मतलब, शिवराज किसी को कंबल ओढ़कर घी नहीं पीने देंगे…

कड़वी खबर, विजय कुमार दास, मो.9617565371

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का तीसरा नेत्र जब भी खुला है, ईमानदारी का चोला पहनकर पूरी दुनिया को मूर्ख समझने वाले बड़े-बड़े नौकरशाह त्राहिमाम-त्राहिमाम करने लगे हैं। समझा जाता है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के बीच में यह सैद्धांतिक समझदारी तब पनपी है, जब पूरा प्रदेश कोरोना महामारी की मार से जिन्दगी और मौत से जूझ रहा है। ऐसे समय में इतने बड़े कड़वे-कड़वे फैसले निश्चित रूप से मध्य प्रदेश का भाग्य भी बदल सकते हैं। यह लिखने में आज हमें सकोच नहीं है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का अब वह कोई सगा नहीं है, जिसने भी सरकारी तंत्र में बड़ी नौकरशाही का हिस्सा बनकर मध्यप्रदेश की गरीब जनता के हिस्से में से चोरी की हो और ईमानदारी के तमगे को लेकर नये युवा आई.ए.एस. अधिकारियों को चपरासी समझकर डांट लगाया, भाषण इतना पिलाया कि एक-दो युवा आई.ए.एस. अधिकारी नौकरी तक छोड़कर इन महान ईमानदार नौकरशाह से चौराहे पर निपटने को तैयार हो गये। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं साहब राधेश्याम जुलानिया की, हम याद कर रहे हैं पूर्व मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती और एम.गोपाल रेड्डी की और हम बात कर रहे हैं उन शीर्ष नौकरशाहों की जो नियमों की धज्जी उड़ाकर गरीब बच्चों के मिड-डे-मील में बिना मंत्री की प्रशासकीय अनुमोदन के गुड़ की चिकी जैसे मामले में उलझकर रिटायरमेंट के आखिरी समय में अपना ३० साल में जो पाया, उसे खो दिया है। आश्चर्य एवं चौंकाने वाली घटना तो मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक रूप से अब पहली बार घटने वाली है, जिसका अंदाज लगाते ही यह कलम लिखते-लिखते और तेज हो जाती है, यकीन मानिये शिवराज जी और इकबाल सिंह बैंस ने फैसला कर लिया है कि जिन नौकरशाहों ने मध्यप्रदेश में कंबल ओढ़कर घी पिया है, उसे छोड़ो मत। पहली बार ऐसा भी होगा कि ‘पोस्ट रिटायरमेंटÓ इन कंबल ओढ़कर घी पीने वालों की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान (श्वह्रङ्ख) पूरी गंभीरता से करेगा और ऐसे नौकरशाहों की संपत्ति का पता भी लगायेगा, जप्ती भी बनायेगा। जिसे इन कंबल ओढ़कर घी पीने वाले नौकरशाहों ने भोपाल के बाहर कहां-कहां पर अर्जित की है। सूत्रों के अनुसार उपरोक्त बड़े नौकरशाहों पूर्व मुख्य सचिव एम गोपाल रेड्डी को छोड़कर सबने भोपाल के अलावा अलग-अलग ठिकानों पर कालेधन के साथ क्या-क्या संपत्ति निर्मित की है, पोस्ट रिटायरमेंट जांच के लिए दस्तावेज तैयार किये जा रहे हैं। इस कड़वी खबर का लब्बोलुआब यह है कि आप यदि ईमानदार हैं तो ईमानदारी का प्रमाण दीजिए और बेईमान हंै तो दाल में नमक से ज्यादा बर्दाश्त से बाहर है, ऐसा फैसला शिवराज सरकार का है, हमारी इस कड़वी खबर का नहीं है, इसलिए रिटायर होने वाले या रिटायर हो चुके हैं, ऐसे पुरानी पीढ़ी के नौकरशाहों या आई.पी.एस. अधिकारियों के लिए इस कड़वी खबर का महत्व भले ही कम होगा, परंतु मध्यप्रदेश के भविष्य को संवारने का जज्बा लेकर आए युवा आई.ए.एस. अधिकारियों या फिर आई.पी.एस. अधिकारियों के लिए सबक लेने का समय है, वरना सबको पता है कुछ कलेक्टर रेत के अच्छे कारोबारियों को माफिया क्यों कहते हैं और माफियाओं के लिए कहते हैं इन्हें रास्ता दो भई जाने दो। अब इन्हें सम्हलना होगा और उन्हें भी सम्हलना होगा, जो आई.ए.एस. और आई.पी.एस. दंपति (कपल) है, उनमें एक निहायत ईमानदारी का प्रतीक बना हुआ है तो दूसरा कहता है कंबल ओढ़कर घी पीने में हर्ज क्या है- ऐसे मामलों में शिवराज सिंह और मुख्य सचिव का गंभीर होना, यह फैसला सुनाना कि अब कंबल ओढ़कर घी पीने वाले आला अधिकारियों को जेल का रास्ता दिखाओ और मध्यप्रदेश को दाल में नमक खाने वालों के हवाले कर दो, जिन्हें २४ङ्ग ७ काम करना भी आता है तो बिलकुल ही गलत नहीं है। यूं कहा जाये कि हमारी आज की यह ‘कड़वी खबरÓ विकास के पहिये को कोरोना काल की विषम परिस्थितियों में चलाने वाले नौकरशाहों के साथ खड़े होने के लिए ही लिखा गया है तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। रहा सवाल कंबल ओढ़कर घी पीने वालों का तो इन्हें माफ करना मुख्यमंत्री के लिए बड़ी चुनौती है, इसमें शक नहीं।
कड़वी खबरके लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।