‘डीजी लेप’ से पढ़ रहे हैं 7 लाख बच्चे स्कूल शिक्षा विभाग असहाय नहीं

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास – मो.9617565371

मध्यप्रदेश में कोराना महामारी का भयंकर प्रभाव सबसे ज्यादा उन लाखों बच्चों पर हुआ हैं जो कक्षा-1 से लेकर आठवीं कक्षा की पढ़ाई में ही वे अपने भविष्य की बुनियाद रखते हैं। परंतु स्कूल शिक्षा विभाग ने 61 लाख बच्चों का घर में ही स्कूल खोल दिया है। विभाग ने दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कोविड-19 के संक्रमण से स्कूली बच्चों को बचाने के लिए कारगर उपाय किये जायें। विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी ने राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि को आज एक संक्षिप्त मुलाकात में बताया कि मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग कक्षा 1 से कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है। प्रमुख सचिव ने कहा कि कोविड-19 के कारण स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों एवं स्कूलों के संचालन पर रोक जरूर लगी है, परंतु सरकार असहाय की स्थिति में नहीं है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ‘डीजी लेपÓ के माध्यम से 7 लाख बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि कोविड-19 के चलते स्कूलों का खुलना संभव नहीं हो पा रहा है परंतु पालकों की सहमति से कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं कक्षा तक विद्यार्थियों के लिए स्कूलों को प्रारंभ करने पर विचार किया जा रहा है। प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी के अनुसार लाखों-करोड़ों बच्चे स्कूल खुलने का इंतजार कर रहे है। परंतु स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है बच्चों के जीवन को सुरक्षित रखना। यह पहली प्राथमिता है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा संचालित ‘हमारा घर हमारा विद्यालय योजना के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। परंतु गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों तथा छोटे-छोटे मकानों में निवासरत पालक परिवारों के स्कूली बच्चों के सामने कठिनाईयां हैं। परंतु समग्र शिक्षा के मिशन संचालक लोकेश जाटव बच्चों की समग्र शिक्षा को सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे छोटे मकानों में ‘शिक्षा का कोना संभव नहीं है, परंतु डीजी लेप और रेडियो टीचर से बच्चों में पढ़ाई को लेकर उत्साहजनक वातावरण है। प्रमुख सचिव के अनुसार समग्र शिक्षा की प्रणाली कोविड-19 के चलते ऑनलाईन 60 प्रतिशत से अधिक बच्चों में पूरी तरह सफल है तथा बाकी 40 प्रतिशत बच्चों में आंशिक रूप से कामयाब है। प्रमुख सचिव वरिष्ठ आय.ए.एस. अधिकारी रश्मि अरुण शमी कहती शाम 5 बजे पढ़ाई के बाद बच्चों को उनके मकानों के आसपास ही खेल, कला, संगीत एवं शिल्प ज्ञान से भी जोड़ा गया है, जिसकी वजह से लाखों बच्चों ने स्कूली पाठ्यक्रम के अलावा अन्य व्यायाम एवं मनोरंजन से भी जुड़ी गतिविधियों में रुचि दिखाई है। प्रमुख सचिव ने बताया कि केन्द्रीय मानव संसाधन विभाग द्वारा समग्र शिक्षा के लिए मध्यप्रदेश में दी जा रही वित्तीय अनुदान का पूरा-पूरा उपयोग किया जायेगा। प्रमुख सचिव ने बताया कि केन्द्रीय मानव संसाधन विकास विभाग द्वारा मंत्रालय ने मध्यप्रदेश में समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 2019-20 के लिए 40.34 करोड़ की राशि 80697 प्राथमिक स्कूलों के पुस्तकालयों में पुस्तक उपलब्ध कराने के लिए अनुदान स्वीकृत किया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी साधिकार समिति ने केन्द्रीय मानव संसाधन विकास द्वारा मध्यप्रदेश में समग्र शिक्षा विकास हेतु प्राप्त उपरोक्त राशि 40.34 करोड़ के त्वरित उपयोग करने की स्वीकृति प्रदान की और पुस्तकों के क्रय आदेश भी केन्द्र सरकार के अधिनस्थ कार्यरत दो संस्थानों को प्रदान कर दिया गया है। प्रमुख सचिव ने बताया कि उपरोक्त मद में 2018-19 में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास द्वारा प्राप्त राशि का उपयोग समयभाव तथा तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया था, परंतु 2019-20 की राशि का उपयोग 100 प्रतिशत होगा तथा 80697 प्राथमिक विद्यालयों की पुस्तकालयों में पुस्तकें समय पर उपलब्ध करा दी जायेगी। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि कोविड-19 के चलते मध्य प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग किसी भी सूरत में असहाय की स्थिति में नहीं है। विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी के अनुसार ऑन लाइन प्रक्रिया एवं डीजी लेप से लाखों स्कूली बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि केन्द्रीय गाइड लाईन के आधार पर स्कूलों को प्रारंभ किया जाये परंतु इसके पहले बच्चों के जीवन को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी बड़ी है।
विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।