लॉकडाउन नहीं, लॉक करिए साहब…

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास
मो.9617565371

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हों या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, दोनों अलग-अलग दल से हैं। परंतु कोरोना महामारी के कठिनतम दौर से दोनों गुजर रहे हैं। लेकिन इन दोनों पर चुनावों में अपने-अपने दल की ‘जीतÓ दिलाने की भी जिम्मेदारी है। रहा सवाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का तो उनका पश्चिम बंगाल में केसरिया लहराना एकमात्र एजेंडा है। इधर कोरोना संक्रमण के मामले में भारत तीसरे नंबर का देश बन गया है। इसलिए यह तय करना समय की सबसे आवश्यकता है कि आम जनता की जिंदगी जरूरी है या चुनाव। और यदि पश्चिम बंगाल, केरल और असम में मतदान की कुछ चरण पूरे हो गए हों तो भी भीड़ से बचने के उपाय तो सब राजनेताओं को राजनीति से ऊपर उठकर मतदाताओं को जिंदगी के लिए तलाशना चाहिए। बता दें कि कोरोना संक्रमण फैलने के पीछे केवल दो ही कारण हैं, जिसमें पहला कारण भीड़ घर से बाहर आ रही है, चाहे चुनाव हो या क्रिकेट तथा दूसरा कारण है कोरोना पीडि़त मरीजों का इलाज के लिए दर-दर भटकना, अस्पतालों में बिस्तर नहीं, निजी अस्पतालों में यदि बिस्तर है, तो मनमानी रकम वसूला जाना, जिससे आम आदमी के पास जिंदगी बचाने के लिए कोई विकल्प भी नहीं है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री जी से आप दोनों मुख्यमंत्रियों से एक ही आग्रह है कि- लॉकडाउन का फार्मूला कामयाब होता यदि नहीं दिखाई दे रहा है तो इंतजार किस बात का। फ्रंट लाइन वर्करों को एवं आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सबको घरों में ही लॉक कर दिया जाए। सरकारी दफ्तर खुलें, अस्पताल खुलें, ताकि कोरोना मरीज भटकें नहीं, पुलिस और मीडिया मैदान पर रहें, प्रशासन चुस्त-दुरुस्त होकर निगरानी रखें कि घर से कम से कम 7 दिन कोई बाहर नहीं आए, मतलब घरों में ही लॉक रहें, तो देखिएगा संक्रमण की रफ्तार रोकने में आपको कितनी सफलता मिलती है। यह छोटी सी संपादकीय भारत के निर्वाचन आयोग के कान भी कुरेदने में बिना परहेज यह लिखने को तैयार है कि अब किसी भी प्रकार के चुनाव की घोषणा से आयोग तब तक बचे, जब तक कोरोना चला नहीं जाता। जो हो गया या हो रहा है, इसे छोड़कर चुनाव आयोग का यह फरमान कि अब जब तक कोरोना है, कोई चुनाव नहीं, देश को बचा सकता है। वरना भीड़ जब-जब बाहर आएगी, कोरोना सिर चढ़कर देश का सत्यानाश करने के लिए ताकतवर बनेगा। इसलिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह है कि अब कोई ऐसा या वैसा क्रिकेट मत कराईए, जहां 50 हजार की भीड़ आ जाए और पूरा छत्तीसगढ़ कोरोना की चपेट में आ जाए। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी यही अपील है कि दमोह चुनाव में शक्ति परीक्षण की जरूरत नहीं है, जरूरत है भीड़ को रोकने की। भीड़ रोकिए साहब, लॉकडाउन की बजाय ‘लॉकÓ करिए यही एकमात्र रास्ता बचा है, वरना….।

विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।