कलेक्टर बनते मध्यप्रदेश में, खोखे और पेटी में नजराना पेश होता था दूसरे राज्यों से…?

कलेक्टर बनते मध्यप्रदेश में, खोखे और पेटी में नजराना पेश होता था दूसरे राज्यों से…?
मध्यप्रदेश में नौकरशाही के उस वर्ग को बड़ा झटका लगा, जहां पर ‘अपराइर्टÓ आय.ए.एस. अधिकारियों को अच्छे जिलों में कलेक्टर बनाकर भेजा जाता है, ताकि सरकारी मशिनरी का चेहरा उज्वल छबि वाला जनहित के मुद्दों पर काम करने वाला आम जनता को दिखता रहे। लेकिन यहां पर पिछले 4 माह के पहले का 15 महिनों की सत्ता काल अत्यंत ही दुर्भाग्य जनक रहा है, क्योंकि सब गोलमाल था। एक युवा आय.ए.एस. अधिकरी नाम नही छापने की शर्त पर कहते हैं कि कांग्रेस के 15 महिनों का कार्यकाल मध्यप्रदेश में जिन इमानदार आय.ए.एस. अधिकारियों को कलेक्टर बनना है उनके लिए तो किसी बड़े सदमें से कम नही था उक्त नवजवान आय.ए.एस. का कहना है, कलेक्टर बनने के लिए 1 खोखा 2 खोखा कहां से आयेगा उसकी चिंता पहली बार मध्यप्रदेश में महसूस हुआ था। सवाल इतना गंभीर है जिसकी कल्पना भी नही की जा सकती, कहा जाता था आप तो अच्छी ‘रेतÓ वाले जिले में कलेक्टर बनवा दो हमारे अधिकारी को, जिस राज्य में तत्कालीन सरकार के एक ओ.एस.डी. इशारा करते थे खोखा वहीं उतरता था। यह बात अलग है कि वर्तमान सरकार में मुख्यमंत्री इस तरह खोखे, पेटी के नजरानों से अभी दूर है। उल्लेखनीय है कि इस पीड़ा से युवा आय.ए.एस. अधिकारी विशेष गढ़पाले तथा खोखे के वाक्या से तत्कालीन सरकार के ओ.एस.डी. प्रवीण कक्कड़ का कोई संबंध नहीं है। -खबरची