धर्म आचरण करने वाला बनाना है समाज: मोहनराव भागवत

निज संवाददाता
बैतूल, ५ फरवरी। भारत भारती आवासीय विद्यालय के मनोरम व प्राकृतिक वातावरण में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के त्रि-दिवसीय ग्राम विकास कार्यकर्ता सम्मेलन का रविवार संघ के परम मोहनराव भागवत के प्रेरणादायी उद्बोधन के साथ समापन हुआ। समापन सत्र में श्री भागवत ने कहा की संघ की सभी गतिविधियाँ समाज परिवर्तन का साधन है। साधारणतया परिवर्तन के नाम पर राज्य व्यवस्था बदल जाती है, पर उससे सभी बीमारी ठीक नहीं होती है। समाज के स्वभाव में परिवर्तन होना चाहिए।
हमें धर्म आचरण करने वाला समाज बनाना है। गड़बड़ कभी भी साधनों में नहीं साधन चलाने वालों में होती है। श्री भागवत ने कहा कि हम धर्म को आधार लेकर विश्व कल्याण के लिए चलने वाले लोग है। हम भारत के पुत्र-पुत्रियाँ हैं यह भाव भूल गए इसलिए विखंडन हुआ। भाषा जाति पाति का भेद हुआ। समाज अपने मूल्यों को भूल गया इसलिए सत्व चला गया।
जहां सत्व है वहीं रहते हैं तेज-बल और लक्ष्मी
उन्होंने उदाहरण पूर्वक कार्यकर्ताओं को समझाया कि जब राजपाट प्रह्लाद के पास आ गया तो इंद्र उनके पास गए। प्रहलाद दानी थे फि र भी इंद्र ने प्रह्लाद से राज्य नहीं मांगा। उसने प्रह्लाद से उनका सत्व मांगा। उन्होंने दे दिया। तब इंद्र के पास सत्व के साथ बल- तेज और लक्ष्मी भी चले जाने लगे तो प्रह्लाद ने पूछा कि आपको तो मैंने इंद्र को नहीं दिया फि र क्यों जा रहे हो? सबने कहा जहां सत्व रहेगा वहीं बल-तेज और लक्ष्मी रहेंगे।