24 करोड़ 33 लाख 26 हजार खर्च, फिर भी बदहाल है पातालकोट

एनएल चंद्रवंशी (09425003698)
भोपाल, 21 जनवरी। छिंदवाड़ा जिले में स्थित पातालकोट विकास के नाम पर विभिन्न योजनाओं से 24 करोड़ 33 लाख 26 हजार की भारी-भरकम राशि से पातालकोट का विकास नहीं हो पाया है। भारिया जनजाति के लोग आज भी विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर हैं।
पातालकोट के नाम पर छिंदवाड़ा से दिल्ली तक चलने वाली पातालकोट ट्रेन ही नजर आती है, जिसे नेता क्षेत्र का विकास मान चुके हैं। दो हजार फीट गहरी पहाडिय़ों से घिरे कोटरनुमा स्थल वाले पातालकोट में रहने वाले भारिया जनजाति के विकास के लिए 1978 में स्थापित पातालकोट अभिकरण ने बीते 39 सालों में 24 करोड़ 33 लाख 26 हजार किए हैं, लेकिन पातालकोट के भारियायों का बदहाल जीवन पहले की तरह है। सामान्य प्रशासन विभाग ने माना था कि अपेक्षित विकास का अभाव, दो साल पहले 21 जून 2015 को पातालकोट घटलिंगा प्रवास पर आए सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री ने माना था यहां अपेक्षित विकास की कमी है। प्रदेश के मुखिया पातालकोट के चिमटीपुर मे दो तथा गैलडुब्बा एक दिन का प्रवास कर चुके हैं। पातालकोट सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है, कहने को पातलकोट के रातेड़ में सड़क बन रही है, लेकिन सड़क निर्माण के बाद बारिश में करोड़ों की रोड बह गई, जिसने यहां के विकास की पोल खोल दी है। आजादी के 70 सालों बाद भी पातालकोट के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। भारिया जनजाति समुदाय के ग्रामीण विकास के बाद भी समृद्ध नहीं हो पाए हैं। मध्यप्रदेश शासन ने तामिया, पातालकोट के ग्रामों में रहने वाले भारियाओं को विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा दिया है, पातालकोट में 607 परिवारों की कुल आबादी 3038 है, जिसमें महिला 1551, पुरुष 1497 हैं। पहले ही मध्यप्रदेश शासन पर भारिया जनजाति को दो भागों मे बांटने के भेदभाव को लेकर सरकार के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका विचाराधीन है। दुर्गम इलाकों में शुमार 12 गांवों का समूह पातालकोट की आबादी वर्तमान में 3038 है। वोटबैंक के लिहाज से अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले पातालकोट के 12 ग्रामों में चार मतदान केंद्रों में कारेयाम रातेड पलानी, गैलडुब्बा, जडमादल, हर्राकछार और घटलिंगा में कुल ढाई हजार से अधिक मतदाता हैं, वर्तमान मेंं पातालकोट के 12 ग्रामों मे कुल आबादी 3038 है, रोटी कपड़ा मकान जैसी बुनियादी जरूरतो के लिए आज भी पातालकोट के लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। शासन स्तर पर पातालकोट के भारिया जनजाति को विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा प्राप्त है, बावजूद लाल फीताशाही के चलते सरकारी नौकरी पाने पातालकोट के शिक्षित युवाओं को स्थान नहीं मिल पा रहा है।