कमलनाथ कल्चर से मीडिया की दूरी कब तक…?


विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधानसभा चुनाव के पहले सेंट्रल प्रेस क्लब के प्लेटफार्म में आकर मध्यप्रदेश की मीडिया से वायदा किया था कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद वे सबसे पहले मीडिया को उनकी सम्मानजनक भूमिका के लिए साधुवाद देने आएंगे, बशर्ते मीडिया की भूमिका निष्पक्ष एवं स्वस्थ आलोचनाओं से परिपूर्ण सकारात्मक होनी चाहिए। स्मरण रहे कि मध्यप्रदेश की मीडिया ने विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव 2019 तक जितनी निष्पक्षता से मध्यप्रदेश में काम किया है, शायद ऐसी भूमिका निभाने में राष्ट्रीय स्तर की मीडिया भी पीछे थी, क्योंकि उनके लिए नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी सबसे बड़े किरदार थे। जहां उन्हें किसी एक को ही चुनना था परंतु यहां पर ऐसा था ही नहीं। परंतु मध्यप्रदेश में यहां की मीडिया ने मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद कमलनाथ और विपक्ष के नेता शिवराज सिंह चौहान दोनों के लिए अपनी भूमिका को पारदर्शी रखने में सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री बनने के बाद कमलनाथ हर दिन कुछ नया करना चाहते हैं और यह उनके फैसलों से प्रमाणित भी होता जा रहा है। सरकार के गठन से लेकर कमलनाथ के 100 से अधिक फैसलों ने मध्यप्रदेश की साढ़े सात करोड़ आबादी में एक उम्मीद की किरण पैदा की है और युवाओं को लगने लगा है कि मध्यप्रदेश का भविष्य मजबूत हाथों में आकार ले रहा है। मामला चाहे किसानों का हो या चाहे कर्मचारियों का या फिर फैसले विकास को लेकर बनाई जा रही दिन-प्रतिदिन योजनाओं पर ही केंन्द्रित क्यों न हो, खजाना खाली है फिर भी सबको लगता है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रोज-रोज अपने वचनपत्र के बिन्दुओं को पढ़ते हैं और फिर निर्णय लेते हैं, इसलिए जो कुछ होता है सबके लिए नया है। परंतु यदि आप वचन पत्र के पृष्ठ नं. 99 में जनसंपर्क विभाग के शीर्षक पर आधारित वायदों पर नजर डालें तो ऐसा लग रहा है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री तथा ‘कमलनाथ कल्चरÓ ने मीडिया का जितना सहयोग चाहिए था, ले लिया है अब शायद उन्हें इसकी जरूरत नहीं है। वर्ना 8 बिंदुओं पर पत्रकारों से किए गए किसी भी वायदे का अमल में नहीं आने का क्या कारण है यह तो मुख्यमंत्री जी आप स्वयं ही समझ सकते हैं।
हम आपको बता दें कि आपकी कांग्रेस सरकार आपके दम पर बहुमत में है लेकिन कांग्रेस का एक गुट इसे बहुमत नहीं मानता और यही स्थिति उस समय भी थी, जब मध्यप्रदेश के 1980 में स्व. अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री बने थे और उन्हें आपके 36 वोटों ने बहुमत दिलाया, लेकिन उनके ऊपर जो दबाव था, वह तब कम हो पाया जब पूरी मध्यप्रदेश की मीडिया ने अर्जुन सिंह का दिल खोलकर साथ दिया था, यह बात जरूर है कि उस समय भी बड़े पूंजीपति मीडिया घराने अर्जुन सिंह के साथ नहीं थे, पूरे प्रदेश के करीब 800 छोटे मध्यम और विशुद्ध पत्रकार सबने मिलकर अर्जुन सिंह का साथ दिया, जिसके कारण उन्हें दबाव की बजाय दबाकर काम करने का खूब मौका मिला। हम यह नहीं कहते कि आपकी स्थिति अर्जुन ङ्क्षसह की तरह है, लेकिन जिस मीडिया को आपने 60 वर्ष की आयु के बाद 10 हजार रुपए प्रतिमाह की श्रद्धानिधि दी है उससे आपने यह भी कहा है कि शासकीय आवास आवंटन के कोटे का पुनर्निधारण करेंगे तथा शासकीय कर्मचारियों के समकक्ष किराया होगा, इसका क्या हुआ। पत्रकारों की समस्याओं के लिए उच्चस्तरीय समिति बक्शे में बंद क्यों है। दुर्घटना के बाद मृत होने पर 15 लाख की आर्थिक सहायता, गंभीर घायल पत्रकारों को दो लाख की आर्थिक सहायता और दुर्घटना में मृत पत्रकार के बच्चों को मु$फ्त शिक्षा का आदेश कब निकलेगा। आपने कहा है कि पत्रकारों की बीमा की राशि 50 प्रतिशत होगी, 50 प्रतिशत सरकार मिलाएगी, प्रत्येक जिले में सेंट्रल प्रेस क्लब जैसी या फिर प्रेस क्लब को भूखंड एवं अनुदान दिया जाएगा, ये सब फैसले मुख्यमंत्री सचिवालय के अलमारी में बंद पड़े हैं। सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु नीति, पत्रकारों के गृह निर्माण, समितियों को भूखंड के साथ-साथ 25 लाख तक का मकान खरीदने में ब्याज का अनुदान और महिला पत्रकारों की सुरक्षा व्यवस्था ऐसे मामले हैं, जिन पर आपका निर्णय जब होगा, तभी हम सूर्योदय को महसूस करेंगे। वर्ना आपकी नीतियां, आपके फैसले और विशेषकर शासकीय कर्मचारियों के हित में दिन-प्रतिदिन आपकी चिंता को सकारात्मक रूप से रेखांकित करने में हमें भारी प्रसन्नता है। इसलिए रोज नया कुछ करें, आपका स्वागत है लेकिन अपने दिल से पूछिए आपने किसकी वजह से और क्यों मध्यप्रदेश की मीडिया से कांग्रेस की सरकार बनने के बाद दूरी बना रखी है, इस सवाल का उत्तर हमें कितनी जल्दी देंगे, इंतजार रहेगा। हालांकि जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा और प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने आपकी ओर से कहा तो है कि मुख्यमंत्री राजधानी की मीडिया से जल्द मिलने वाले हैं और कब मिलेंगे, यह इन्हें खुद पता नहीं…?
विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।