बिजली विभाग के कर्ज से परेशान किसान पत्र लिखकर फांसी पर झूला

शरीर का अंग-अंग बेचकर कर्जा चुका देना

विशेष रिपोर्ट-प्रतीक खरे
छतरपुर, 31 दिसंबर।
मातगुवां में बुधवार की शाम 32 साल के एक युवक ने फांसी के फंदे पर झूलकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने से पहले मृतक ने एक सुसाइड नोट भी लिखा, जो जांच का विषय बना हुआ है। मृतक ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि मेरे मरने के बाद मेरा शरीर परिवार वालों को न देकर शासन को दिया जाए और शासन मेरे शरीर का एक-एक अंग बेचकर बिजली विभाग का कर्जा चुका दें। 4 बच्चों के पिता मुनेन्द्र राजपूत बिजली विभाग के कर्ज से परेशान था, उसे बिजली बिल का 87 हजार रूपए बिजली विभाग को अदा करना था। मुनेन्द्र ने अपने सुसाइड नोट में अपनी तीनों बेटियों, एक बेटा व पत्नी का भी नाम लिखा, साथ ही कोरोना काल में चक्की न चलने असाढ़ महीने में भैंस चोरी जाने का हवाला भी दिया और लिखा कि इस कारण से मैं बिजली विभाग का कर्जा नहीं चुका पाया हूं। कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने घटना की जानकारी लगते ही मृतक के परिजनों को तात्कालिक रूप से 25 हजार रूपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। बताया जाता है कि मृतक मुनेन्द्र खेती-किसानी के साथ ही गांव में आटा चक्की का काम भी करता था। 3 दिन पहले बिजली विभाग के अधिकारियों ने उसकी आटा चक्की और मोटर साइकिल कुर्क कर ली थी। कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने बताया कि मृतक के पिता को पेंशन मिलती थी, उसे किसान सम्मान निधि का लाभ भी मिल रहा था, उसका एक भाई भी बिजली विभाग में काम करता था। लेकिन मृतक ने लंबे समय से बिजली का बिल जमा नहीं किया था, जिस कारण उसके विरूद्ध बिजली के बिल की राशि बकाया थी। पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने कहा कि सुसाइड नोट मिलने की जानकारी उन्हें नहीं है, यह विवेचना का विषय है, मृतक किसान ने किन कारणों के चलते फांसी लगाकर अपना जीवन समाप्त किया, इस पर अलग-अलग बिन्दुओं पर तीव्र गति से जांच की जा रही है। जनचर्चा है कि मृतक अपने पिता से बिजली का बिल जमा करने का पैसा लेता था, लेकिन वह बिजली का बिल जमा नहीं करता था। संभावना जताई जा रही है कि उसने कई और साहूकारों से भी कर्ज ले रखा था। हालांकि मृतक ने अपने सुसाइड नोट में केवल बिजली के बिल की वसूली से परेशान होकर आत्महत्या करने का उल्लेख किया है। इस संबंध में बिजली विभाग के अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया, पर बिजली विभाग के किसी भी अधिकारी ने फोन नहीं उठाए और न ही अपना पक्ष दिया।
गांव में नहीं चल रहे बिजली के पंप
ग्रामीणों पर बिजली विभाग का कहर लगातार टूट रहा है। ग्राम इकारा में लगे ट्रांसफार्मर को कुछ महीने पहले ही बिजली विभाग के अधिकारी उखाड़ कर ले गए थे। जिस कारण इस इलाके में घरेलू बिजली तो जलती है पर विद्युत पंप नहीं चल पाते हैं, जिस कारण किसानों के खेतों में सिंचाई नहीं हो पा रही है। जबकि यह वक्त सिंचाई का चल रहा है और किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की सख्त जरूरत है। सूत्र बताते हैं कि बिजली विभाग के अधिकारियों ने मृतक को केवल एक नोटिस दिया और दूसरे दिन ही उसकी चक्की व मोटर साइकिल तो कुर्क कर के ले ही गए, साथ ही अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया। जिस कारण मृतक अपने आप को अपमानित महसूस कर रहा था।
अनाथ हो गए 4 बच्चे
मृतक किसान द्वारा कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर लेने के बाद उसकी 3 पुत्रियां यामिनी, दीपिका, मुस्कान और बेटा भूपेन्द्र अनाथ हो गए हैं। यह चारों बच्चे 16 वर्ष से कम उम्र के हैं और नाबालिग हैं। मृतक के परिवार में उसके पिता को जरूर पेंशन मिलती है, उसके भाई भी नौकरी करते हैं, पर सभी का अपना अलग-अलग परिवार था। जिस कारण अब इन बच्चों के सिर पर से पिता का साया उठते ही वे पूरी तरह से अनाथ हो गए हैं। उसकी पत्नी विनोवा का रो-रो कर बुरा हाल है।