कमलनाथ या सिंधिया निशाने पर कौन…?

संडे डायरी
विजय कुमार दास
मो.9617565371

मध्यप्रदेश में मात्र एक विधान सभा उप चुनाव के लिए दोनों फिर आमने-सामने हैं। आमने-सामने का यहां ‘संडे डायरीÓ में आशय है जिस पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कारण ग्वालियर के महाराजा राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया सड़क पर उतरे और कमलनाथ से सत्ता छीनने के लिए मध्यप्रदेश में शिखर के सबसे बड़े अलंबरदार बन गए। अब उन्हीं सिंधिया ने कमलनाथ जी को सड़क पर उतारकर गिन-गिन कर बदला लेने का ‘टारगेटÓ बनाया है। लेकिन इस बार सिंधिया अकेले नहीं है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो उनके साथ अर्जुन की भूमिका में है और नगरीय विकास मंत्री भूपेन्द्र सिंह चुनावी चाण्क्य हैं। कहा जाये कि गुस्से में सिंधिया इसलिए हैं, क्योंकि कमलनाथ ने उनकी वजह से सरकार बनाई तब सब कुछ ठीक था, लेकिन जब उन्हें अपमानित किया और सिंधिया ने कमलनाथ सरकार का तख्ता उलट दिया तो सिंधिया को सौ-सौ बार गद्दार कहकर अपने ही राजनीतिक मर्यादाओं को कमलनाथ ने तार-तार कर दिया और इसलिये 28 विधानसभा के उपचुनावों में सिंधिया को गद्दार कहना ही भारी पड़ गया। जनता ने जितने उत्साह से कमलनाथ सरकार को बनाने में समर्थन दिया था, उससे ज्यादा दुगने उत्साह से उसी जनता ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की बात पर भाजपा में शिवराज सिंह चौहान को चौथी बार मुख्यमंत्री बनाए रखने में दिल खोलकर समर्थन कर दिया तो कमलनाथ के पैरों से जमीन ही खिसक गई। यह कहते थकते नहीं है, चुनावी चाणक्य भूपेन्द्र सिंह 15 महीनों की सरकार में मुख्यमंत्री पद के चस्के ने उनका राजनीतिक कद इतना छोटा कर देगा ऐसा शायद कमलनाथ ने कभी सोचा नहीं होगा। परंतु खिसियानी बिल्ली के पास खंभा नोचने के अलावा कोई काम नहीं रहता तो अब कमलनाथ जी एक मात्र दमोह विधानसभा उप चुनाव में सिंधिया को ललकारने फिर रोड-शो आगामी 14 अप्रैल को करने जा रहे हैं, जिससे जनता खुश नहीं है, भूपेन्द्र सिंह कहते हैं जनता मानकर चल रही है कि कमलनाथ को कोरोना का ध्यान रखना चाहिए था। पहले जनता की जिंदगी बचाने की पहल का ढोंग किया। भीड़ जुटाने के आरोप भाजपा पर लगाए और अब सिंधिया को ललकारने के लिए फिर रोड-शो कोई पसंद नहीं कर रहा है। हालांकि 13 अप्रैल को ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी ने कमलनाथ को सड़क पर उतरने के पहले ही एक्सपोज करने की जिम्मेदारी सौंप दी है। अब दमोह में होगा यह कि सिंधिया को भीड़ जुटाने की जरूरत ही नहीं होगी, वे तो अपनी मर्जी से आई हुई भीड़ के साथ ‘रोड-शोÓ में सिंधिया परिवार को ललकारने वाले कमलनाथ का जवाब देने पहुंच रहे हैं। महाराजा सिंधिया के सूत्रों के अनुसार 14 अप्रैल को बाबा अंबेडकर की जयंती है, तो यह बात भी तय हो जाएगी कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति का पूरा समर्थन सिंधिया ने जुटाकर कमलनाथ को ‘टारगेटÓ करके भाजपा की झोली कांग्रेस से आए विधायक राहुल लोधी की जीत से भर देंगे। सवाल यह उठता है कि क्या उपरोक्त दोनों नेताओं के नाम पर संभावित उमडऩे वाली भीड़ का संज्ञान चुनाव आयोग को है अथवा नहीं, यदि चुनाव आयोग ने इसे गंभीरता से ले लिया तो भी ‘रोड-शोÓ में रोक लगाने का फायदा सिंधिया के नाम पर भाजपा को मिल सकता है। इसलिए ‘चक्कू-कद्दू पर गिरे या कद्दू-चक्कू पर गिरे, कटना तो कद्दू को ही होता है,Ó और कद्दू कौन है सबको पता है। मतलब इस संडे डायरी का लब्बोलुआब है कमलनाथ जी आप थके नहीं, हारे नेता हैं और सबसे ज्यादा अनुभवी एवं समझदार है। जोर 230 पर लगाने का इंतजार कीजिये एक सीट के लिए निशाने से बचिये।
संडे डायरी के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।