गरीबों के राशन पर जिम्मेदार और माफ़िया डाल रहे डाका, दो करोड़ के घोटाले की आशंका

रायसेन में प्रधानमंत्री अन्न कल्याण योजना का गरीबों वाला अनाज गायब

रायसेन – मध्यप्रदेश में कोरोना काल मानो घोटालों का काल रहा हो। यहां आए दिन घोटाले के अलग अलग मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला प्रदेश के रायसेन जिले का है जहाँ कोरोना काल में प्रधानमंत्री अन्न कल्याण योजना के तहत गरीबों को मिलने बाला अनाज गायब होने का मामला सामने आया है। जहां इसकी कीमत तकरीबन 2 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

कोरोना काल में प्रधानमंत्री ने गरीबों को नियमित मिलने वाले राशन के साथ निःशुल्क अनाज देने की घोषणा की थी। जिसमें अप्रेल में चावल दाल, मई में चावल चना, जून में चावल बाँटना था। फिर जुलाई में गेहूं चा वल और चना निःशुल्क प्रति व्यक्ति 5 किलो मिलना था। नवम्बर तक नियमित राशन के साथ अलग से निःशुल्क अनाज बाँटने की योजना है। लेकिन गरीबो की थाली के निवाले पर ही डाका डाल दिया।

योजना के तहत ओबेदुल्लागंज ब्लॉक के लिए ब्लॉक में 97 राशन दुकानो को 7757 क्विंटल गेंहू, 1939 क्विंटल चावल और 411 क्विंटल चना आया था। लेकिन यह बटा ही नहीं। इसकी कीमत 2 करोड़ बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि खाद्य अधिकारी और सेल्समैन ने मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है।

 देश में कोरोना काल लगते ही जैसे गरीबों पर पहाड़ टूट गया जो रोज कमाते थे और रोज खाते थे उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया। लॉक डॉउन होने के कारण काम पूर्णतः बन्द हो गया था। जब केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शुरू की गई जिसमें अप्रैल में चावल दाल, मई में चावल चना, जून में चावल और जुलाई से नवम्बर तक गेंहू चना और चावल प्रतिव्यक्ति 5 किलो  नियमित जो राशन पूर्व में मिलता था, उससे साथ अलग से दिया जाना था कि जितना राशन पहले मिलता था उतना ही राशन हितग्राही को फ्री में मिलना था जिसका कोई भी शुल्क नहीं लिया जा सकता था। पर इस योजना का पता न होने के कारण हितग्राहियों को गुमराह किया गया और बड़ी मात्रा में राशन के माल की हेरा फेरी की गई जिसका हितग्राहियों द्वारा खुलासा किया गया है।

योजना की जानकारी का अभाव होने के कारण लोगो को सरकार द्वारा दी जाने वाली योजना से वंचित रखा गया है। कलेक्टर को जब इस मामले की जानकारी दी गई तो उन्होंने इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। इसकी जांच भौपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी करेंगे।

मामला चाहे जो भी हो पर इतना तो तय है कि ज़ब बारी ही खेत को खाने लगे तो भला फसल कैसे बच सकती है। ऐसा लगता है कि यह कोरोना काल मानो घोटालों का काल साबित हुआ हो।