ग्रह गोचर क्या कहते है? इस महामारी का अंत कब होगा? क्या लोगों को जीवन जीने की सीखनी होगी कला? बता रहे है आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा

ग्रहा धीनम् जगत् सर्वम्………ग्रहों की माया निराली है, सारा संसार ग्रहों (देवता) के अधीन है। आज कोरोना वायरस गुप्त शत्रु की भांति वैश्विक रूप से पुनः  संसार मे दस्तक दे चुका है। इसके होने, फैलने आदि के  कारण आज भी अज्ञात ही बने हुए है। ऐसी कौनसी ग्रह स्थिति  बनी जिससे पूरी दुनिया पुनः इसकी चपेट में है। कब तक रहेगी ग्रहों की मार? 

*देखते है ज्योतिष के नजरिये से-*
प्रदेश और देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक ने बताया कि संहिता ग्रन्थों में देश-विदेश के भविष्य को नव-वर्ष प्रवेश कुंडली के जरिये टटोला जाता है। हमारा भारतीय नव वर्ष गुड़ीपड़वा से तो पाश्चात्य नव-वर्ष 1 जनवरी से प्रारम्भ होता है। अगर हम पाश्चात्य नववर्ष की कुंडली पर विचार करे तो  चतुर्थ स्थान में पञ्चग्रही युति निर्मित हुई थी। धनु राशि में सूर्य,गुरु,शनि,केतु और बुध में पंचग्रही युति निर्मित  की ।शनि-केतु का धनु राशि में सूर्य, गुरु और बुध के साथ युति  सम्बन्ध ने वर्ष 2020 में भयानक संक्रामक बिमारी (वैश्विक महामारी )कोरोना को जन्म दिया। छाया ग्रह केतु के साथ शनि सूर्य की युति ने भय व नकारात्मकता  बढ़ायी ।  

संहिता ग्रंथो के अनुसार गुरु अतिचारी व शनि वक्री हो तो संसार में विनाश के लक्षण है। शनि,मंगल व गुरु की मकर राशि मे युति ने लोगों के कष्टों को बढ़ाया।
24 जनवरी  2020 को शनि ने मकर, मंगल ने 22 मार्च व गुरु ने 29-30 मार्च  20 की दरमियानी रात को मकर राशि में प्रवेश किया। गुरु एक राशि मे सामान्यतः 13 माह तक गोचर करता है। किंतु यहां यह तथ्य उल्लेखनीय है कि गुरु ने अपनी चाल में अतिचारी होकर 13 माह का सफर मात्र 5 माह में पूर्ण कर लिया। संहिता ग्रन्थों में उल्लेख है कि यदि देवराज गुरु एक वर्ष में तीन राशियों को स्पर्श कर ले तो वह वैश्विक महामारी के साथ गम्भीर आर्थिक समस्या निर्मित करता है और  हुआ भी वही ।
शनि-गुरु-मंगल के मकर राशि सम्बन्ध ने वैश्विक महामारी कोरोना का भय दिनों- दिन बढ़ाया।
4 मई  को मंगल इस युति से बाहर हों गए। यह युति, मंगल के कुम्भ राशि में प्रवेश के साथ ही भंग हुई।
11 मई को शनि व 14 मई को गुरु मकर में वक्री हुए। मकर में गुरु का वक्री होना   आंशिक राहत का संकेत देता है।
मई माह से 22 जून के मध्य कोरोना वायरस के अस्तित्व को समाप्त करने पर वैश्विक स्तर पर बड़े शोध हुए और वैक्सीन तैयार  करने की योजना बनी।
30 जून को गुरु ने वक्री होकर स्वयं की धनु राशि मे प्रवेश किया।धनु राशि प्रवेश के साथ ही गुरु की नकारात्मकता धीरे धीरे कम होने लगी।
  हाँ धनु के गुरु ने कुछ सकारात्मक परिणाम देना प्रारम्भ किये। गुरु वायु का कारक है।यह हवा के साथ स्वशन प्रणाली का भी प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि अतिचारी गुरु का नीच मकर राशि की और आकर्षण अति भयंकर संक्रामक रोग कोरोना के जन्म का  कारण बना। धनु में भी देवराज गुरु वक्री ही रहे जो 13 सितम्बर को मार्गी हुए
  इस प्रकार ज्योतिषीय विश्लेषण से यह कहा जा सकता है कि इस वैश्विक महामारी  से राहत का धीमा धीमा सिलसिला 13 सितम्बर को गुरु के मार्गी होने के बाद ही प्रारम्भ हुआ? संक्रामक बीमारी का सम्बंध राहु से भी है। राहु ने   राशि परिवर्तन कर वृषभ में प्रवेश किया, कुछ राहत के संकेत बनने लगे।    
    14 जनवरी से 31 जनवरी 21  तक  शनि,गुरु,सूर्य व शुक्र की युति बनी।
4 फ़रवरी से 8 फर. तक पंचग्रही युति बनी व 9 फ़र  2021 से छः ग्रहों की युति ने पुनः अपना प्रभाव बताना प्रारम्भ किया और इस महामारी के प्रभाव को बढाने का काम किया।    
आगे राहु के साथ मङ्गल ने युति कर इसे अमङ्गल कारी बना दिया। यह युति 13 अप्रैल तक रहेगी। संयोग से 13 अप्रैल से भारतीय नव वर्ष विक्रम 2078 का भी आरम्भ हो रहा है।वर्ष मंगलवार से प्रारंभ हो रहा है।राजा भी वर्ष का मङ्गल होगा व मंत्री भी मङ्गल,,.। क्या मङ्गल मंगलकारी सिद्ध होगा या अमङ्गल कारी??ग्रह  देते भी है व लेते भी??               
नए वर्ष में दशाधिकारियों ( ग्रहों के मंत्री मंडल) में छः पद अशुभ व चार पद शुभ ग्रहों के आधिपत्य में रहेंगे। वर्ष के नाम करण को लेकर भी पंचांगकारों में मतभेद दिखायी दे रहे है। कुछ नए वर्ष का नाम* राक्षस*बता रहे है तो कुछ *आनन्द’
।यदि हम ग्रह गोचरीय स्थिति पर विचार करें तो 13 अप्रैल से प्रारम्भ भारतीय नव वर्ष भी कुछ राहत दे भी सकता नही तो 13 अप्रैल से राहु मङ्गल की अमङ्गल कारी युति के भंग होने के तीन माह बाद तक इस वैश्विक महामारी से राहत मिलने के संकेत मिलते है?
फिर भी हमे जीवन जीने की कला अवश्य ही सीख लेनी चाहिए व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का प्रयास भी करते रहना चाहिये ।

आगे भगवदिच्छा गरीयसी।,,भारतीय नववर्ष विक्रम 2078 सभी देशवासियों के लिए मङ्गल,,,मंगलकारी बनाएं।