कि भारत वो देश है जिसने सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान का अधिकांश हिस्सा जीत लिया था, लेकिन उसके बाद ही जीती हुई जमीन पाक को लौटा दी गई थी। इसके बाद बांग्लादेश भी बना, लेकिन तब भी भारत ने कोई लाभ नहीं लिया। इस प्रकार भारत अपने क्षेत्र और नागरिकों के साथ खुशहाल है, अगर कहीं से कोई दु:ख या रुकावट है तो वह सिर्फ पाकिस्तान की ओर से ही है। दरअसल पाकिस्तान ने भारत विरोधी ताकतों को अपने घर में प्रश्रय दे रखा है, यहां तक कि मुंबई हमले के मास्टर माइंड कहे जाने वाले हाफिज सईद को तो उसने न सिर्फ आजाद कर रखा है बल्कि उसके जरिए सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ कराकर छद्म युद्ध भी जारी रखे हुए है। अगर ऐसा नहीं होता तो
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाक्कान अब्बासी मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज़ सईद को साहेब कहकर संबोधित नहीं करते और ना ही यह बताते कि हाफिज़ साहेब के खिलाफ कोई भी केस नहीं है। एक तरफ अमेरिका के कड़े रुख के बावजूद पाकिस्तान हाफिज सईद को नजऱबंदी से रिहा कर देता है तो दूसरी तरफ अमेरिका को बताने के लिए पाकिस्तानी सरकार करीब 1800 से ज्यादा इस्लामिक विद्वानों के दस्तखत से धार्मिक उद्देश्य के लिए आत्मघाती विस्फोट करने समेत हिंसा करने वालों के खिलाफ फतवा जारी करती नजर आती है। इस्लामाबाद की इंटरनेशनल इस्लामिक युनिवर्सिटी की देख-रेख में तैयार किए गए इस फतवे को ‘पैगाम-ए-पाकिस्तानÓ का नाम दिया जाता है और इसी खास ओकेजन में पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन कहते हैं कि ‘मुझे भरोसा है कि इस्लाम की सच्ची शिक्षा की रोशनी में लिया गया यह फैसला उनका हृदय परिवर्तन कर देगा और उनके उद्धार का मार्ग प्रशस्त करेगा।Ó इस प्रकार पाकिस्तान बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है और अंजाम से भयभीत होकर अनर्गल प्रलाप जारी रखे हुए है, जिसका कोई मतलब नहीं निकलता है।